अब कापेंगे बलात्कारी: निर्भया दोषियों को इस तरह होगी फांसी, जाने पूरी प्रक्रिया

शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में निर्भया के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई टाल दी गई। अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। आपको बता दें कि 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होनी है।

Published by Harsh Pandey Published: December 14, 2019 | 4:22 pm
Modified: December 14, 2019 | 4:28 pm

नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप के दोषियों के बहुत कम दिन बचे हैं। खबर है कि निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख 18 दिसंबर को तय होगी।

दरअसल, शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में निर्भया के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई टाल दी गई। अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। आपको बता दें कि 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होनी है।

चारों दोषियों को मौत की सजा…

कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले में चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। अक्षय ने इसके खिलाफ याचिका लगाई है। अक्षय ने अपने वकील के जरिये दाखिल याचिका में कहा है कि प्रदूषण के कारण वैसे ही लोगों की जिंदगी कम हो रही है फिर फांसी देने की क्या जरूरत है।

ज्ञात हो कि कोर्ट मामले के तीन अन्य दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका बीते साल जुलाई में खारिज कर चुका है।

पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा…

पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों के ब्लैट वारंट पर विचार किया जाएगा। निर्भया के माता-पिता ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दोषियों को जल्द फांसी दिए जाने की मांग की थी।

 

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फिलहाल हम आपको उस फांसी के फंदे के बारे में बताते हैं जिसके जरिए दरिंदों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाता है। कहां और कैसे तैयार होता है फांसी का फंदा? कौन बनाता है ये फंदा? फांसी के फंदे से जुड़ी पूरी जानकारी आपको बताते है…

आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे देश में फांसी देने के लिए रस्सी केवल बिहार के बक्सर सेंट्रल जेल में ही तैयार की जाती है। फांसी के लिए मनीला रस्सी का इस्तेमाल किया जाता है। यह व्यवस्था अंग्रेजों के समय से चलती आ रही है।

मनीला रस्सी तैयार करने के लिए 172 धागों को मशीन में पिरोकर घिसाई की जाती है। मजबूत धागा बनाने के लिए जे-34 किस्म की रुई का इस्तेमाल किया जाता है।

आठ लच्छी को रातभर नमी में ओस में मुलायम होने के लिए छोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से रस्सी की मजबूती बढ़ जाती है। इसके बाद तीन रस्सी को एक मशीन में घुमाकर मोटी रस्सी बनाई जाती है।

एक फांसी का फंदा तैयार करने के लिए 20 फीट लंबी रस्सी बनाई जाती है। बक्सर से पहले फांसी की रस्सी फिलीपिंस की राजधानी मनीला में बनाई जाती थी। इसलिए इसका नाम मनीला रस्सी रखा गया है।

इसमें एक-एक कर 18 धागे तैयार किए जाते हैं। सभी को मोम में पूरी तरह भिगो दिया जाता है। इसके बाद धागों को मिलाकर मोटी रस्सी तैयार की जाती है। अंग्रेजों के समय से ही बक्सर जेल में कैदी मौत का फंदा तैयार करते आ रहे है।

बक्सर जेल में सजा काट रहे कैदियों को प्रशिक्षण के तौर पर फांसी का फंदा तैयार करने का काम मिलता है। फिर पुराने कैदी नए कैदियों को यह प्रशिक्षण देते हैं।

सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी…

ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि फांसी हमेशा सूर्योदय से पहले ही क्यों दी जाती है। इसके पीछे कोई बड़ा या रोचक कारण नहीं है। ऐसा केवल इसलिए किया जाता है ताकि इससे जेल के बाकी का काम बाधित न हो।

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यह है पूरा मामला…

2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला भारत की राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 को हुई एक बलात्कार तथा हत्या की घटना थी, जो संचार माध्यम के त्वरित हस्तक्षेप के कारण प्रकाश में आयी।

30 दिसम्बर 2012 को उसका शव दिल्ली लाकर पुलिस की सुरक्षा में जला दिया गया। इस कृत्य की निन्दा करते हुए सोशल मीडिया में ट्वीटर फेसबुक आदि पर काफी कुछ लिखा गया।

इस घटना के विरोध में पूरे देश में उग्र व शान्तिपूर्ण प्रदर्शन हुए जिसमें नई दिल्ली, कलकत्ता और बंगलौर में हुए प्रदर्शनों उल्लेखनीय हैं।

उल्लेखनीय बात यह है कि नई दिल्ली में यौन अपराधों की दर अन्य मैट्रोपॉलिटन शहरों के मुकाबले सर्वाधिक (प्रति 18 घण्टे पर लगभग एक बलात्कार) है। इससे पूर्व भारत की एक मात्र महिला राष्ट्र्पति प्रतिभा पाटिल सुप्रीम कोर्ट द्वारा बलात्कार के पांच मामलों में दी गयी फांसी की सजा को माफ करके उम्रकैद में बदल चुकी हैं।

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इसके साथ ही इस मामले की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी निन्दा हुई। इसके परिणाम स्वरूप कई कड़े कानून संसद में पारित किये गए हैं।

एक आरोपी ने जेल में की आत्महत्या…

11 मार्च 2013 राम सिंह नामक मुख्य आरोपी ने सुबह तिहाड़ जेल में आत्म-हत्या कर लिया। हालांकि राम सिंह के परिवार वालों तथा उसके वकील का मानना है कि उसकी जेल में हत्या की गयी है। 14 सितम्बर 2013 को इस मामले के लिये विशेष तौर पर गठित त्वरित अदालत ने चारो वयस्क दोषियों को फांसी की सज़ा सुनायी।

निर्भया, एक भयावह घटना…

निर्भया पीड़िता को समाज व मीडिया द्वारा दिया गया नाम है। भारतीय कानून व मानवीय सद्भावना के अनुसार ऐसे मामले में पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया जाता। नई दिल्ली में अपने पुरुष मित्र के साथ बस में सफर कर रही निर्भया के साथ 16 दिसम्बर 2012 की रात में बस के निर्वाहक, मार्जक व उसके अन्य साथियों द्वारा पहले भद्दी-भद्दी फब्तियां कसी गयीं और जब उन दोनों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया।

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जब उसका दोस्त बेहोश हो गया तो उस युवती के साथ उन ने बलात्कार करने की कोशिश की। उस युवती ने उनका विरोध किया परन्तु जब वह संघर्ष करते-करते थक गयी तो उन्होंने पहले तो उससे बेहोशी की हालत में बलात्कार किया।

बाद में वे सभी उन दोनों को एक निर्जन स्थान पर बस से नीचे फेंककर भाग गये। किसी तरह उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वहां बलात्कृत युवती की शल्य चिकित्सा की गयी।

परन्तु हालत में कोई सुधार न होता देख उसे 26 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया जहां उस युवती की 29 दिसम्बर 2012 को मौत हो गई। 30 दिसम्बर 2012 को दिल्ली लाकर पुलिस की सुरक्षा में उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।