तिहाड़ जेल में कैसी गुजर रही है पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की रात? यहां जानें

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की और कहा कि चिदंबरम को जिस दिन पहली बार जेल भेजा गया था, तब से परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

Published by Aditya Mishra Published: September 20, 2019 | 11:46 am
Modified: September 20, 2019 | 11:47 am

नई दिल्ली: आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम 3 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में ही रहेंगे। गुरुवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने पर उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया।

यहां के जज अजय कुमार ने उन्हें दूसरी बार 14 दिन के लिए जेल भेजने का आदेश दिया। जांच एजेंसी की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने का विरोध किया। सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम कई बीमारियों और वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं। इसलिए उन्हें नियमित मेडिकल सर्विस और सप्लीमेंट्री डाइट की जरूरत है।

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चिदंबरम के वकील ने कोर्ट को बताई ये बात

मालूम हो कि कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान चिदंबरम की न्यायिक हिरासत की अवधि तीन अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। अब उनकी जमानत याचिका पर 23 सितंबर को दिल्ली की हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में चिदंबरम की तरफ से कहा गया था कि उनकी पीठ में दर्द है। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने चिदंबरम की मेडिकल जांच की भी अनुमति दे दी।

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की और कहा कि चिदंबरम को जिस दिन पहली बार जेल भेजा गया था, तब से परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

चिदंबरम की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के सीबीआई के अनुरोध का विरोध किया।

सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कि चिदंबरम कई तरह की बीमारियां हैं, जिसके कारण उनका वजन तेजी से घट रहा है। इसलिए उन्हें नियमित मेडिकल सर्विस और सप्लीमेंट्री डाइट की जरूरत है।

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सीबीआई 305 करोड़ रुपये की कथित धांधली की कर रही जांच

बीआई 305 करोड़ रुपये की कथित धांधली की जांच कर रहा है, जिसमें फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश के लिए मंजूरी दिलाई गई थी। ये केस 2007 का है जब चिदंबरम मनमोहन सरकार में वित्त मंत्री थी। इस मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को एफआईआर दर्ज किया था।

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