नवरात्र: पूरी करती होती है हर मनोकामना, मंदिर में लगा रहता है भक्तों का तांता

अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मां चंडी का यह मंदिर पुराणो में वर्णित है और जिस नील पर्वत पर स्थित है यह मंदिर, उसके कण कण में हैं मां का वास। मां चंडी देवी के इस मंदिर की महिमा देवी भागवत में भी कही गई है। नवरात्रो के दौरान इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।

उत्तराखंड: नवरात्र शुरू हो चुके है आज पहले नवरात्र के दिन हरिद्वार के शक्तिपीठ सहित मां मनसा देवी व् चंडी देवी मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, आप को बता दें की हरिद्वार में मां चंडी देवी का मंदिर पौराणिक है । महिषासुर राक्षस का वध कर मां ने यहां दर्शन दिए थे, मां चंङी देवी, यानि असुरों का संहार करने वाली मां चंडी देवी-देवताओं के प्राणों की रक्षा करने वाली मां चंडी देवी और भगवान राम के प्राण बचाने वाली भी मां चंडी देवी ।

ये भी देखें : बैंक में नहीं सुरक्षित आपका पैसा! अंजान हैं आप भी RBI के इन नियमों से

मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है

अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मां चंडी का यह मंदिर पुराणो में वर्णित है और जिस नील पर्वत पर स्थित है यह मंदिर, उसके कण कण में हैं मां का वास। मां चंडी देवी के इस मंदिर की महिमा देवी भागवत में भी कही गई है। नवरात्रो के दौरान इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। मनोकामना सिद्ध मन्दिर में माता का रूप देखते ही बनता है आइये आप को दिखाते है

महिमा चंडी देवी की-

हरिद्वार के पौराणिक मंदिरों में शुमार है मां चंडी का ये मंदिर, भगवती का यह मंदिर सिद्ध पीठ है और माना जाता है कि मां भगवती यहां पर अपने रौद्र रूप यानि चंडी रूप में साक्षात विराजती है। पुराणो के अनुसार जब देव लोक में असुरों का अत्याचार बढने लगा तो देवताओं ने मां भगवती की स्तुति की तो मां चंडी रूप एक खंभ को फाङ कर यहां  स्वर्ग से सीधे प्रकट हुई।

मान्यता है की नवरात्र के दौरान नौ दिन यहीं पर विराजती हैं।यही कारण है की नवरात्रो के दौरान इस मंदिर में देश दुनिया से श्रद्धालु भारी संख्या में यहां मन्नत मांगने आते हैं।

ये भी देखें : बाप रे बाप: इस शख्स की हैं 60 पत्नियां, पूरा करती हैं हर शौक

करीब सवा दो किलोमीटर का रास्ता मंदिर तक जाता है

मां चंडी देवी इस नील पर्वत पर विराजती हैं। हरिद्वार से गंगा नदी का एक किलोमीटर से लंबा पुल पार करके श्रद्धालु पहुंचते हैं मंदिर जाने के लिए बने हुए रास्ते पर। मंदिर जाने के लिए दो रास्ते हैं। पैदल करीब सवा दो किलोमीटर का रास्ता मंदिर तक जाने के लिए तय करना पङता हैं। इसके अलावा यदि यात्रा को रोंमांचक बनाना हो तो इसके लिए मंदिर तक पहुंचने के लिए यहाँ पर लगा हुआ हैं रोप वे।

जिसमें बैठ कर मंदिर जाते हुए दूर दूर तक पहाङों और घाटियों के साथ ही हरिद्वार शहर के रोंमाचक नजारों का लुफ्त आपकी यात्रा के आनन्द को कई गुना बढा देता हैं। इसके बाद मंदिर में पहुंच कर ऐसा अहसास होने लगता हैं कि कोई आलौलिक ताकत आपको अपनी ओर खींच रही हो।

ये भी देखें : नवरात्रि: माता के भक्त हैं पीएम मोदी, ऐसे रखते हैं पूरे नौ दिन उपवास

मंदिर में ठीक सामने मां का मंगल रूप है

ट्रस्ट द्वारा यहां शुद्ध RO पानी की व्यवस्था की गयी है ,दिव्यांगों को मंदिर तक लाने लेजाने के लिए व्हीलचेयर और डोली की व्यवस्था भी की गयी है, मंदिर में मां चंडी देवी की दो प्रतिमांए हैं । मंदिर में ठीक सामने मां का मंगल रूप हैं जबकि बायें और कोने में एक खंबें में मां का रौद्र रूप हैं जो कि मां का असली रूप हैं। पोराणिक महत्त्व रखने वाले इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मानते हैं की यहाँ पर हर मनोकामना पूर्ण होती है।

श्रद्धालु रविकांत शर्मा ने बताया की मां चंडी देवी के मंदिर में साल में दो बार नवरात्र के दौरान विशेष पूजा और अनुष्ठान किये जाते हैं। इसके पीछे भी मान्यता हैं कि इन दिनों संसार की सभी आदि शक्तियां मां के आवहान पर यहाँ पर इकठ्ठा होती हैं। सच्ची कामना के साथ यहाँ आने वाले भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है यही से भगवती ने दैत्यों का संहार किया था।  साथ ही हरिद्वार में मायादेवी शक्तिपीठ की विशेष पूजा की जाती है हमने भी आज नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापित कर अम्बे को विराजमान किया है

ये भी देखें : महिला धंसी मचा हड़कंप: ये खौफनाक मंजर देख हर कोई दंग रह गया

माँ अम्बे अनन्य रूप हैं और इन्ही रूपो में मां करती हैं अपनों भक्तों पर कृपा, मां चंडी देवी को तन्त्र मंत्र की सिद्धिदात्री भी माना जाता हैं, माना जाता है कि एक बार भगवान् शंकर ने भी मंगलवार के दिन मां चंङी की उपासना की थी ताकि मां त्रिपुर नाम के एक दैत्य का वध कर सके, सभी देवतागण भी मां की पूजा करते हैं, मां के चरणों में जो भी आता हैं, सच्चे मन से मां की आराधना करता है मां उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं !