हैदराबाद एनकाउंटर: जानिए कैसे, कहां और कब मारे गए चारों बलात्कारी

महिला डॉक्टर से गैंगरेप और हत्या के सभी चारों आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। हैदराबाद में पीड़िता के आरोपियों का एनकाउंटर नेशनल हाइवे-44 के पास किया गया। पुलिस आरोपियों को एनएच-44 पर क्राइम सीन रिक्रिएट कराने के लिए लेकर गई थी।

नई दिल्ली: महिला डॉक्टर से गैंगरेप और हत्या के सभी चारों आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। हैदराबाद में पीड़िता के आरोपियों का एनकाउंटर नेशनल हाइवे-44 के पास किया गया। पुलिस आरोपियों को एनएच-44 पर क्राइम सीन रिक्रिएट कराने के लिए लेकर गई थी। पुलिस के मुताबिक चारों आरोपियों ने मौके से फरार होने की कोशिश की। पुलिस ने चारों आरोपियों को ढेर कर दिया है।

हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने इन आरोपियों के ढेर होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने उस वक्त भागने की कोशिश की थी, जब इन्हें मौका-ए-वारदात पर क्राइम सीन दोहराने के लिए ले गई थी। कमिश्नर वीसी सज्जनार ने कहा कि यह घटना सुबह 3 बजे से 6 के बीच की है। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर में गैंगरेप और मर्डर के आरोपी मोहम्मद आरिफ, नवीन, शिवा और चेन्नाकेशवुलु मारे गए हैं।

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संयोग यह भी है कि ये सभी आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ठीक उसी जगह मारे गए, जहां 10 दिन पहले महिला डॉक्टर के साथ हैवानिय की गई थी। पुलिस ने चारों आरोपियों शिवा, नवीन, केशवुलू और मोहम्मद आरिफ को पुलिस हिरासत में रखा हुआ था।

पुलिस जांच के लिए चारों को उस फ्लाइओवर के नीचे लेकर गई थी जहां उन्होंने पीड़िता को जलाया था। इन चारों आरोपियों ने गैंगरेप के बाद डॉक्‍टर की हत्या के बाद शव को टोल बूथ से करीब 25 किलोमीटर दूर एक ओवरब्रिज के नीचे शव को फेंका था।

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इसके बाद चारों ने वहां से भागने की कोशिश की पुलिस ने प्रतिक्रिया करते हुए गोलियां चलाईं और मुठभेड़ में चारों को ढेर कर दिया।

शम्शाबाद के डीसीपी प्रकाश रेड्डी ने बताया कि हैदराबाद पुलिस आरोपियों को क्राइम स्पॉट पर लेकर आई थी ताकि सीन रीक्रिएट किया जा सके। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस के हथियार छीनकर फायरिंग की। इस पर पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलीबारी की और सभी चारों आरोपी मारे गए।

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क्या है सीन का रीकंस्ट्रक्शन

पुलिस सभी चारों आरोपियों को लेकर सीन रीकंस्ट्रक्शन के लिए पहुंची थी। पुलिस की ओर से सीन रीकंस्ट्रक्शन की कार्रवाई इसलिए होती है ताकि घटना की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके और मौका-ए-वारदात से हर ऐंगल को जांच परख कर देखा जा सके। पुलिस की ओर से यह जांच अदालती कार्रवाई में भी महत्पवूर्ण होती है और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के लिहाज से भी इसे अहम माना जाता है।