एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद ही हुई थी राजीव गांधी की हत्या

राजीव गांधी की हत्या में उनकी सुरक्षा व्यवस्था बताई जाती है। विवाद इस पर है कि जिस समय राजीव गांधी की हत्या हुई, उस वक्त उनकी सुरक्षा की व्यवस्था क्या थी?

नई दिल्ली: 1989 का समय था राजीव गांधी का एसपीजी सुरक्षा हटाई गई थी और 1991 में उनकी हत्या हो गई। उस समय भी यही कहा गया था कि नियमों के मुताबिक सुरक्षा हटाई गई है। तब बीजेपी के समर्थन से वीपी सिंह की सरकार थी। आज भी फिर एक बार केंद्र में बीजेपी की सरकार है और गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला लिया गया है। ऐसे में सवाल खड़ा होना तो लाजमी है।

हालांकि एसपीजी सुरक्षा के बदले गांधी परिवार को जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के इस कदम पर विवाद भी छिड़ गया है।

प्रियंका गांधी को खाली करना पड़ेगा सरकारी बंगला

कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार ने दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवार के सदस्यों की जान से समझौता करते हुए बदले की राजनीति के तहत यह कदम उठाया है।

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सुरक्षा कारणों से प्रियंका गांधी और परिवार को मिला लोधी इस्टेट का सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा। SPG होने के कारण ये सरकारी बंगला प्रियंका मिला था।

राहुल गांधी ने किया टवीट


गौरतलब है कि 1989 में वीपी सिंह की सरकार ने राजीव गांधी से एसपीजी सुरक्षा ले ली गई थी जिसके कुछ समय बाद लिट्टे से जुड़े आतंकी ने श्रीपेरंबदुर में उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद तत्कालीन सरकार की बेहद किरकिरी भी हुई थी और आगे एसपीजी कानून में संशोधन भी हुए।

वहीं मोदी सरकार के मौजूदा फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को एसपीजी सिक्यॉरिटी मिली हुई थी, लेकिन उसे हटा दिया गया। जिसके बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

विवाद है इस पर

राजीव गांधी की हत्या में उनकी सुरक्षा व्यवस्था बताई जाती है। विवाद इस पर है कि जिस समय राजीव गांधी की हत्या हुई, उस वक्त उनकी सुरक्षा की व्यवस्था क्या थी?

जब राजीव से एसपीजी की सुरक्षा हटाई गई

1989 में जो चुनाव हुए, उसमें कांग्रेस की करारी हार हुई। राजीव गांधी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। 2 दिसंबर 1989 को राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद छोड़ा, वीपी सिंह देश के नए पीएम बने। वीपी सिंह की सरकार ने अगले तीन महीने तक राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा बहाल रखी। जबकि उस समय स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी का कानून इसके खिलाफ था। इसके बाद ये सुरक्षा उनके पास से हटा ली गई। जिसके कारण उनकी सुरक्षा की परतें कमजोर पड़ गईं थीं। हालांकि यह तथ्य भी सामने आए कि जिस समय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को एसपीजी सुरक्षा दी गई, तो वो इसे बार बार सार्वजनिक स्थानों पर तोड़ देते थे।

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एसपीजी का गठन 1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किया गया था। 1988 में इससे संबंधित कानून संसद ने पास किया। उक्त कानून में पूर्व प्रधानमंत्रियों को इस सुरक्षा का पात्र नहीं माना गया था। वीपी सिंह सरकार ने 1989 में इसी आधार पर राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी। जिसके बाद 21 मई 1991 को राजीव गांधी की श्रीपेंरबदूर में हत्या हो गई थी।

वाजपेयी सरकार ने एसपीजी सुरक्षा का समीक्षा किया था

इस घटना के बाद ही एसपीजी कानून में संशोधन किया गया। संशोधित कानून में प्रावधान था कि पूर्व पीएम और उनके परिवार के सदस्यों को प्रधानमंत्री पद से हटने के 10 साल बाद तक एसपीजी कवर मिलेगा। वाजपेयी सरकार ने एसपीजी सुरक्षा का समीक्षा किया था। तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल की एसपीजी सुरक्षा हटा ली गई थी। 2003 में इस कानून में दोबारा संशोधन किया गया, ये अब तक लागू है। इसके अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री को पद छोड़ने के एक साल बाद तक ही एसपीजी सुरक्षा कवर मिलेगा। ऐसे में गांधी परिवार से एसपीजी की सुरक्षा वापस लेने के फैसले को विरोध की दृष्टि से देखना क्या सही है या फिर गलत ये तो स्पष्ट हो गया।

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