कश्मीर पर SC में अहम सुनवाई, पाबंदियां हटाने पर कोर्ट ने कही ये बात

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई। याचिका में प्रदेश में लगी पाबंदियों का मसला भी उठाया गया था और कहा गया था राज्य में टेलीफोन, मोबाइल जैसी जरूरी सेवाएं बाधित हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई। याचिका में प्रदेश में लगी पाबंदियों का मसला भी उठाया गया था और कहा गया था राज्य में टेलीफोन, मोबाइल जैसी जरूरी सेवाएं बाधित हैं। प्रदेश केई क्षेत्रों में धारा 144 लागू है जिसकी वजह से लोगों को कहीं आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर आठ अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र मोदी सरकार से कहा कि वह कश्मीर में जनजीवन सामान्य करने के लिए जल्द से जल्द सभी संभव कदम उठाए।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ,न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस. ए. नजीर की पीठ ने कहा कि कश्मीर में अगर तथा-कथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट निपट सकता है।

वहीं केंद्र सरकार ने पीठ को कहा कि कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र काम कर रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई हैं।

के. वेणुगोपाल

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केंद्र सरकार के वकील. के. वेणुगोपाल ने कहा कि दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। सरकार की तरफ से कहा गया कि एक गोली भी नहीं चलाई गई और कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगे हैं। कश्मीर संभाग के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

पीठ ने अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल से इन हलफनामों का विवरण देने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रयास करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य करने, कल्याणकारी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने, स्कूल और कॉलेज खोले जाने को कहा है।

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कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए चयनात्मक आधार पर प्रतिबंध हटाए जाएंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

बता दें कि कोर्ट में दायर याचिकाओं में राज्य में लगी पाबंदियों का मसला उठाया गया था। कहा गया था कि राज्य में टेलीफोन, मोबाइल जैसी जरूरी सेवाएं बाधित हैं।