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पांच राज्यों के चमगादड़ों में कोरोना वायरस, भारतीय वैज्ञानिकों ने किया खुलासा

कोरोना वायरस की शुरुआत के समय से ही यह माना जा रहा है कि इसकी शुरुआत चमगादड़ों से से हुई। तमाम वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात की पुष्टि भी हुई है कि चमगादड़ों के जरिए ही इसका संक्रमण इंसानों तक पहुंचा।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 15 April 2020 3:31 AM GMT

पांच राज्यों के चमगादड़ों में कोरोना वायरस, भारतीय वैज्ञानिकों ने किया खुलासा
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की शुरुआत के समय से ही यह माना जा रहा है कि इसकी शुरुआत चमगादड़ों से से हुई। तमाम वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात की पुष्टि भी हुई है कि चमगादड़ों के जरिए ही इसका संक्रमण इंसानों तक पहुंचा। अब भारतीय वैज्ञानिकों के अध्ययन में भी चमगादड़ों में इस वायरस की पुष्टि हुई है। भारतीय वैज्ञानिकों ने देश के 10 राज्यों में चमगादड़ों को लेकर एक अध्ययन किया।चमगादड़ों की दो प्रजातियों पर किए गए इस अध्ययन में पांच राज्यों के चमगादड़ों में वायरस की मौजूदगी मिली है।

एनआईवी में किया गया महत्वपूर्ण अध्ययन

यह अध्ययन पुणे की नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) लैब में किया गया है। इस बाबत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का कहना है कि इस लैब में तीन साल से चमगादड़ों पर अध्ययन किया जा रहा था। इस बीच भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद इस वायरस को लेकर भी चमगादड़ों के नमूनों की जांच पड़ताल की गई। इस जांच में एक चौंकाने वाली बात यह निकली कि चमगादड़ों के गले व मलाशय के सैंपल की जांच में कई चमगादड़ वायरस से संक्रमित पाई गईं।

आंत व गुर्दा वायरस से संक्रमित मिले

इस महत्वपूर्ण अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि चमगादड़ों में दो की आंत और गुर्दा भी वायरस से संक्रमित मिले। केरल में कुछ समय पहले निपाह वायरस के भी चमगादड़ों के जरिए फैलने की बात सामने आई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि नए संक्रमण का पता लगाने के लिए उन राज्यों में लगातार सर्विलांस किया जाना जरूरी है जहां चमगादड़ों की संख्या ज्यादा है।

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कोरोना वायरस मिलने की हुई पुष्टि

नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी की निदेशक डॉ प्रिया अब्राहम का कहना है कि हमारे अध्ययन में शामिल चमगादड़ों में से कुछ में कोरोना वायरस मिलने की पुष्टि हुई है। डॉक्टर अब्राहम ने कहा कि इस बात पर विस्तृत अध्ययन किए जाने की जरूरत है कि यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों के शरीर तक कैसे पहुंचा।

एनआईबी से जुड़े एक और वैज्ञानिक डॉ आर बालासुब्रमण्यम का भी कहना है कि चमगादड़ों की टेस्टिंग के बाद कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि केरल के चमगादड़ों को भी इस अध्ययन में शामिल किया गया था। केरल में कुछ समय पहले निपाह वायरस भी चमगादड़ों के जरिए ही फैला था।

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कई राज्यों से लिया गया सैंपल

यह अध्ययन विभिन्न राज्यों के चमगादड़ों पर किया गया। अध्ययन के लिए केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उड़ीसा, गुजरात,तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, चंडीगढ़ और तेलंगाना से चमगादड़ों के 508 नमूने लिए गए। ये सभी नमूने चमगादड़ों की एक ही प्रजाति के थे। चमगादड़ों की दूसरी प्रजाति के नमूने केरल, गुजरात, कर्नाटक, चंडीगढ़, उड़ीसा, पंजाब और तेलंगाना से लिए गए। ये नमूने 78 चमगादड़ों से जुटाए गए।

पुड्डुचेरी के चमगादड़ सर्वाधिक संक्रमित

इस अध्ययन में पुड्डुचेरी के चमगादड़ सबसे ज्यादा संक्रमित मिले। पुड्डुचेरी के 26.9 फीसदी चमगादड़ों के सैंपल संक्रमित मिले। वैज्ञानिकों का कहना है कि चमगादड़ों पर इस अध्ययन के लिए संबंधित राज्यों के प्रशासनिक विभागों से अनुमति ली गई थी। अनुमति मिलने के बाद चमगादड़ों को स्थानीय वन्य संरक्षण कर्मचारियों की मदद से एक जाल के जरिए पकड़ा गया।

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इस तरीके से हुआ अध्ययन

अध्ययन की तकनीक के बारे में खुलासा करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि चमगादड़ों को एनेस्थीसिया देकर बेहोश कर दिया गया था। इनके गले और मलाशय से सैंपल वायरस ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) में लेने के बाद सूखी बर्फ के बॉक्स में उसे रखा गया और फिर पुणे स्थित एनआईवी लैब लाया गया। इसके बाद ही यह अध्ययन पूरा किया गया है।

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