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महाराष्ट्र: आज से एक पथ पर चलेंगे 6 कदम साथ, लेकिन राह नहीं आसान

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महागठबंधन वाली सरकार आज शपथ ग्रहण के बाद बनकर कार्यभार संभालने वाली है। अब देखना होगा कि महागठबंधन की सरकार को आने वाले चुनौतियों से उसी तरह निबटती है जैसा पिछले कुछ दिनों के दौरान साथ दिखाया? आज नई सरकार बनने जा रही है।

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sumanBy suman

Published on 28 Nov 2019 5:34 AM GMT

महाराष्ट्र: आज से एक पथ पर चलेंगे 6 कदम साथ, लेकिन राह नहीं आसान
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मुंबई: महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महागठबंधन वाली सरकार आज शपथ ग्रहण के बाद बनकर कार्यभार संभालने वाली है। अब देखना होगा कि महागठबंधन की सरकार को आने वाले चुनौतियों से उसी तरह निबटती है जैसा पिछले कुछ दिनों के दौरान साथ दिखाया? आज नई सरकार बनने जा रही है। सरकार के सामने कई चुनौतियां आने वाली है ,किन इसके बावजूद सरकार को जनता के अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा। फिलहार इस सरकार के सामने चुनौतियां कुछ इस तरह की होंगी।

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सरकार बनने के बाद इसे चलाने के लिए तीनों दलों को एकजुट रखना होगा। इससे पहले कर्नाटक में कुमारस्वामी और कांग्रेस ने सरकार तो बना ली, लेकिन चल नहीं पाई। कर्नाटक के अलावा भी कई राज्यों में कांग्रेस के साथ मिलकर बनी सरकार ज्यादा लंबा सफर तय नहीं कर पाई है। सरकार गठन में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस, तीनों दलों के नेताओं ने समान भूमिका निभाई । अब चुनौती होगी कि सरकार के अंदर अहम फैसला कौन लेगा। गठबंधन का कहना है कि उन्होंने हर चीज पहले से साफ कर ली है।

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संजय राउत ने संकेत दिया है कि इस गठबंधन का राष्ट्रीय राजनीति पर असर पड़ेगा। पिछले कुछ सालों में उद्धव की पार्टी ने दूसरे राज्यों में भी चुनाव लड़ना शुरू किया है और उनकी राष्ट्रीय राजनीति में कदम बढ़ाने की इच्छा भी सबके सामने है।

इस गठबंधन में कई दिग्गज नेताओं के अलावा तीन-तीन पूर्व सीएम हैं। कांग्रेस से पृथ्वीराज चौहान और अशोक चह्वान तो एनसीपी से शरद पवार। इन तीनों की राज्य में पकड़ रही है।सरकार में इन नेताओं के अहं को नियंत्रण में रखना भी गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।

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बीजेपी सरकार के लिए मजबूत विपक्ष रहेगी। केंद्र सरकार से रिश्ता बनाए रखने की भी चुनौती है। पिछले 5 सालों के दौरान दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार रहने का लाभ मिल चुका है। तीनों दलों को अपने विधायकों के अलावा निर्दलियों का भी समर्थन हासिल करना है। इस मोर्चे पर जैसी कामयाबी मिलेगी, उसी के अनुसार आगे की राह तैयार होगी। कांग्रेस-एनसीपी सेकुलर राजनीति का प्रतिनिधित्व करती रही हैं, तो शिवसेना की पहचान हिंदुत्व है। तीनों दल बार-बार दावा कर रहे हैं कि वे इन चीजों को दरिकनार कर बड़े मुद्दों को साथ लेकर चलेंगे। वैसे राजनीति में यह इतना आसान नहीं।

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