भारत की बड़ी जीत: सीमा विवाद पर एक कदम पीछे हटा नेपाल, कही ऐसी बात

भारत के कड़े एतराज के बाद नक्शा विवाद मामले में नेपाल ने अपने पैर एक कदम पीछे खिंच लिए हैं। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिज्ञ जीत के तौर पर देखा जा सकता है। क्योंकि बीते कुछ दिनों से भारत का अपने पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं चल रहे हैं।

नई दिल्ली : भारत के कड़े एतराज के बाद नक्शा विवाद मामले में नेपाल ने अपने पैर एक कदम पीछे खिंच लिए हैं। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिज्ञ जीत के तौर पर देखा जा सकता है। क्योंकि बीते कुछ दिनों से भारत का अपने पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं चल रहे हैं। पाकिस्तान पहले से ही सीमा विवाद को लेकर भारत के खिलाफ बयानबाजी देता आ रहा हैं।

चीन ने भी लद्दाख सीमा विवाद को लेकर भारत के खिलाफ जंग के लिए अपनी सेना को तैयार रहने के लिए बोल दिया है। वहीं नेपाल ने भी कालापनी और लिपुलेख जैसे सीमा विवाद को लेकर भारत के खिलाफ किसी भी हद तक जाने की बात कही थी। लेकिन भारत के कड़े तेवर के बाद नेपाल ने नक्शा विवाद मामले में अपने पैर पीछे खिंच लिए हैं और विवादित नक्शा हटा दिया है।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने भारत को लेकर अपने रुख में नरमी दिखाई है। मंत्री ने कहा है कि भारत एक ऐसा देश है। जिससे हमारा रिश्ता काफी करीबी रहा है।

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क्या है ये पूरा मामला

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले नेपाल ने कालापानी और लिपुलेख को लेकर अपने नया नक्शा लांच किया था। जिसमें इन दोनों क्षेत्रों पर अपना हिस्सा दिखाया था। जबकि यह क्षेत्र भारत के उत्तराखण्ड राज्य के हिस्सा हैं।

जबसे ही दोनों देशों के बीच लगातार रिश्ते खराब हुए हैं। इस बीच नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि हमने हमेशा कहा है कि इस मुद्दे का समाधान बातचीत से होगा। वह कहते हैं कि हम इस मुददे का समाधान बातचीत से चाहते हैं। इसके लिए बिना किसी आवेग और पूर्वागृह की जरुरत होगी।

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कोरोना और लिपुलेख को लेकर नेपाल ने बोला था हमला

कुछ दिनों पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने कोरोना वायरस को लेकर कहा था कि नेपाल में कोरोना भारत की वजह से फैल रहा है। वह कहते हैं कि भारतीय कोविड 19 अन्य देशों की तुलना में ज्यादा खतरनाक है। भारत ने हाल में यहां 80 कि.मी. लम्बी सड़का का उद्घाटन किया था। जिस समय स्वयं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे।

बता दें इससे पहले नेपाल जब काफी आक्रामक हो गया था। जब भारत की तरफ से लिपुरेख सीमा पर सड़क बनाए जाने का नेपाल की तरफ से विरोध किया गया था।

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