क्या राहुल-प्रियंका में चल रही है अघोषित जंग, लग रहा कांग्रेस को पलीता

चर्चा यह है कि अगले महीने से प्रियंका गांधी कांग्रेस मुख्यालय में बैठना शुरू कर देंगी। जिसके लिए कांग्रेस दफ्तर में साज सज्जा जोरों पर चल रही है।

Published by Shivani Awasthi Published: January 19, 2021 | 10:35 pm

रामकृष्ण वाजपेयी

प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी के बीच चल रही सियासी जंग जैसे जैसे परवान चढ़ रही है कांग्रेस का बंटाधार होता जा रहा है। इस जंग में जहां दिग्गज कांग्रेसी हाशिये पर सिमटते जा रहे हैं, वहीं उसका जनाधार भी खत्म होता जा रहा है। इन दोनों की जंग से सबसे अधिक फायदा भाजपा को मिल रहा है, क्योंकि बात प्रियंका की नहीं उनके महत्वाकांक्षी पति राबर्ट वाड्रा की है। और जब-जब प्रियंका मुखर होकर सामने आने की कोशिश करती हैं, उसी के साथ केंद्रीय प्रत्यावर्तन निदेशालय सक्रिय हो जाता है। आज की ताजा खबर यह है कि राबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर ईडी पूछताछ कर सकती है।

 कांग्रेस मुख्यालय में अगले महीने से बैठेंगी प्रियंका

प्रियंका गांधी वर्तमान में उत्तर प्रदेश देख रही हैं। चर्चा यह है कि अगले महीने से वह कांग्रेस मुख्यालय में बैठना शुरू कर देंगी। जिसके लिए कांग्रेस के दफ्तर में उनके कक्ष की साज सज्जा जोरों पर चल रही है। लेकिन उनका यूपी में बैठना इसलिए संदिग्ध होता जा रहा है कि वह अपने पति राबर्ट वाड्रा के मामलों को देखें या कांग्रेस को।

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कांग्रेस मुख्यालय में आज अजब नजारा देखने को मिला जहां प्रियंका गांधी वाड्रा के खास पार्टी अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू अपने कक्ष में विराजमान थे जबकि पूरा कांग्रेस का दफ्तर खाली पड़ा था। किसी कक्ष में कोई पदाधिकारी नहीं था।

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राबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है ईडी

सूत्रों ने बताया कि कुछ पदाधिकारी चेहरा दिखाकर चाय-पानी करके अपने-अपने काम धंधों में निकल जाते हैं। यानी संगठन से किसी का लेना देना नहीं। अपनी जमीन खो चुकी कांग्रेस में लकीर पीटने का काम हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी कैडर बड़े संकट से गुजर रहा है और यह संकट पिछले एक साल से लगातार बढ़ता जा रहा है। यह संकट कहीं और से नहीं प्रियंका के साथ आई उनकी ‘लाल सेना’ की घुसपैठ का है।

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यूपी में आज पुराने लगभग सभी नेता हाशिये पर जा चुके हैं। पार्टी के प्रमुख पदों पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (आइसा) और रिहाई मंच जैसे वामपंथी संगठनों से आए लोगों का कब्जा है जो इसे अपने ढंग से चला रहे हैं।

प्रियंका गांधी वाड्रा के OSD संदीप सिंह जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष

सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी वाड्रा के ओएसडी संदीप सिंह जो कि जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे हैं और उनके चेलों की टीम ही अघोषित रूप से कांग्रेस के कारपोरेट आफिस को चला रही है। बाकी किसी की न तो कोई हैसियत है न दखल।

बात करें केंद्रीय स्तर पर तो प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा गाहे बगाहे सक्रिय राजनीति में आने की मंशा लंबे समय से जता रहे हैं लेकिन हाईकमान यानी सोनिया गांधी की ओर से उन्हें हरी झंडी नहीं मिल रही है। जबकि राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की बात जब उठी थी उस समय राहुल गांधी ने स्वयं एलान कर दिया था कि न तो मै अध्यक्ष बन रहा हूं नहीं प्रियंका गांधी बनेंगी।

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प्रियंका के ससुराली राहुल पर ही साध रहे निशाना

अब इस लडाई में प्रियंका की ननद यानी राबर्ट वाड्रा की बहन के पति भी धीरे धीरे आगे आ रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का जिक्र कर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा था।

Rahul Gandhi

उन्होंने एक डिबेट में कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम की एक टिप्पणी पर तंज कसते हुए कहा था कि बराक ओबामा ने पांच मिनट में राहुल गांधी को पहचान लिया, मगर कांग्रेस पार्टी के नेता उन्हें अभी भी नहीं पहचान पाए।

ओबामा की किताब में राहुल गांधी पर टिप्पणी

बराक ओबामा अपनी एक किताब में राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि वो एक नर्वस और तैयारी करते छात्र की तरह लगे जो अपने शिक्षक को प्रभावित करना चाहता है मगर उसके भीतर ‘विषय का मास्टर’ बनने के लिए जुनून या योग्यता की कमी है। ओबामा ने अपने कार्यकाल के संस्मरणों पर लिखी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में इसका जिक्र किया है। और शहजाद पूनावाला ने इन्हीं संस्मरणों के आधार पर राहुल पर निशाना साधा था।

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कहा जाता है कि शहजाद ने पालीटिक्स ज्वॉइन करने से पहले बाकायदा ‘ग्रूमिंग’ कोर्स किया है। जिसमें कैसे बोलना है, कैसा दिखना है, इसका बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। वह कांग्रेस की छात्र इकाई एन.एस.यू.आई. के पुणे के उपाध्यक्ष रहे हैं।

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