SC में राम मंदिर पर सुनवाई, जज ने मांगे जमीन के सबूत, जानिए अब तक क्या हुआ

अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हो रही है। इस मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 जजों की पीठ रोजाना सुनवाई कर रही है, जिसमें हफ्ते में पांच दिन इस केस पर सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन पर अपना दावा बताया है।

नई दिल्ली: अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हो रही है। इस मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 जजों की पीठ रोजाना सुनवाई कर रही है, जिसमें हफ्ते में पांच दिन इस केस पर सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन पर अपना दावा बताया है।

मंगलवार को एक बार फिर अदालत ने रामलला के वकील से रामजन्मभूमि पर दावे के सबूत मांगे। शुक्रवार को इस मामले की आखिरी सुनवाई में वक्फ बोर्ड की तरफ से 5 दिन तक सुनवाई का विरोध किया गया था, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने इस विरोध को स्वीकार नहीं किया।

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मंगलवार को सुनवाई के दौरान रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ऐतिहासिक तथ्य है कि लोग बाहर से भारत आए थे और उन्होंने मंदिरों को तोड़ा था। इतिहास की कुछ रिपोर्ट्स में यह जिक्र है कि ब्रिटिश काल में हिंदुओं को बाहर रखने के लिए एक दीवार बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि अदालत से कहा कि किसी भी रिपोर्ट में वहां पर नमाज किए जाने का जिक्र नहीं है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर हिंदुओं ने पूजा के लिए स्थल बनाया और उसे तोड़ने का आदेश हुआ, लेकिन हमें इनकी जानकारी नहीं है। मुसलमानों के द्वारा वहां पर नमाज किए जाने का तथ्य 1528 से 1855 तक नहीं है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले का जिक्र किया है।

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपका दुनिया देखने का नजरिया सिर्फ आपका नजरिया है, लेकिन आपके देखने का तरीका सिर्फ एक मात्र नजरिया नहीं हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि एक नजरिया ये है कि स्थान खुद में ईश्वर है और दूसरा नजरिया ये है कि वहां पर हमें पूजा करने का हक मिलना चाहिए। हमें दोनों को देखना होगा।

इस पर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये हमारा नजरिया है, अगर कोई दूसरा पक्ष उसपर दावा करता है तो हम डील कर लेंगे, लेकिन हमारा मानना है कि स्थान देवता है और देवता का दो पक्षों में सामूहिक कब्जा नहीं दिया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान से जमीन पर कब्जे के सबूत पेश करने को कहा है। संविधान पीठ ने कहा कि आप सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को नकार रहे हैं, आप अपने दावे को कैसे साबित करेंगे?

इस पर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों के फैसले में वैचारिक तालमेल नहीं हैं। रामलला विराजमान देवता हैं, दूसरी जगह वो कहते हैं कि संपत्ति के मालिक हैं। जब स्थान खुद में पूजनीय है और देवता है, तो ये नहीं कहा जा सकता है कि वहां भगवान रहते हैं। ऐसे में इस पर सामूहिक कब्जा नहीं हो सकता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि रामलला का जन्मस्थान कहां है? जिसपर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे वाले स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान माना है।

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वकील ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से विवादित स्थल पर उनका मालिकाना हक साबित नहीं किया गया था। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हिंदू जब भी पूजा करने की खुली छूट मांगते हैं तो विवाद होना शुरू होता है।

रामलला की ओर से वरिष्ठ वकील वैद्यनाथन ने कहा कि 72 साल के मोहम्मद हाशिम ने गवाही में कहा था कि हिंदुओं के लिए अयोध्या उतना ही महत्व रखता है, जितना मुसलमानों के लिए मक्का।

वकील वैद्यनाथन ने अदालत से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने एक फैसले में कहा था कि मंदिर के लिए मूर्ति होना जरूरी नहीं है। अब रामजन्मभूमि को लेकर जो आस्था है, वह सभी शर्तों को पूरा करती है।

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वकील वैद्यनाथन ने मुस्लिम पक्ष की दलील को पढ़ा और कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है कि उनके पास कब्जा है या कब्जा चला आ रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोई स्थान देवता है, तो फिर उसके लिए आस्था मान्य होनी चाहिए।

इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था और विश्वास है कि वनवास जाते समय भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ठहरे थे।

एस. सी. वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद से पहले उस स्थान पर मंदिर था, इसका कोई सबूत नहीं है कि बाबर ने ही वो मस्जिद बनाई थी। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था कि उनके पास 438 साल से जमीन का अधिकार है, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उनके इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया था।

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चीफ जस्टिस ने जताई नाराजगी

रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन की दलील के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन की टिप्पणी पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई। राजीव धवन ने कहा कि वैद्यनाथन हाईकोर्ट के जजमेंट पढ़ रहे हैं, सबूत पेश नहीं कर रहे।

चीफ जस्टिस ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी पक्षकारों को पर्याप्त सुनवाई का समय दिया जाएगा, हमें कोई जल्दबाजी नहीं है। वैद्यनाथन जिस तरह दलील पेश कर रहे हैं, पेश कर सकते हैं।