सावधान! ज्यादा समय तक फ्लाइट में रहना है घातक, होते हैं ये नुकसान

सबसे मुख्य चुनौती ये है कि इतने लंबे समय के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट अभी हमारे पास नहीं हैं। Qantas QF 7879 भी इस शोध के लिए एक सही फ्लाइट नहीं थी।

सावधान! ज्यादा समय तक फ्लाइट में रहना है घातक, होते हैं ये नुकसान

सावधान! ज्यादा समय तक फ्लाइट में रहना है घातक, होते हैं ये नुकसान

न्यूयॉर्क: दुनिया की सबसे लंबी उड़ान भरने वाली फ्लाइट न्यूयॉर्क से सिडनी पहुंच गई है। इस उड़ान का समय जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। दरअसल प्रशांत महासागर के ऊपर से गुजरते हुए इस फ्लाइट ने 16,200 किमी को 19 घंटे 16 मिनट में पूरा किया है। ऐसे में ये जानना काफी रोचक होगा कि आखिर 19 घंटे 16 मिनट का सफर एक बार में पूरा करने पर इंसान के शरीर पर क्या असर पड़ता है।

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बता दें, डॉक्टर्स इसपर शोध कर रहे हैं कि इतने लंबे समय तक फ्लाइट में रहने की वजह से मानव शरीर में क्या बदलाव आए या इससे इंसान को क्या दिक्कत हुई। मगर इस बीच हम आपके लिए कुछ ऐसे बिंदु लेकर आए हैं, जिनकी मदद से आप ये जान सकते हैं कि 19 घंटे तक हवा में रहने से इंसान के शरीर पर क्या असर पड़ेगा।

न्यूयॉर्क से सिडनी पहुंची फ्लाइट

Qantas QF 7879 फ्लाइट 19 अक्टूबर को रात 9 बजे न्यूयॉर्क के जॉनी एफ केनेडी एयरपोर्ट से सिडनी तक नॉन-स्टॉप उड़ान भरने वाली पहली फ्लाइट थी। इस फ्लाइट में कुल 50 यात्री और कुछ क्रू मेंबर मौजूद थे और इसका मकसद ये पता करना था कि इस अल्ट्रा-लॉन्ग हॉल फ़्लाइट में पैसेंजर और क्रू मेंबर का स्वास्थ कैसे बेहतरीन रखा जा सकता है। इसके साथ इस रिसर्च को करने का मकसद ये भी था कि यह पता चल सके कि इष्टतम चालक दल के आराम और काम करने की अवधि कितनी होनी चाहिए।

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ऑस्ट्रेलियाई विमानन कंपनी Qantas ने इस उड़ान को करने के बाद अपने नाम एक रेकॉर्ड दर्ज किया है। दरअसल अब यह विमानन कंपनी बिना रुके 19 घंटे 16 मिनट तक उड़ान भरने वाली पहली सबसे लंबी नॉनस्टॉप फ्लाइट बन गई है। इस यात्रा के तहत लोगों को कैसे प्रभावित किया जा सकता है, इस हिस्से पर रिसर्च की गई है।

Qantas QF 7879 पर किया गया शोध

जब Qantas QF 7879 ने उड़ान भरी तो सबसे पहले इस बात का ध्यान रखा गया कि फ्लाइट पर चार पायलट को रखा गया और उन्हे रोटेशन के तहत ही विमान चलाने का मौका मिला। इसके अलावा यात्रियों को फ्लाइट के उड़ान भरने के 6 घंटे बाद ज्यादा मात्रा वाला हाई कार्बोहाइड्रेट भोजन दिया गया और नींद लाने के लिए रोशनी को कम किया गया।

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इसके साथ ही, इसका भी परीक्षण किया गया कि पायलट के दिमाग के अलर्टनेस की स्थिति क्या रही। पायलट के अलावा इसका भी खास ध्यान रखा गया कि इतने लंबे समय का पैसेंजर के शरीर पर क्या असर पड़ा। हालांकि, इसका विश्लेषण साल के अंत तक आएगा, जो कि सबसे पहले ऑस्ट्रेलियाई नागरिक उड्डयन सुरक्षा प्राधिकरण के साथ साझा किया जाएगा।

होती हैं ये परेशानियां

मगर 6 घंटे से ज्यादा का सफर अगर आपने फ्लाइट में किया है तो सावधान हो जाइए। दरअसल 6 घंटे से ज्यादा का सफर करने को लेकर कुछ शोध पहले ही सामने आ चुके हैं। इन शोध की बात करें तो यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। शोध में सामने आया कि महत्वपूर्ण तरल पदार्थ लगभग 250 एमएल प्रति पैर यात्रियों के पैरों और जांघों में जमा हो जाता है। इसकी वजह से 1.5 मिमी तक त्वचा मोटी हो गई। हालांकि, तीन दिनों के बाद यह स्थिति सामान्य हो गई।

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इस शोध में ये बात भी सामने आई कि यह केवल यात्रियों के लिए नहीं है, जो स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करते हैं। यात्रियों के साथ-साथ 60 फीसदी पायलट भी मध्य से गंभीर थकान को महसूस करते हैं। यह आकंड़ा ऑस्ट्रेलियाई परिवहन सुरक्षा बोर्ड द्वारा साल के शुरुआत में किया गया था।

ज्यादा ऊपर जाने पर पड़ता है ज्यादा रेडिएशन

इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई नियमों के अनुसार, एक पायलट के लिए प्रति दिन 20 घंटे की अधिकतम उड़ान समय सीमा निर्धारित की गई है। इसमें उड़ान भरने से पहले और उड़ान भरने के बाद की जांच भी शामिल है। हालांकि, QF 7879 के लिए ही 19 घंटे से ज्यादा की उड़ान भरना किसी पायलट के लिए आसान नहीं है।

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वहीं, विकिरण यानि रेडिएशन की बात करें तो इसका असर भी यात्रियों और पायलट पर पड़ता है। इस मामले में यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल का कहना है कि जितनी लंबी और ऊंची उड़ान कोई फ्लाइट भरेगी, उतना ही ज्यादा विकिरण यानि रेडिएशन का असर यात्रियों पर पड़ेगा।

क्या है मुख्य चुनौती?

सबसे मुख्य चुनौती ये है कि इतने लंबे समय के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट अभी हमारे पास नहीं हैं। Qantas QF 7879 भी इस शोध के लिए एक सही फ्लाइट नहीं थी। हालांकि, इसपर शोध इसलिए किया गया, ताकि यह पता चल सके कि 19 घंटे 16 मिनट की नॉनस्टॉप उड़ान भरने के लिए फ्लाइट को कितने तेल की जरूरत है और इतने लंबे समय के लिए उड़ान भरने पर यात्रियों और पायलट पर क्या असर पड़ता है।