आरक्षण बम: चुनाव से पहले भागवत ने छोड़ा अपना ये हथियार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण को लेकर फिर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जो भी आरक्षण के पक्ष और विपक्ष में हैं, उनके बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए।

आरक्षण बम: चुनाव से पहले भागवत ने छोड़ा अपना ये हथियार

आरक्षण बम: चुनाव से पहले भागवत ने छोड़ा अपना ये हथियार

नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण को लेकर फिर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जो भी आरक्षण के पक्ष और विपक्ष में हैं, उनके बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि उन्होंने पहले भी आरक्षण पर बात की थी लेकिन इससे काफी हंगामा मचा और पूरी चर्चा वास्तविक मुद्दे से भटक गई।

2015 में भी उठाया था आरक्षण का मुद्दा

आपकों बता दें, कि मोहन भागवत ने 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी आरक्षण के मुद्दे को उठाया था। जिसे बाद में विपक्ष ने उछाला और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। अब तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख ने आरक्षण पर फिर बयान दिया है।

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मोहन भागवत ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं, उन्हें सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस पर विमर्श करना चाहिए। भागवत ने कहा कि उन्होंने आरक्षण पर पहले भी बात की थी लेकिन तब इस पर काफी बवाल मचा था और पूरा विमर्श असली मुद्दे से भटक गया था।

मोहन भागवत ने कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं, उन्हें इसका विरोध करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए। वहीं जो इसके खिलाफ हैं उन्हें भी वैसा ही करना चाहिए।

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मोहन भागवत ने एक बार फिर आरक्षण की समीक्षा की बात ऐसी समय की है जब हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए बीजेपी इन तीनों राज्यों में काफी बेहतर स्थिति में नजर आ रही है।

विपक्षी हथियार

वहीं, विपक्षी दल हताश और निराश होने के साथ-साथ बिखरे हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में संघ प्रमुख का आरक्षण पर दिए गए बयान को विपक्ष एक बड़े हथियार को तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।

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आपको बता दें, कि महाराष्ट्र में मराठा और हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर कई बार आंदोलन हो चुके हैं। महाराष्ट्र और झारखंड में ओबीसी, दलित और आदिवासियों की बड़ी भागेदारी है तो हरियाणा में ओबीसी और दलितों की अच्छी खासी संख्या है। बिहार की तरह अगर विपक्ष दल भागवत के बयान को चुनावी मुद्दा बनाते हैं तो बीजेपी का बना बनाया सियासी खेल बिगड़ सकता है।

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, भागवत ‘ज्ञान उत्सव’ के समापन सत्र में बोल रहे थे। ये कार्यक्रम इग्नू में आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने कहा, आरएसएस, बीजेपी और बीजेपी के नेतृत्व में चल रही सरकार, तीनों अलग-अलग इकाइयां है और किसी को भी एक-दूसरे के काम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

भागवत ने बीजेपी के लिए कहा ये…

इसके साथ ही भागवत ने कहा, बीजेपी, आरएसएस की हर बात से सहमत हो, ये जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, बीजेपी सरकार में संघ कार्यकर्ता होने के नाते वो संघ को सुनेंगे लेकिन वो संघ की हर बात से सहमत हों ऐसा जरूरी नहीं। पार्टी के सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय हित प्राथमिकता बन जाते हैं।

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