राम मंदिर तोड़कर बनाई गई थी मस्जिद, वकील ने दिया बयान

इस मामले पर दिग्गज नेताओं के भी अलग-अलग बयान आ रहे हैं। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अयोध्या विवाद के हल के लिए कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए टीम गठित की थी, जोकि विफल रही।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई चल रही है। यह आठवां दिन है जब इस मामले की सुनवाई चल रही है। ऐसे में आज सुनवाई के दौरान ‘राम लला विराजमान के वकील ने कोर्ट में कहा कि मस्जिद बनाने के लिए ही हिंदू मंदिर को तोड़ा गया था।

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वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट में ये भी कहा कि ‘एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए की आकृतियों का जिक्र है, जिसका मुस्लिम संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है।’

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हिन्दू मंदिर होने के दावों को पुख्ता करने की कोशिश

चीज जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट से अन्य पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला देते हुए विवादित क्षेत्र में हिन्दू मंदिर होने के दावों को पुख्ता करने की कोशिश की।

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बता दें, अयोध्या मामले को लेकर कोर्ट भी काफी परेशान हैं। इसपर तरह-तरह के लोग तमाम तरीके की बातें बता रहे हैं। हालांकि, ब्रिटिश राज में भी जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस जगह का बंटवारा किया था तो मस्जिद की जगह राम जन्मस्थान का मंदिर माना था।

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इस मामले पर दिग्गज नेताओं के भी अलग-अलग बयान आ रहे हैं। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अयोध्या विवाद के हल के लिए कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए टीम गठित की थी, जोकि विफल रही। इसपर सीएम योगी ने कहा था कि उनको यह पहले से पता था कि इससे कोई हल नहीं निकलने वाला है। इसके बाद से 6 अगस्त से रोजाना मामले पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है।