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मोदी सरकार ने खाते में डाले पैसे, लोगों ने ली राहत की साँस

कोरोना वायरस की आफत से सबसे ज्यादा गरीब वर्ग प्रभावित हुआ है। इन स्थितियों में गरीबों की मदद के लिए मोदी सरकार ने शुरू की गई योजनाओं का पैसा सीधे अकाउंट में भेजना शुरू किया है।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 7 April 2020 9:26 AM GMT

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नई दिल्ली : कोरोना वायरस की आफत से सबसे ज्यादा गरीब वर्ग प्रभावित हुआ है। इन स्थितियों में गरीबों की मदद के लिए मोदी सरकार ने शुरू की गई योजनाओं का पैसा सीधे अकाउंट में भेजना शुरू किया है। इसी के तहत मनरेगा मजदूरों की बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों को 6,834 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। बता दें कि इतना पैसा भेजने का बीड़ा खुद ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उठाया है।

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झारखंड और बिहार में मनरेगा मजदूर

जानकारी के मुताबिक, मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2020-21 के लिए सभी राज्यों की पहली किश्त 15 अप्रैल, 2020 से पहले जारी कर दी जाएगी। सभी राज्यों में मनरेगा मजदूरी एक सी नहीं है।

अभी तक झारखंड और बिहार में मनरेगा मजदूर को सिर्फ 171 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। जबकि हरियाणा में यह सबसे अधिक 284 रुपये प्रति दिन है। उन्हें सामान्य तौर पर साल में अधिकतम सिर्फ 100 दिन ही काम मिलता है।

औसत राष्ट्रीय वृद्धि

ग्रामीण विकास विभाग ने महामारी में मजदूरों के सामने आने वाली समस्या को देखते हुए मजदूरी को 1 अप्रैल से संशोधित कर दिया है। अब इसमें 20 रुपये प्रतिदिन की औसत राष्ट्रीय वृद्धि की गई है।

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इससे हर राज्य के मनरेगा श्रमिक को अब हर कार्य दिवस में 20 रुपये ज्यादा मिलेंगे। केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गई इस योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार देकर उनका पलायन रोकना है। इसमें श्रमिक को उसकी मजदूरी का भुगतान बैंक, डाकघर के बचत खातों के माध्यम से किया जाता है।

इसी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने मनरेगा के 100 साल में 100 दिन रोजगार देने को आगे बढ़ा कर 150 कार्यदिवस की रोजगार गारंटी दे दी है। बताया गया है कि 50 कार्य दिवस के खर्च का वहन राज्य सरकार खुद करेगी।

जबकि शेष 100 दिन का पैसा केंद्र सरकार देगी। केंद्र सरकार गरीबों के लिए हर वो प्रयास कर रही है जिससे उन्हें गम्भीर हालातों में रहने की शक्ति मिल पाए।

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