लाठी वाले बापू को था इस कार से बेपनाह प्यार, अब ऐसी है BR F50 की हालत

महात्मा गांधी की रांची और झारखण्ड के कई शहरों से बहुत यादें जुड़ी हुई हैं।  कई इतिहासकारों का मानना है कि गांधीजी ने चंपारण सत्याग्रह की योजना रांची में ही बनाई थी। इन्ही यादों से जुड़ी है एक फोर्ड कार।

लाठी वाले बापू को था इस कार बेपनाह प्यार, अब ऐसी है BR F50 की हालत

लाठी वाले बापू को था इस कार बेपनाह प्यार, अब ऐसी है BR F50 की हालत

नई दिल्ली : महात्मा गांधी की रांची और झारखण्ड के कई शहरों से बहुत यादें जुड़ी हुई हैं।  कई इतिहासकारों का मानना है कि गांधीजी ने चंपारण सत्याग्रह की योजना रांची में ही बनाई थी। इन्ही यादों से जुड़ी है एक फोर्ड कार। महात्मा गांधी सन् 1940 में रामगढ़ अधिवेशन में शामिल होने के लिए फोर्ड कार से ही रांची आए थे।

कार से इन शहरों का किया था भ्रमण

इसी फोर्ड कार से गांधीजी ने स्वाधीनता आंदोलन को चलाने के लिए रांची, जमशेदपुर, रामगढ़, हजारीबाग, देवघर आदि शहरों का भ्रमण भी किया था। और ये फोर्ड कार आज भी रांची में सुरक्षित है।

लाठी वाले बापू को था इस कार बेपनाह प्यार, अब ऐसी है BR F50 की हालत
लाठी वाले बापू को था इस कार बेपनाह प्यार, अब ऐसी है BR F50 की हालत

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महात्मा गांधीजी स्वाधीनता संग्राम के दौरान बहुत बार रांची आए थे। इतिहासकारों के अनुसार, गांधीजी स्वाधीनता संग्राम के दौरान सन् 1917, 1925, 1934 और 1940 में रांची आए थे। फिर इसी दौरान गांधीजी ने और भी बहुत से आंदोलनों की योजना रांची में बनाई थी।

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इतिहासकारों के अनुसार, रांची में चंपारण आंदोलन के तहलका मचाने पर जून 1917 में  ही उस समय के लेफ्टिनेंट गवर्नर गैट के साथ गांधी जी ने आड्रे हाउस में  बातचीत की थी।

रामगढ़ अधिवेशन में भाग लेने के लिए सन् 1940 में गांधी जी रांची में आए थे और इसके साथ ही कई जगहों का भ्रमण भी किया था। गांधीजी रांची से रामगढ कार में बैठकर गये थे।

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जायसवाल परिवार के पास सुरक्षित है कार

यह फोर्ड कार सन् 1920 में बनी थी। यह फोर्ड कार आज भी यहां के जायसवाल परिवार के पास सुरक्षित है। उस समय के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामनारायण जायसवाल और राय साहेब लक्ष्मीनारायण जायसवाल ने इस गाड़ी को चलाया था। हालांकि अब इस कार की हालत जर्जर हो गई है।