Health

डाक्टरों का आरोप है कि मुख्यमंत्री को गलत सूचना देकर जूनियर डाक्टरों के खिलाफ एक षडयंत्र रचा गया था। इनका आरोप है कि इस खेल में सीएम के  निरीक्षण के वक्त जो डॉक्टर ड्यूटी से गायब थीं उनकी जानकारी छिपा दी गई है।

कोरोना संकट के इस काल में पूरी दुनिया में मास्क पहनने पर जोर दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मास्क पहनने से कोरोना वायरस के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है मगर...

कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ रहा है, इस घातक वायरस से दुनिया भर के देश जूझ रहे हैं। भारत में भी इस वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या लाखों में पहुंच गई है।

इस कार्य को सकुशल निष्पादित करने में संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ देवेंद्र की  भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है, जिनके अथक प्रयास से इस कोरोना महामारी के समय मे भी सभी कुशल चिकित्सको ने मानवता का परिचय देते हुए सफल सर्जरी करके दोनों बच्चो को अलग किया।

नॉन कॉन्टेक्ट थर्मामीटर दो तरह के होते हैं। टिम्पैनिक थर्मामीटर एक नॉन कॉन्टेक्ट इन्फ्रारेड थर्मामीटर है। जिसका उपयोग कान के अंदर के लिए करते हैं। इससे स्क्रीन पर शरीर का तापमान लिख कर आ जाता है। दूसरा है थर्मल स्कैनर। थर्मल स्कैनर हाथों से पकड़ कर गन की तरह दिखने वाला एक नॉन कॉन्टेक्ट थर्मामीटर है।

अगर आप डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। डॉक्टर को फोन करने से पहले आप डॉक्टर का पुराना पर्चा और जांच रिपोर्ट (यदि कोई हो) को अपने पास रख लें। ताकि ऑनलाइन डॉक्टर से एडवाइस लेते समय जब वे आपसे जांच रिपोर्ट या पुराने पर्चे के बारे में पूछें, तो आप तुरंत जवाब दे सकें।

शरीर को डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर के अंदर जमे विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। वैसे तो हर मौसम में शरीर को डिटॉक्स करना जरूरी है लेकिन गर्मियों में शरीर को डिटॉक्स करने से ज्यादा फायदा मिलता है।

कई बार लोग नहाते वक्त कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जिनसे शरीर को कुछ नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।ज्यादा समय तक नहाने से त्वचा खराब हो सकती है, शरीर की नमी भी इससे कम हो सकती है। इसलिए हर व्यक्ति को नहाने में ज्यादा समय नहीं लगाना चाहिए।

आज की महामारी के दौर में तो चिंता का लेवल बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है। आप एंजायटी को घटाने या समाप्त करने के लिए कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं।

कोरोना से आज पूरी दुनिया में प्रभावित है। डॉक्टर अपनी जिम्मेदारियों को उठाते हुए मरीजों के जीवन की रक्षा कर रहें हैं तो वहीं चिकित्सा क्षेत्र में रीढ़ कही जाने वाली नर्सों का योगदान भी उतना ही बड़ा है। 12 मई का दिन नर्सों का ही दिन माना गया है।