ऑटो सेक्टर में मंदी-यूज्ड कारों में बूम

जहां एक तरह भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी है वहीं यूज्ड या सेकेंड हैंड कार मार्केट में बूम आया हुआ है। यूज्ड कारों में तेजी दरअसल छोटे शहरों और कस्बों में आई है। वजह है कि बड़े शहरों में उपभोक्ताओं की पसंद बदल रही है और प्रदूषण समेत कई मामलों में सख्त नियम-कानून के कारण लोग पुरानी कारें बेच कर नई गाडिय़ां खरीद रहे हैं।

मुम्बई: जहां एक तरह भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी है वहीं यूज्ड या सेकेंड हैंड कार मार्केट में बूम आया हुआ है। यूज्ड कारों में तेजी दरअसल छोटे शहरों और कस्बों में आई है। वजह है कि बड़े शहरों में उपभोक्ताओं की पसंद बदल रही है और प्रदूषण समेत कई मामलों में सख्त नियम-कानून के कारण लोग पुरानी कारें बेच कर नई गाडिय़ां खरीद रहे हैं। सो बड़े शहरों में यूज्ड कारों की मार्केट ठंडी है।

यूज्ड कारों की बिक्री की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष में जहां 40 लाख गाडिय़ां बिकी थीं वहीं इस वित्त वर्ष में 44 लाख गाडिय़ों की बिक्री होने का अनुमान है। ये संख्या 2023 तक 66 लाख तक हो जाने का अनुमान है।

यूज्ड कारों के बिजनेस में लगी बड़ी कंपनियों का कहना है कि महानगरों में लोग अपनी गाडिय़ां जल्दी जल्दी बदलते हैं। इसके अलावा जब सरकार का आदेश आ जायेगा कि दिल्ली-एनसीआर में 14 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल कारें व १० साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाडिय़ां चलने की अनुमति नहीं दी जायेगी तो ये वाहन ठीकठाक करा कर अंतत: छोटे शहरों ही बिकेंगे।

यह भी पढ़ें…HowdyModi: इस कार्यक्रम में एक साथ होंगे मोदी-ट्रंप, इतिहास में पहली बार होगा ऐसा

नई कारों के मुकाबले 2012 में यूज्ड कारों का बाजार 0.8 फीसदी था जो मार्च 2019 तक बढ़ कर 1.2 गुना बढ़ गया।

ऑटो सेक्टर में मांग तेजी से घट रही है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अगस्त में यात्री वाहनों की बिक्री 32 फीसदी घटी है। सियाम ने सवारी वाहनों की बिक्री का डेटा 1997-98 से जुटाना शुरू किया था तबसे अब तक लगातार दसवीं बार मासिक बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है।

यह भी पढ़ें…सऊदी अरब के तेल कुओं पर अटैक, 100 साल में पहली बार खड़ा हुआ ये बड़ा संकट

ये हैं कुछ आंकड़े

-कार मार्केट में छह से आठ साल पुरानी कारों का हिस्सा वित्तीय वर्ष 2017 में शून्य था जो 2019 में 28 फीसदी तक जा पहुंचा।
-यूज्ड कारों के 50 फीसदी खरीदार 25 से 34 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
-यूज्ड कारों को फाइनेंस करने का हिस्सा पिछले तीन वर्षों में 10 फीसदी से बढ़ कर 17 फीसदी हो गया है।
-ऐसे लोग जो पुरानी गाड़ी बेच कर फिर पुरानी गाड़ी खरीदते हैं उनका हिस्सा 2016 से 2019 तक दोगुना हो गया है।
-यूज्ड कारों का बाजार आज नई कार बाजार के मुकाबले 1.3 गुना बड़ा है और वर्ष 2023 तक इसके 25 बिलियन डॉलर के हो जाने की संभावना है।

यह भी पढ़ें…अनुच्छेद 370: कश्मीर के लिए आज बड़ा दिन, SC में 8 याचिकाओं पर अहम सुनवाई

यूज्ड बड़ी कार खरीदना चाहते

किसी सेक्टर में मंदी दूसरे सेक्टर में किस तरह तेजी लाती है उसका बढ़िया उदाहरण यूज्ड कार सेक्टर का है। जब लोगों के पास सरप्लस पैसे की तंगी रहती है तो पैसा बचाने की जुगत की जाती है। ऐसे में लोग डिस्काउंट, ऑफर या अन्य विकल्प तलाशने लगते हैं। ऐसे लोग जो पुरानी कार के बारे पहले नहीं सोचते हैं उनकी रुचि इसमें हो जाती है। ओएलएक्स के एक अध्ययन के अनुसार यूज्ड कारों के युवा खरीदारों की पहली पसंद सीडान और हैचबैक होती हैं। ये खरीदार इंट्री लेवल की छोटी कार की जगह यूज्ड बड़ी कार खरीदना चाहते हैं।