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निर्भया के दोषियों को हुई फांसी! पुलिस ने डमी बना किया ट्रायल

निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की फांसी की तारीख नजदीक आ रही है, इन दुष्कर्मियों को अदालत के आदेशानुसार 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी।

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ShreyaBy Shreya

Published on 13 Jan 2020 5:40 AM GMT

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नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की फांसी की तारीख नजदीक आ रही है, इन दुष्कर्मियों को अदालत के आदेशानुसार 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी। लेकिन चारों को फांसी पर लटकाए जाने से पहले रविवार को इसका ट्रायल किया गया। चारों दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाए जाने के लिए जेल नंबर-3 में बनाए गए चार तख्तों पर यह ट्रायल किया गया। जानकारी के अनुसार यह ट्रायल पूरी तरह से सक्सेसफुल रहा। चारों रस्सियों पर बटर लगाकर रस्सियों को सुरक्षित रख दिया गया है। ताकि इन्हीं रस्सियों का फांसी के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

कड़े सुरक्षा प्रबंधों के साथ रस्सियों को लॉकर में रखा गया

जानकारी के मुताबिक, रस्सियों को कड़े सुरक्षा प्रबंधों के साथ लॉकर में रख दिया गया है। ताकि इन रस्सियों को कोई नुकसान न पहुंचा पाए या फिर चूहा इन्हें न कुतर जाए। जेल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ट्रायल में सैंड बैग का इस्तेमाल किया गया था। दो दोषियों के डमी तैयार किए गए थे और दो दोषियों के लिए सैंड बैग पर ट्रायल किया गया। चारों कैदियों के वजन के बराबर रस्सियों पर डमी लटकाया गया। ताकि ये पता चल पाए कि रस्सियां इतने वजन को सहन कर पाता है या नहीं। या चारों तख्तों में तो कोई तकनीकी समस्या नहीं आ रही है।

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तिहाड़ जेल प्रशासन ने की दो जल्लादों की मांग

सूत्रों ने बताया कि रविवार की सुबह यह ट्रायल उसी वक्त किया गया, जिस वक्त का निचली अदालत ने दोषियों को फांसी देने का डेथ वारंट जारी किया है। साथ ही इस ट्रायल में ये भी देखा गया कि चारों को फांसी देने में कितना समय लगता है। क्योंकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश जेल विभाग से दो जल्लादों की मांग की है।

लेकिन कहा जा रहा है कि तिहाड़ जेल प्रशासन को एक ही जल्लाद मिल पाएगा। क्योंकि दूसरे जल्लाद के बीमार और बूढ़े होने की बात कही जा रही है। इस ट्रायल में यह भी देखा गया कि 22 जनवरी की सुबह 7 बजे जब दोषियों को फांसी दी जाएगी तो चारों को फांसी देने से लेकर इन्हें फांसी कोठी से बाहर निकालने तक में कितना वक्त लगेगा।

ट्रायल से संतुष्ट हुए आला अधिकारी

इस ट्रायल के बाद जेल के आला अधिकारी संतुष्ट नजर आए। हालांकि टाइमिंग को सेट करने की बात कही जा रही है, जिससे फांसी में लगने वाले समय को थोड़ा और कम किया जा सके।

कैदियों के लिए नए सेल होंगे तैयार

निर्भया गैंगरेप के दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं और वो सुरंग खोदकर न भागने पाए, इसके लिए नए सेल तैयार किए जा रहे हैं। इस सेल को इन बातों का ध्यान रखते हुए तैयार किया जाएगा कि कहीं ये दोषी सुरंग न खोद लें या समय से पहले खुदकुशी न कर ले या फिर इन कोई अन्य कैदी व जेल स्टाफ हमला न कर दें। इन बातों का ध्यान रखते हुए जेल नंबर-3 में चार नए सेल तैयार किए जा रहे हैं।

आतंकवादी अफजल वाली सेल में होगा एक दोषी

बताया जा रहा है कि ये नए सेल फांसी के तख्ते के करीब उसी हाई सिक्यॉरिटी वॉर्ड में हैं, जहां पर कभी संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल गुरु को रखा गया था। आतंकवादी अफजल वाली सेल में भी चारों में से एक दोषी को रखा जा सकता है। इस हफ्ते चारों को जेल नंबर-3 में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

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छुट्टी के बाद भी अधिकारियों ने तैयारियों का लिया जायजा

सूत्रों के मुताबिक, रविवार को अवकाश का दिन होने के बाद भी जेल के तमाम आला अधिकारियों ने सभी तरह की तैयारियों का जायजा लेने के लिए फांसी के तख्ते वाली जेल नंबर-3 का दौरा किया। आला अधिकारियों ने चारों सेल का भी जायजा लिया। यहां पर फर्श की मरम्मत कराकर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक परिवार से आखिरी मुलाकात होनी अभी बाकी है।

क्यूरेटिव याचिका पर 14 जनवरी को सुनवाई करेगा कोर्ट

वहीं आपको ये भी बता दें कि डेथ वारंट जारी होने के बाद दो दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी, जिसपर कोर्ट सजा से पहले 14 जनवरी को सुनवाई करेगा। पटियाला हाउस कोर्ट ने चार दोषियों के खिलाफ फांसी की तारीख का ऐलान कर दिया है।

जिसके बाद अब चारों दोषियों में से दो ने शीर्ष अदालत में क्यूरेटिव याचिका दायर की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट दोषी विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव याचिका पर 14 जनवरी को सुनवाई करेगी। मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन, आर बनुमथी और अशोक भूषण की बेंच सुनवाई करेगी।

क्या है क्यूरेटिव याचिका

क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका) पुनर्विचार याचिका से थोड़ा अलग होता है। इसमें फैसले की जगह पूरे केस में उन मुद्दों या विषयों को चिन्हित किया जाता है जिसमें उन्हें लगता है कि इन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। दोषियों को सजा के 14 दिन के अंदर क्यूरेटिव याचिका दायर करने का अधिकार था।

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