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औरंगाबाद का बदलेगा नाम: ठाकरे सरकार ने लिया फैसला, कांग्रेस को है ऐतराज

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार 'औरंगाबाद' शहर का नाम बदलकर संभाजीनगर करने वाली है। लेकिन कांग्रेस को इस पर ऐतराज है। बता दें कि औरंगाबाद का नाम बदलना शिवसेना की पुरानी मांग है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 2 Jan 2021 1:22 PM GMT

औरंगाबाद का बदलेगा नाम: ठाकरे सरकार ने लिया फैसला, कांग्रेस को है ऐतराज
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औरंगाबाद का बदलेगा नाम: ठाकरे सरकार ने लिया फैसला, कांग्रेस को है ऐतराज
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मुंबई: अब महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार (Uddhav Thackeray Government) जगहों और शहरों का नाम बदलने की राजनीति अपनाने वाली है। दरअसल, राज्य सरकार 'औरंगाबाद' शहर का नाम बदलने जा रही है। इसकी जानकारी शिवसेना पार्टी ने अपने मुखपक्ष 'सामना' में दी है। सामना में एक आर्टिकल में लिखा गया है कि पार्टी जल्द ही औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने वाली है। हालांकि कांग्रेस को इस पर ऐतराज है।

औरंगाबाद का नाम बदलना शिवसेना की पुरानी मांग

बता दें कि औरंगाबाद का नाम बदलना शिवसेना की पुरानी मांग है। शिवसेना इसके पहले भी नाम बदलने की कोशिश कर चुकी है। दरअसल, जब 1995 में महाराष्ट्र में शिव सेना-बीजेपी की गठबंधन सरकार सत्ता में आई थी तो मुख्यमंत्री मनोहर जोशी की कैबिनेट ने औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने का प्रस्ताव पास कर दिया था, लेकिन उस प्रस्ताव को कोर्ट में चुनौती दे दी गई थी। तब ये मामला पहले हाईकोर्ट में गया फिर सुप्रीम कोर्ट में।

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shivsena uddhav thackrey (Photo- Twitter)

पहले भी की थी नाम बदलने की कोशिश

इससे पहले इस मामले में कोर्ट द्वारा कोई फैसला सुनाया जाता, राज्य में सत्ता ही बदल गई। दरअसल, 1999 में यहां पर शिवसेना और भाजपा की सरकार की जगह कांग्रस- एनसीपी की सरकार आ गई थी। फिर राज्य के नए सीएम विलासराव देशमुख ने कोर्ट में अपनी सरकार का पक्ष ही बदल दिया, जिससे नामांतरण नहीं हो पाया। अब जब शिवसेना सरकार महाराष्ट्र में है तो औरंगाबाद का नाम फिर से बदलने की बात कही जा रही है, लेकिन इस फैसला का असर शिवसेना सरकार बनाने वाले गठबन्धन (महाराष्ट्र विकास अघाड़ी) पर भी पड़ रहा है।

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कांग्रेस ने व्यक्त की नाराजगी

महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने शिवसेना पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने पहले ही कहा है कि इस मसले का उल्लेख MVA के सामान्य न्यूनतम कार्यकम में नहीं था। वहीं इस पर शिवसेना का कहना है कि एमवीए सरकार की नीतियों और नियम पुस्तिका में नाम परिवर्तन के मुद्दे को शामिल करना बेवकूफी होती, क्योंकि इसके लिए कांग्रेस का विरोध पहले भी रहा है। शिवसेना ने सामना में लिखा है कि कांग्रेस नेता के बयान के बाद पार्टी को अपने रूख को स्पष्ट करने की जरूरत नहीं है।

भाजपा पर लगाया ये आरोप

शिवसेना का कहना है कि पार्टी इस मसले पर अपने पहले के रूख से हटी नहीं है। सामना में पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोपी लगाते हुए आगे लिखा है कि जब पार्टी इलाहाबाद, फैजाबाद और औरंगजेब मार्ग में नाम बदल सकती है तो महाराष्ट्र में सत्ता में रहने पर ऐसा क्यों नहीं किया? शिवसेना ने कहा कि जैसे राम मंदिर का निर्माण सर्वसम्मति से किया जा रहा है, वैसे ही संभाजीनगर का नामकरण भी सर्वसम्मति से किया जाएगा।

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