विदेशों में मची धूम: मोदी की हुई जय-जयकार, अयोध्या फैसले के बाद ऐसा रहा माहौल

अयोध्या राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर शनिवार को देश की सर्वोच्च अदालत से आए फैसले का सभी ने स्वागत ने किया। अयोध्या फैसले से जुड़ी खबरें दुनियाभर के मीडिया में प्रमुखता से ऑनलाइन संस्करणों में प्रकाशित हुई है।

नई दिल्ली : अयोध्या राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर शनिवार को देश की सर्वोच्च अदालत से आए फैसले का सभी ने स्वागत ने किया। अयोध्या फैसले से जुड़ी खबरें दुनियाभर के मीडिया में प्रमुखता से ऑनलाइन संस्करणों में प्रकाशित हुई है। देश-विदेश के अखबारों में इस फैसले की तारीफ की गई है।

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ये है अखबारों में फैसले को लेकर छपी रिपोर्ट

वाशिंगटन पोस्ट

एक दिन पहले ही अपने ओप-एड में राणा अय्यूब की अयोध्या मामले पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अखबार ने सुप्रीम फैसले की रिपोर्ट जस की तस अपनी वेबसाइट पर दी है।

अखबार ने लिखा, अदालत ने फैसला दिया है कि ध्वस्त मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बन सकता है। वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों ने स्वीकार करने की बात कही थी।

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जाएगा क्योंकि हाल ही में मई माह में उन्हें जो जनादेश मिला है उसमें यह भी एक मुद्दा शामिल था।

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द न्यूयॉर्क टाइम्स

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने देश की सबसे पुरानी धार्मिक साइट पर चल रहे कानूनी विवाद में हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए एक रास्ता निकाल लिया है। सबसे अच्छा यह हुआ है कि बहुसंख्यक बहुमत वाली सरकार के बजाय अदालत ने इस मसले पर अपना तटस्थ रुख सामने रखा।

अदालत ने मुस्लिम समुदाय को भी वैकल्पिक जमीन मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों ही पक्षों की दलीलों को सुनने और एएसआई द्वारा रखे गए तथ्यों के आधार पर यह फैसला हुआ है। इस फैसले को लेकर मुस्लिमों को डर था कि वे देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाएंगे लेकिन फैसला तटस्थ रहा।

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डॉन

शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद का गिराया जाना कानून और व्यवस्था का पूरी तरह से उल्लंघन था। फैसले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने असंतोष जताया है।

येरुशलम पोस्ट

भारतीय शीर्ष अदालत ने आखिरकार वही फैसला दिया जो ऐतिहासिक तथ्यों ने साबित किया। उसने विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया। इससे पहले देश और उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो। इस फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने सम्मान किया है।

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