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कौन हैं ये बुजुर्ग जोड़े: जिन्होंने दे दी अपनी पूरी संपत्ति इस डॉक्टर को

मुंबई के तारदेव में एक बुजुर्ग दंपती ने अपनी सारी संपत्ति अपने डॉक्टर के नाम कर दी। डॉक्टर पिछले 5 सालों से बुजुर्ग दंपती का देखभाल कर रही थी। साल 2014 में अपने मौत से 5 साल पहले 87 साल के दिनशॉ गांधी ने एक वसीयत बनाई थी।

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ShreyaBy Shreya

Published on 5 Feb 2020 9:49 AM GMT

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मुंबई: मुंबई के तारदेव में एक बुजुर्ग दंपती ने अपनी सारी संपत्ति अपने डॉक्टर के नाम कर दी। डॉक्टर पिछले 5 सालों से बुजुर्ग दंपती का देखभाल कर रही थी। साल 2014 में अपने मौत से 5 साल पहले 87 साल के दिनशॉ गांधी ने एक वसीयत बनाई थी, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने मान्य घोषित कर दिया है। इस वसीयत के तहत दिनशॉ गांधी अपनी सारी संपत्ति डॉ वीणा पटेल के नाम कर दी है। वीणा गांधी परिवार की फैमिली डॉक्टर हैं।

नि:संतान थे बुजुर्ग दंपती

वीना करीब 19 साल पहले 2001 में गांधी परिवार की डॉक्टर बनीं। तारदेव के निवासी दिनशॉ गांधी और उनकी होमई निसंतान थे। साल 2006 में होमई की मौत हो गई। दिनशॉ गांधी के तीन बैंक अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट थे। साथ ही राज्यभर में उनकी संपत्ति थी। गांधी की मौत के बाद वसीयत की तामील के लिए डॉक्टर वीणा ने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की। लेकिन गांधी की एक पोती बख्तावर घडियाली ने (दूर की रिश्तेदार) ने कोर्ट में इस वसीयत को चुनौती दी।

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पोती ने वसीयत को दी चुनौती

बख्तावर घडियाली ने वसीयत को चुनौती देते हुए इसको फर्जी करार दिया था। इसके साथ ही बख्तावर ने यह दावा भी किया था कि जिस वक्त यह वसीयत तैयार की गई उस वक्त गांधी बीमार थे। इसके अलावा उन्होंने वसीयत में वीणा पटेल की हैंडराइटिंग और पटेल के हस्ताक्षर पर भी सवाल उठाए। बख्तावर ने दावा किया कि दिनशॉ गांधी का घर पुश्तैनी था और उसे कोई वसीयत में किसी को नहीं दे सकता था।

कोर्ट ने बख्तावर के आरोपों को किया खारिज

वहीं डॉक्टर वीणा पटेल ने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि उन्होंने बुजुर्ग दंपति के निसंतान होने का फायदा उठाया या फिर दंपत्ति के ऊपर संपत्ति उनके नाम करने के लिए कोई दबाव बनाया। वहीं जस्टिस एक मेनन ने बख्तावर घडियाली के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने मामले में फैसला दिया कि वसीयत लिखते समय गांधी मानसिक (Mentaly) रुप से स्वस्थ थे।

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कोर्ट ने डॉक्टर वीणा पटेल के बयान को स्वीकार कर लिया है कि गांधी ने अपनी वसीयत में उनका नाम लिखा है। डॉ. पटेल ने यह भी दावा किया कि गांधी उस वक्त काफी जीवट थे और अक्सर बैंक, पारसी अगियारी, मंदिर और बाजार जाया करते थे।़

अंतिम संस्कार लैंडलॉर्ड ने क्यों किया- बख्तावर

बख्तावर ने यह दावा किया था कि अगर वो डॉ. पटेल को अपनी बेटी समझते थे तो अंतिम संस्कार लैंडलॉर्ड ने क्यों किया। कोर्ट ने इसके जवाब में कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि दंपती डॉक्टर पटेल को उनकी बेटी समझते थे या नहीं। लेकिन ऐसा हो भी सकता है क्योंकि डॉक्टर पटेल दंपत्ति के साथ रुकती थीं और उनके लिए खाना भी भेजती थीं।

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जस्टिस एक मेनन ने कहा कि...

जस्टिस एक मेनन ने कहा कि गांधी ने अंग्रेजी और गुजराती दोनों भाषाओं में अपने हस्ताक्षर किए हैं और अंगूठे का भी निशान लगाया है। जस्टिस मेनन ने यह भी कहा कि वसीयत दो गवाहों, जिमी और जेनोबिया की मौजूदगी में लिखी गई थी।

एक संपत्ति पर बना है विवाद

वहीं गांधी की एक संपत्ति पर अभी भी विवाद बना हुआ है। तारदेव के बाटलीवाला कंपाउंट में एक फ्लैट का कुछ मालिकाना हक जोरास्ट्रियन बिल्डिंग फंड ट्रस्ट के पास है। हाई कोर्ट ने पहले साफ किया था कि इसके मामले के लिए अलग से कार्रवाई होगी।

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