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राज्यपाल ने बताया, क्यों हुई जम्मू-कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती

जम्मू-कश्मीर में हाल में लिए गए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती समेत अन्य फैसलों के बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। इन फैसलों के बाद कश्मीर घाटी में कई तरह की झूठी सूचनाएं फैल रही हैं, जिसका सक्षम अधिकारी खंडन कर रहे हैं।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 3 Aug 2019 11:36 AM GMT

राज्यपाल ने बताया, क्यों हुई जम्मू-कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती
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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में हाल में लिए गए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती समेत अन्य फैसलों के बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। इन फैसलों के बाद कश्मीर घाटी में कई तरह की झूठी सूचनाएं फैल रही हैं, जिसका सक्षम अधिकारी खंडन कर रहे हैं।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पहले 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती, इसके बाद अमरनाथ यात्रा को अचानक रोकने और सैलानियों के जल्द से जल्द घाटी छोड़ने संबंधी सुरक्षा सलाह की घोषणा की गई है। इसके बाद से घाटी में कई तरह के कयास लग रहे हैं।

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प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मलिक पिछले 24 घंटों में 2 बार कश्मीरियों से अपील कर चुके हैं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। शनिवार को राजभवन की तरफ से एक बार फिर स्पष्ट किया गया कि जवानों की तैनाती पूरी तरह सुरक्षा के मकसद से किया गया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव जैसी कोई बात नहीं है।

शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अबदुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की। राज्यपाल ने उमर अबदुल्ला और उनके साथ गए प्रतिनिधिमंडल को बताया कि राज्य को संवैधानिक प्रावधानों में किसी भी बदलाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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उन्होंने यह भरोसा दिया कि अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती विशुद्ध रूप से सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम है। बता दें कि घाटी में हालिया गतिविधियों को कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधानों आर्टिकल 35-A और आर्टिकल 370 को खत्म करने की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजभवन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुआई में प्रतिनिधिमंडल को बताया कि सुरक्षा स्थिति इस तरह से पैदा हुई है जिस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता थी। राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल से कहा, 'अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमलों के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय जानकारी मिली थी। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी बढ़ा दी गई है, जिसका सेना प्रभावी ढंग से जवाब दे रही है।'

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सत्यपाल मलिक की तरफ से बयान में कहा गया है कि सेना के कोर कमांडर और राज्य पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आतंकवादियों के नापाक मंसूबे को कैसे नाकाम किया गया और साथ ही उन्होंने बरामद किए गए हथियार एवं गोला-बारूद भी दिखाए।

राज्यपाल ने कहा है कि संवैधानिक प्रावधानों में किसी तरह के बदलाव के बारे में राज्य को कोई जानकारी नहीं है और इसलिए सैनिकों की तैनाती के इस सुरक्षा मामलों को अन्य सभी प्रकार के मामलों के साथ जोड़ कर बेवजह भय नहीं पैदा किया जाना चाहिए।

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सत्यपाल मलिक ने कहा कि यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह अपने सभी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करें। इसलिए, ऐहतियाती उपाय के तौर पर यत्रियों और पर्यटकों को लौटने के लिए कहा गया है। राज्यपाल ने राज्य के राजनीतिक दलों के नेताओं से कहा है कि वे अपने समर्थकों से शांत रहने और घाटी में 'बढ़ा-चढ़ा कर फैलाई गई अफवाहों' पर विश्वास न करने के लिए कहें।

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