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पाकिस्तान के ये मुस्लिम: जिन्होंने भारत में बनाई ऐसी पहचान, जान रह जाएंगे दंग

सन् 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे के बारे में सभी को ज्ञात है। दोनों देशों के बंटवारे के वक्त कुछ ने हिंदुस्तान को चुना तो कई ऐसे थे जिन्होंने पाकिस्तान जाना उचित समझा।

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ShreyaBy Shreya

Published on 21 Feb 2020 10:40 AM GMT

पाकिस्तान के ये मुस्लिम: जिन्होंने भारत में बनाई ऐसी पहचान, जान रह जाएंगे दंग
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लखनऊ: सन् 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे के बारे में सभी को ज्ञात है। दोनों देशों के बंटवारे के वक्त कुछ ने हिंदुस्तान को चुना तो कई ऐसे थे जिन्होंने पाकिस्तान जाना उचित समझा। आमतौर पर सभी का यह मानना है कि बंटवारे के वक्त बड़ी संख्या में भारत के मुसलमान पाकिस्तान चले गए और पाकिस्तान से बड़ी संख्या में सिख, और हिंदू धर्म के लोग भारत आ गए। ये सदी का सबसे बड़ा विस्थापन रहा, जिसके चलते आज तक कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डेढ़ करोड़ लोगों का हुआ था विस्थापन

अगर विस्थापन की बात की जाए तो मोटे तौर पर करीब डेढ़ करोड़ लोगों का विस्थापन हुआ था। ये सदी की एक बड़ी त्रासदी थी। लेकिन इस विस्थापन के बारे में बहुत कम लोगों को ही ये पता है कि बंटवारे के वक्त हिंदुस्तान से मुसलमान पाकिस्तान ही नहीं गए थे, बल्कि पाकिस्तान के मुसलमान भी भारत आए थे। इनमें से कुछ ऐसे मुसलमान भी हैं, जिन्होंने हिंदुस्तान को चुना और यहां आने के बाद वो काफी फेमस भी हुए।

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दिलीप कुमार के पिता ने हिंदुस्तान को चुना

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर दिलीप कुमार के पिता गुलाम सरवर ने भी भारत को चुना था। उनका परिवार पाकिस्तान के पेशावर से संबंध रखता था। हालांकि जब दोनों देशों के बीच बंटवारा होने वाला था उस वक्त गुलाम सरवर बॉम्बे यानि मुंबई में थे। जब बंटवारे का ऐलान हुआ उनके परिवार का पेशावर से फोन आया। उनके परिवार ने उन्होंने हिंदुस्तान छोड़ तुरंत पाकिस्तान आने की सलाह दी। लेकिन गुलाम सरवर ने भारत रुकने का फैसला किया और अपने परिवार को पाकिस्तान आने से मना कर दिया।

दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी (आत्मकथा) The Substance and the Shadow में इस बात का जिक्र भी किया है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि जब उनके पिता से वापस लौटने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि- कभी नहीं, हम बॉम्बे कभी नहीं छोड़ेंगे। अब हिन्दुस्तान ही हमारा देश है। वहीं साल 1947 तक दिलीप कुमार का नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों में शामिल हो चुका था। साल 1947 में उनकी फिल्म 'ज्वार भाटा' रिलीज हुई।

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शाहरुख खान के पिता भी इस लिस्ट में शामिल

बॉलीवुड के रोमांस किंग शाहरुख खान के पिता ने भी बंटवार के वक्त हिंदुस्तान को चुना था। शाहरुख खान के पिता ताज मोहम्मद खान पेशावर के पठान थे और कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थे। जब बंटवारे का ऐलान हुआ तो उन्होंने पाकिस्तान के बजाए हिंदुस्तान को चुनना मुनासिब समझा। अगस्त 1947 के दूसरे हफ्ते में ताज मोहम्मद अपने परिवार और दोस्तों के साथ पाकिस्तान के पेशावर को छोड़ भारत आ गए।

ताज मोहम्मद खान गांधीजी और फ्रंटियर गांधी के नाम से मशहूर खान अब्दुल गफ्फार खान से काफी प्रभावित थे। वो जवाहर लाल नेहरु को अपना नेता मानते थे। किंग खान भी कई बार कह चुके हैं कि उनके पिता कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। उन्होंने धर्म के आधार पर हुए देश के विभाजन का विरोध किया था। वो पेशावर छोड़ अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गए थे। ताज खान पेशे से एक वकील थे। साल 1981 में कैंसर बीमारी के चलते उनकी मृत्यु हो गई थी।

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बड़ी संख्या में मुस्लिम आए थे हिंदुस्तान

बंटवारे के वक्त ऐसे कई मुस्लिम थे जो पाकिस्तान से बड़ी संख्या में हिंदुस्तान भी आए थे। लेकिन इसके आंकड़ों के बारे में किसी पक्की जानकारी का पता नहीं चलता। वहीं कई लोग ऐसे भी थे, जो बंटवारे के वक्त अपने परिवार से मिलने पाकिस्तान गएस, हालांकि बाद में फिर वापस भी लौट आए। दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे पंजाबी मुस्लिम रहते हैं।

951 की जनगणना के मुताबिक...

अगर मोटे तौर पर आंकडें की बात की जाए तो बंटवारे के वक्त करीब डेढ़ करोड़ आबादी का विस्थापन हुा। 1951 की जनगणना के मुताबिक, भारत से करीब 72 लाख 62 हजार मुसलमान पाकिस्तान चले गए। उसी तरह पाकिस्तान से करीब 72 लाख 49 हजार हिंदू और सिख हिंदुस्तान आ गए थे। लेकिन बंटवारे के वक्त पाकिस्तान से कितने मुसलमान भारत आए, इसका आधिकारिक आंकड़ा नहीं मिलता।

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