क्या बन गया शाहीनबाग़: अब मंच से चिल्ला-चिल्ला कर बुलाई जा रही भीड़

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगभग 2 महीने से शाहीन बाग़ में हो रहा प्रदर्शन दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद से विरान हो चुका है।

दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगभग 2 महीने से शाहीन बाग़ में हो रहा प्रदर्शन दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद से विरान हो चुका है। आलम ये हैं कि मंच से बार बार भीड़ जुटाने की अपील की जा रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को तो जैसे अब सीएए में कोई रूचि ही नहीं रह गयी। इसके अलावा शाहीनबाग़ में पुलवामा हमले के शहीदों को नमन करते हुए दो दिन राजनीतिक भाषण न दिए जाने का ऐलान किया है।

शाहीन बाग़ में पसरा सन्नाटा:

दिल्ली स्थित शाहीनबाग़ में लगभग दो महीनों से चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन इन दिनों शाहीन बाग़ का नजारा कुछ और ही है। दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन में अब लोग कम आ रहे हैं। बता दें कि यह भीड़ दिल्ली चुनाव के बाद से कम हो गयी है। धरनास्थल पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है ताकि भीड़ आकर्षित हो सके।

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ऐसे में मंच से बार-बार ज्यादा भीड़ जुटाने को लेकर अपील की जा रही है। लाउडस्पीकर के जरिये लोगों को बड़ी संख्या में शाहीनबाग़ पहुंचे के लिए कहा जा रहा है। इसके अलावा शाहीन बाग़ की दंबग दादियाँ भी लोगों का हौंसला बढ़ा रहीं हैं।

इनको मिली शाहीन बाग़ में हलचल बढ़ाने की जिम्मेदारी:

शाहीनबाग़ में ट्रांसजेंडर प्रदर्शनकारी भी शामिल होंगे। जल्द ही ट्रांसजेंडर वक्ता समर्थन में जुटेंगे और धरने पर बैठेंगे। वहीं यहां आगामी रविवार को बच्चों को संगीत, एक्टिंग आदि पर कक्षाएं  भी दी जाएंगी। इस क्षेत्र से जुड़े छात्र व शिक्षक इसके बारे में बताएंगे।

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पीएम मोदी को वेलेंटाइन पर शाहीनबाग़ में न्योता:

इतना ही नहीं शाहीन बाग़ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। लोगों ने प्रदर्शनस्थल पर वेलेंटाइन डे के मौके पर प्रधानमंत्री के नाम से गुलदस्ते बनाकर रखे गए हैं। उन पर अंग्रेजी में लिखा है कि मोदी कृपया शाहीनबाग में आइए।

पुलवामा हमले की बरसी पर शाहीनबाग़ में राजनीतिक भाषण नहीं:

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वहीं आज पुलवामा हमले की पहली बरसी है। 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत को याद करते हुए शाहीनबाग़ में 14 और 15 फरवरी को कोई राजनीतिक भाषण नहीं होगा। वहीं दोनों दिन यहां देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। शाम में मोमबत्तियां जलाकर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी जाएँगी।

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