20 लाख करोड़ के पैकेज से अडानी-अंबानी मालामाल! मिला ये फायदा

बीते दिनों पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर पैकेज का एलान किया था, जिसके तर्ज पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांचवें चरण में राहत पैकेज के बारे में जानकारी दिया।

नई दिल्ली: बीते दिनों पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर पैकेज का एलान किया था, जिसके तर्ज पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांचवें चरण में राहत पैकेज के बारे में जानकारी दी। लेकिन वित्त मंत्री द्वारा किये गए चौथे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की बात करें तो, ये साफ़ होता नज़र आ रहा है कि प्रमुख लाभार्थियों में टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, GVK, हिंडाल्को और जीएमआर जैसी कंपनियों के अलावा अडानी, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप, वेदांता और कल्याणी जैसे कारोबारी समूह होंगे।

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इन कंपनियों को मिला फायदा

चौथे चरण में जारी पैकेज से कई बड़े उद्योग को फायदा मिलेगा। इन उद्योगों में टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, GVK, हिंडाल्को और जीएमआर जैसी बड़ी कंपनियों के अलावा अडानी, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप, वेदांता और कल्याणी जैसे कारोबारी समूह शामिल होंगे।

दरसअल सरकार के चौथे चरण के ऐलान के बाद अडानी पावर, टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और रिलायंस पावर जैसी निजी कंपनियां कोल ब्लॉक के लिए बोली लगाएंगी और इस इंडस्ट्रीज के लिए जो राहत पैकेज दिए गए हैं, उसका फायदा सीधे इन कंपनियों को मिलेगा।

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इस दौरान मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे कैप्टिव और नॉन कैप्टिव माइंस की परिभाषा बदलेगी। यानी मौजूदा कैपिटल यूजर जैसे टाटा पावर, रिलायंस पावर और टाटा स्टील को अपने साथ कोयला खनन लाइसेंस बनाए रखने के लिए तय समय पर बोली लगानी होगी।

एफडीआई को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किया गया

इसके साथ ही रक्षा उत्पादन में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को सरकार ने बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले 49 प्रतिशत ही होता था। वहीं बीते दिनों कई भारतीय कंपनियों ने विदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ कई संयुक्त उपक्रमों का गठन किया था, लेकिन अधिकांश बड़ी परियोजनायें असफल रहीं, क्योंकि विदेशी भागीदार इन परियोजनाओं में अपनी बौद्धिक पूंजी की वजह से अधिक हिस्सेदारी चाहते थे। बता दें कि पिछले दिनों अडानी और अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने भारत में प्रोडक्शन के लिए विदेशी कंपनियों के साथ समझौता किया था। जबकि भारत में ही पुणे स्थित कल्याणी समूह के पास बड़ा रक्षा प्रोडक्ट का कारोबार है।

केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली कंपनियों का निजीकरण

इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिजली कंपनियों का निजीकरण होगा। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रीपेड बिजली के मीटर लगाए जाएंगे। खास बात ये है कि अडानी और टाटा पावर इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ी हैं। गौरतलब है कि अडानी ने 2017 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मुंबई वितरण कारोबार को खरीदकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली है। वहीं बीते हफ्ते, अंबानी समूह ने अपने दिल्ली बिजली वितरण कारोबार को भी बिक्री का ऐलान किया है।

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