वैक्सीन कराएगी इंतजार: लग जाएगा 4 साल का लंबा समय, पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट

वैक्सीन की रेस में सबसे आगे ऑक्सफ़ोर्ड-आस्ट्रा ज़ेनेका है जिसका तीसरे चरण का ट्रायल शुरू होने के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

Corona Vaccine

कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दुनिया में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप थमता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में हर किसी की नजर जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन आने पर पर टिकी हुई है। दुनिया की टॉप कम्पनियां वैक्सीन के काम में जुटी हुईं हैं और एडवांस स्टेज में ट्रायल भी चल रहे हैं। वैक्सीन की रेस में सबसे आगे ऑक्सफ़ोर्ड-आस्ट्रा ज़ेनेका है जिसका तीसरे चरण का ट्रायल शुरू होने के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। भारत में ऑक्सफ़ोर्ड-आस्ट्रा ज़ेनेका की पार्टनर कम्पनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया पर भारत तथा कुछ अन्य देशों के लिए वैक्सीन निर्माण और डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी है। अब सीरम इंस्टिट्यूट ने कहा है कि वैक्सीन लांच होने के बाद भी सबको तुरंत नहीं मिल पायेगी। सबको वैक्सीन मिल पाने में 2024 तक का समय लग जाएगा।

दिया झटका

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि साल 2024 के अंत से पहले सभी के लिए कोरोना वायरस की पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं होगी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पुनावाला ने कहा है कि 2024 के अंत से पहले सभी को कोरोना वैक्सीन मिलना संभव नहीं है।

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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

इसका प्रमुख कारण है कि दवा कंपनियों ने उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी नहीं की है। ऐसे में दुनिया की पूरी आबादी को कम समय में वैक्सीन नहीं पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस धरती पर सभी को वैक्सीन मिलने में चार-पांच साल का समय लगेगा।

15 अरब खुराक की जरूरत

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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

इससे पहले पूनावाला ने कहा था कि अगर कोरोना वायरस वैक्सीन की हर इंसान को खसरा और रोटावायरस की तरह दो खुराक दी जाती है तो दुनिया के सभी लोगों तक पर्याप्त खुराक पहुंचाने के लिए 15 अरब खुराक की जरूरत होगी। सीरम इंस्टीट्यूट ने दुनिया की पांच अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों के साथ करार किया है।

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इनमें एस्ट्राजेनेका और नोवावैक्स भी शामिल हैं। सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन तैयार करने में जुटा है और उसकी एक अरब खुराक तैयार की जानी हैं। पूनावाला ने दावा किया कि तैयार खुराकों में से 50 फीसदी भारत के लिए होंगी। वह रूस के गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ ‘स्पूतनिक वी’ का उत्पादन करने के लिए भी करार कर सकते हैं।

नेताओं के दावों पर संदेह

कोरोना वैक्सीन के निर्माण में सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ का बयान बड़ा महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यह कंपनी दुनिया के कई देशों के लिए वैक्सीन बनाने और वितरण में लगी है।

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ऐसे में उनके बयान ने कई राजनेताओं के अगले महीने तक वैक्सीन लाने के दावों पर भी संदेह खड़ा कर दिया है। इस बीच चिंता यह भी है कि यूरोप और अमेरिका द्वारा पहले ही बड़े ऑर्डर दिए जाने के कारण विकाशसील देशों को सबसे आखिरी में वैक्सीन मिलेगी।

आशावादी बनी रहना चाहती है दुनिया

Punavala
कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

पूनावाला ने कहा कि प्रतिबद्धता ने अन्य वैक्सीन निर्माताओं की क्षमताओं को मात दे दी है। उन्हें पता है कि दुनिया इस पर आशावादी रहना चाहती है, लेकिन उन्हें किसी के अभी तक इस स्तर के करीब आने की जानकारी नहीं मिली है। एस्ट्राजेनेका से डील के तहत सीरम इंस्टीट्यूट 68 देशों के लिए और नोवावैक्स के साथ हुई डील के तहत वह 92 देशों के लिए वैक्सीन के उत्पादान और वितरण का कार्य कर रही है।

शुरू हो चुका है एस्ट्राजेनेका का ट्रायल

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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

पूनावाल साइरस पूनावाला के बेटे हैं जो भारत के सातवें सबसे बड़े अमीर हैं। उन्होंने ने कहा कि पिछले हफ्ते ट्रायल के दौरान एक कैंडिडेट के बीमार होने के बाद एस्ट्राजेनेका ने ट्रायल रोक दिया था, लेकिन अब यह ट्रायल दोबारा शुरू हो गया है। पूनावाला ने अप्रैल में कोरोना वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए 60 करोड़ ग्लास शीशियों और अन्य विवरणों को तैयार करने का ऑर्डर दिया था।

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हालांकि, उन्होंने भारत में वैक्सीन के वितरण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वैक्सीन को सुरक्षित तरीके से 140 करोड़ लोगों तक पहुंचाने में कोल्ड चेन की आवश्यकता होगी। यह एक बड़ा ही मुश्किल काम है।

चीन में तो नवंबर तक आ सकती है वैक्सीन

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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

चीन में कोरोना की वैक्सीन पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन में नवंबर तक आम लोगों के लिए कोरोना वायरस की वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है। चीन के सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की प्रमुख ने यह बात कही है। फिलहाल चीन की चार संभावित वैक्सीन इंसानी ट्रायल के अंतिम चरण में हैं और अगले कुछ महीनों में इन्हें बाजार में उतारने की मंजूरी मिल सकती है।

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इनमें से तीन वैक्सीन ऐसी हैं, जिन्हें जुलाई से आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। एक सरकारी टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में चीन के सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल की प्रमुख गुइझेन वु ने कहा कि तीसरे चरण के ट्रायल सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और ये नवंबर या दिसंबर तक आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं। वु ने बताया कि उन्होंने भी अप्रैल में एक वैक्सीन की खुराक ली थी और इसके बाद उनमें किसी तरह के असामान्य लक्षण नहीं दिखे। वु ने यह नहीं बताया कि उन्होंने कौन सी वैक्सीन ली थी।

ये कंपनियां तैयार कर रहीं वैक्सीन

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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)

चीन की सरकारी फार्मा कंपनी चाइना नेशनल फार्मास्यूटिकल ग्रुप (सिनोफार्मा) और अमेरिका में लिस्टेड कंपनी सिनोवैक बायोटेक मिलकर आपातकालीन इस्तेमाल कार्यक्रम के तहत तीन संभावित वैक्सीन विकसित करने के काम में जुटी हैं। इनके अलावा कैनसिनो बायोलॉजिक्स चौथी संभावित वैक्सीन पर काम कर रही है। इस वैक्सीन को जून में चीनी सैनिकों पर इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इन सैनिकों को प्रयोग के तौर पर इस वैक्सीन की खुराक दी जा रही है।

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सिनोफार्म ने जुलाई में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर कहा था कि तीसरे चरण के ट्रायल समाप्त होने के बाद इस साल के अंत तक उसकी वैक्सीन लोगों के लिए उपलब्ध होगी। गौरतलब है कि दुनियाभर में 100 से ज्यादा संभावित वैक्सीन्स पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ ट्रायल के अंतिम चरण में हैं। ट्रायल में कामयाब रहने पर अगले कुछ महीनों में ये दुनिया के लिए उपलब्ध होगी।

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