कोरोना से जंग नहीं हारना चाहते मोदी, मानकों पर परख कर ही मिलेगी छूट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना के खिलाफ जंग को किसी भी कीमत में नहीं हारना चाहते। माना जा रहा है कि लॉकडाउन को लेकर इसी कारण उन्होंने सख्त रवैया अपना रखा है।

Published by Vidushi Mishra Published: April 14, 2020 | 12:09 pm
Modified: April 14, 2020 | 12:14 pm

कोरोना से जंग नहीं हारना चाहते मोदी, मानकों पर परख कर ही मिलेगी छूट

अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना के खिलाफ जंग को किसी भी कीमत में नहीं हारना चाहते। माना जा रहा है कि लॉकडाउन को लेकर इसी कारण उन्होंने सख्त रवैया अपना रखा है। देश में लॉकडाउन की समय सीमा तीन मई तक बढ़ाने का एलान करते हुए उन्होंने अगले एक हफ्ते के दौरान और कड़ाई करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इस दौरान विभिन्न इलाकों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही छूट की सशर्त अनुमति दी जाएगी। 20 अप्रैल तक देश के विभिन्न इलाकों को बारीकी से परखा जाएगा और मानकों पर खरे उतरने वाले क्षेत्रों में ही 20 अप्रैल से जरूरी सेवाओं को अनुमति दी जाएगी।

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सबको साथ लेकर चलने का प्रयास

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने यह भी साबित किया कि वह इस जंग में सबको साथ लेकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना से जंग को लेकर मेरी विभिन्न राज्यों के साथ लगातार चर्चाएं हो रही हैं। मैंने इस मुद्दे पर चिकित्सा विशेषज्ञों और अन्य जानकारों से भी चर्चा की है।

सभी का यह कहना है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाना चाहिए। कई राज्यों ने तो अपने यहां पहले ही लॉकडाउन बढ़ा दिया है। सारे सुझावों का मूल्यांकन करने के बाद ही हमने फैसला किया है कि देश में 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाना होगा।

देशवासियों से मांगा समर्थन

पीएम ने इस जंग को जीतने के लिए देशवासियों से समर्थन मांगा। कहा कि इस दौरान देशवासी घरों में ही रहें और अनुशासन का पालन करें। उन्होंने सभी से अपील की कि कोरोना को नए क्षेत्रों में न फैलने दें। नया मरीज हर किसी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

सशर्त ही देंगे अनुमति

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान अगले एक हफ्ते में और कठोर कदम उठाए जाएंगे। हर इलाके को 20 अप्रैल तक तमाम मानकों पर काफी बारीकी से परखा जाएगा। इन मानकों पर खरा उतरने वाले स्थानों और हॉटस्पॉट न बनने देने वाले स्थानों पर 20 अप्रैल से जरूरी सेवाओं को अनुमति दे दी जाएगी मगर हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि अनुमति सशर्त होगी। बाहर निकलने के नियम काफी सख्त होंगे। कोरोना का कोई भी मामला आते ही अनुमति वापस ले ली जाएगी।

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गरीबों और रोज खाने-कमाने वालों की चिंता

पीएम मोदी ने कहा कि इस बाबत कल सरकार की ओर से विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें गरीबों और रोज कमाने-खाने वालों की चिंता है इसलिए हम प्राथमिकता के आधार पर उनकी दिक्कतें दूर करना चाहते हैं। हम इस दिशा में हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और उनके हितों का ध्यान रखा जा रहा है। इसीलिए हम 20 अप्रैल से सीमित छूट का प्रावधान करने जा रहे हैं।

किसानों को नहीं भूले मोदी

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी किसानों की चर्चा करना भी नहीं भूले। किसानों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रबी की कटाई का समय है और किसानों की दिक्कतें दूर करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को तनिक भी नहीं घबराना चाहिए क्योंकि यहां पर जरूरी दवाओं और राशन का पर्याप्त भंडार है। इसलिए किसी को भी किसी प्रकार के पैनिक में नहीं आना चाहिए।

देशवासियों की तपस्या से जीत

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासियों के समर्थन के बल पर हमने कोरोना के खिलाफ कामयाबी से लड़ाई लड़ी है। यह देशवासियों की तपस्या का ही परिणाम है कि हम कोरोना से होने वाले भारी नुकसान को टाल सके हैं। मुझे पता है कि इसके लिए हमारे देश के लोगों ने काफी दिक्कतें खेली हैं। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अनुशासित सिपाही की तरह घरों में रहकर समय काटा है। बाबा साहेब आंबेडकर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामूहिक शक्ति का परिचय ही बाबा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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एकजुटता से रोका है संक्रमण

पीएम ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया कोरोना का कहर झेल रही है। भारत ने एकजुटता और सामूहिक शक्ति के बल पर इसके संक्रमण को रोका है। जब हमारे देश में कोरोना के एक भी केस का पता नहीं लगा था तभी हमने एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी।

जब संख्या 100 भी नहीं पहुंची थी तभी हम विदेश से आने वालों के लिए आइसोलेशन अनिवार्य बना चुके थे। जब हमारे देश में 550 केस हुए तो हमने 21 दिनों के लॉकडाउन का फैसला कर लिया।

ताकतवर देशों से अच्छी स्थिति में भारत

मोदी ने कहा कि आज दुनिया के तमाम ताकतवर देश की कोरोना के कहर से परेशान हैं। दुनिया के तमाम विकसित और साधन संपन्न देशों की अपेक्षा भारत आज अच्छी स्थिति में है। इन देशों में शुरुआत में भारत के बराबर ही केस थे, लेकिन वहां स्थिति काफी बिगड़ चुकी है और आज वहां भारत से 25 से 30 गुना ज्यादा मरीज हैं और हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।

तेजी से फैसले का फायदा

पीएम ने कहा कि यदि हमने तेजी से फैसले ना किए होते तो आज हमारे यहां भी स्थिति काफी खराब होती। हमने दुनिया को दिखा दिया है कि हमने जो रास्ता चुना वही सही रास्ता था। लॉकडाउन से कोरोना का संक्रमण रोकने में काफी मदद मिली है।

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जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं

अपने संबोधन के दौरान पीएम ने माना कि लॉकडाउन के कारण देश के आर्थिक क्षेत्र को भारी चपत लगी है, लेकिन उन्होंने इसके साथ ही देशवासियों को यह भी याद दिलाया कि जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं होती। हमारे देशवासियों की जिंदगी के सामने यह कीमत छोटी ही है। आज दुनिया भर में कोरोना के खिलाफ जंग में भारत की कामयाबी की चर्चा हो रही है।

राज्य सरकारों को भी दिया क्रेडिट

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी राज्य सरकारों को क्रेडिट देना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि इस जंग में कामयाबी के पीछे राज्य सरकारों का भी बड़ा योगदान है। राज्य सरकारों ने भी तेजी से एहतियाती कदम उठाकर कोरोना के संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मामले में केंद्र सरकार को राज्य सरकारों का पूरा सहयोग मिला है और राज्य सरकारों ने कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए काफी अच्छा काम किया है।

कोरोना योद्धाओं को करें सलाम

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने सप्तपदी की तरह देशवासियों को 7 बातों का ध्यान भी दिलाया। इन 7 बातों में कोरोना से जंग के साथ ही गरीबों के प्रति मोदी की चिंता भी दिखी। उन्होंने विभिन्न व्यवसायों और उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों और श्रमिकों के प्रति संवेदना रखने पर जोर दिया और उनकी दिक्कतें को दूर करने में मदद मांगी।

कोरोना से जंग लड़ने वाले योद्धाओं का जिक्र करना भी नहीं भूले और कहा कि हमारे देश में जो भी लोग कोरोना को रोकने की कोशिश में जुटे हैं ऐसे लोगों को आप सलाम करें और उनका गौरव बढ़ाएं।

जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को अनुमति

इस बीच गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि राज्यों को पत्र लिखकर कहा गया है कि ट्रकों और मालवाहक वाहनों को अंतर राज्य और राज्यों के भीतर आवाजाही करने से ना रोका जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को न रोकने का आदेश दिया है। खाली ट्रकों के आने जाने की भी अनुमति है। रेलवे, एयरपोर्ट और बंदरगाहों से भी कहा गया है कि वे अपने जरूरी कर्मचारियों को पास जारी करें।

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कई राज्यों में पहले ही एलान

पीएम मोदी ने शनिवार को देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की थी। इस बातचीत में अधिकांश मुख्यमंत्रियों का कहना था कि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।

इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पहले ही उड़ीसा और पंजाब जैसे राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ा दी थी। बाद में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, पुडुचेरी आदि तमाम राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन की समय सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ाने का एलान पहले ही कर दिया था।

मंत्री संभाल चुके हैं कामकाज

लॉकडाउन के 20 दिन बाद केंद्रीय मंत्रियों और मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को अपने मंत्रालय पहुंचकर कामकाज शुरू कर दिया था। इससे पहले तमाम मंत्री और अफसर अपने घरों से ही काम कर रहे थे।

पीएमओ की ओर से आदेश जारी होते ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रकाश जावड़ेकर, प्रहलाद पटेल, मुख्तार अब्बास नकवी, किरन रिजिजू आदि तमाम मंत्री अपने कार्यालय पहुंचे और लॉकडाउन के बाद पैदा होने वाले हालात की समीक्षा के बाद रणनीति बनाई। मंत्रालय के संयुक्त सचिव और उससे ऊपर स्तर के सभी अधिकारी भी आगे की रणनीति बनाने में जुटे रहे। हालांकि अभी तक विभागों में एक तिहाई कर्मचारियों को ही आने की अनुमति दी गई है।

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