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जम्मू-कश्मीर पर चीन को हल्के में न ले भारत, ये है बड़ी वजह

जम्मू-कश्मीर से 370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद भारत के पड़ोसी देशों की ओर बयान आए हैं। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन ने अहम प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर इन दोनों का नियंत्रण है जिस पर भारत अपना दावा करता है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 8 Aug 2019 1:37 PM GMT

जम्मू-कश्मीर पर चीन को हल्के में न ले भारत, ये है बड़ी वजह
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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से 370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद भारत के पड़ोसी देशों की ओर बयान आए हैं। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन ने अहम प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर इन दोनों का नियंत्रण है जिस पर भारत अपना दावा करता है।

सीमा विवाद की वजह और अन्य तनाव की वजह इन दोनों देशों के साथ भारत में उतार चढ़ाव आता रहता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बयानबाजी को दुनिया के अधिकांश देश उनकी अपनी जनता के बीच की गई बयानबाज़ी के रूप में देख रहे हैं। पाकिस्तान किसी भी तरह की भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है।

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चीन के साथ उसके उसके रिश्ते को केंद्र में रखकर देखा जाए तो पाकिस्तान की ये प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञ का मानना है कि चीन के संरक्षण में रहते हुए पाकिस्तान उसी की भाषा बोलता है। चीन की प्रतिक्रिया के बाद ही पाकिस्तान ने यह रुख अख्तियार किया है।

चीन छद्म रूप से पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है और हमेशा अपनी नपी-तुली प्रतिक्रिया देता है। चीन की प्रतिक्रिया पर गंभीरत से विचार करने की जरूरत है।

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जम्मू-कश्मीर प्रांत के अक्साई चिन के 38,000 वर्ग किलोमीटर और शक्सगाम घाटी के 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके पर चीन का नियंत्रण है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने के बाद चीन की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच पहले से चले आ रहे सीमा विवाद को एक बार फिर उभार दिया है, जिसका प्रभाव चीन और भारत के आपसी संबंधों से परे भी है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, इलाके में तनाव को दूर करने के लिए भारत को जम्मू-कश्मीर में "एकतरफा कार्रवाई" से बचान चाहिए। साथ ही चीन ने कहा कि लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के भारत के फैसले को 'अस्वीकार्य' बताया है।

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ज़ाहिर है, यह अचानक इस तरह का बयान आया तो भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे 'भारत का आंतरिक मामला' बताते हुए कहा कि 'भारत अन्य देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता और उम्मीद करता है कि दूसरे देश भी ऐसा ही करेंगे।'

तो वहीं चीन ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव पर ध्यान केंद्रित करते एक बार फिर ख़ुद को थर्ड अंपायर की तरह पेश करने का मौका खोज रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता छुनइंग ने कहा, संबंधित पक्षों को संयम और एहतियात बरतते हुए विवेकपूर्ण तरीक़े से कार्य करने की आवश्यकता है। हम दोनों पक्षों से संबंधित विवाद पर संवाद और परामर्श के ज़रिए शांतिपूर्वक हल करने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने का आग्रह करते हैं।

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