आतंकवाद, घुसपैठ और अलगाववाद के खिलाफ ‘जरा भी दया नहीं

वास्तव में भारत में सहअस्तित्व के भाव से सभी धर्मों के लोग रह रहे हैं कुछ राष्ट्रविरोधी अलगाववादी नेता समाज को बांटने में लगे हैं। चाहे वह कश्मीर का मामला हो या फिर अयोध्या में राम जन्मभूमि का। इनकी कोशिश है कि मुद्दा जिन्दा रहना चाहिए ताकि इनकी राजनीति चमकती रहे।

रामकृष्ण वाजपेयी

जैसा कि जफरयाब जिलानी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग हैं। इनका दावा है कि भारत में मुसलमानों के साथ पिछले 70 सालों से लगातार अत्याचार होता आ रहा है। उन्हें लगातार दबाया जा रहा है। वास्तव में अगर ऐसा है तो मुख्य रूप से इसके लिए पं. जवाहर लाल नेहरू जिम्मेदार हैं जिन्होंने धर्म के आधार पर हो रहे देश के विभाजन के समय मुसलमानों के आगे माथा रगड़ते हुए उनसे भारत से न जाने की याचना की और मुसलमानों ने पसीज कर भारत में रहने की हामी भर दी। लेकिन उसके बाद कांग्रेस सरकारों के दौर में लगातार दंगे होते हो रहे यह बात दीगर है कि दंगे की शुरुआत करने के लिए मुसलमान ही कठघरे में खड़े होते रहे।

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भारत के यातना भरे जीवन से वह पाकिस्तान में कितना महफूज हैं

अस्सी के दशक में जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद की शुरुआत हुई तो मुस्लिम आतंकवाद से मुस्लिम हटाकर आतंकवाद और उग्रवाद जैसी शब्दों की बाजीगरी कर मुसलमानों को छला जाता रहा। खुद मुस्लिम देश पाकिस्तान यहां के मुसलमानों के लिए कितना पलक पांवड़े बिछाकर बैठा है यह बात पाकिस्तान में रहने वाले मोहाजिरों से पूछी जा सकती है। जो बताते हैं कि भारत के यातना भरे जीवन से वह पाकिस्तान में कितना महफूज हैं। पिछले कुछ सालों से इस्लामिक देश पाकिस्तान का नया आका चीन बन गया है। और अब भारत व पाकिस्तान के मुसलमानों को चीन में और चीन के साथ मुसलमानों का भविष्य सुरक्षित और हित दिखाई देने लगा है।

चीन में मुसलमानों का हित कितना सुरक्षित है यह बात हाल ही में द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाती है। इस रिपोर्ट में 403 पन्नों के आंतरिक दस्तावेज में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की बेहद गोपनीय कार्रवाई का ब्योरा है। यह अभूतपूर्व विवरण भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों की आंखें खोलने के लिए काफी होना चाहिए जिसमें मुसलमानों के प्रति चीन की सह्रदयता का नमूना उजागर हो रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासकर अमेरिका चीन के इस रवैये की कड़ी आलोचना कर रहा है लेकिन भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आना यह साबित करता है कि मुसलमान चीन के इस कदम में उसके साथ हैं।

अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ ‘जरा भी दया न’ दिखाने का आदेश

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चीनी सरकार के लीक हुए दस्तावेज वहां के शिनजियांग प्रांत में मुसलमान अल्पसंख्यकों पर की गई कार्रवाई को उजागर करते हैं। इसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ ‘जरा भी दया न’ दिखाने का आदेश दिया था। ऐसा अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में कहा गया है।

चीन के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में फैले नजरबंदी शिविरों में दस लाख से ज्यादा उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को रखा गया है। हालांकि भारत में अभी तक ऐसी कोई शुरुआत नहीं हुई है फिर भी चीन और पाकिस्तान भारत का विरोध करने के लिए यहां रहने वाले मुस्लिम्स के प्रति अतिरिक्त दया का भाव यदाकदा नाटक करते रहते हैं। आईएसआई के भारत विरोधी झूठे दुष्प्रचार के अभियान को भारत में रहने वाले मुसलमान सच मानते रहते हैं। इसीलिए कोई हिन्दू उग्रवादी नहीं बनता मुस्लिम ही बनते हैं। अगर सिर्फ पैसे का लालच हो तो अन्य धर्मों के युवाओं पर इसका असर क्यों नहीं होता। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं उग्रवादियों को यहां के मुसलमानों का समर्थन और विश्वास हासिल रहता है।

आबादी पर निगरानी और नियंत्रण का शिकंजा कस रहा है

चीन उइगर आबादी पर निगरानी और नियंत्रण का शिकंजा कस रहा है तो इसके विरोध में भारत के मुसलमान क्यों आगे नहीं रहे हैं। बताया गया है कि  ये दस्तावेज चीन के एक अज्ञात शख्स के हवाले से जारी किये गए हैं। मानवाधिकारवादी संगठन ये उम्मीद कर रहे हैं कि इस खुलासे से चीनी नेतृत्व पर दमन को रोकने का दबाव बनेगा।

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एक दस्तावेज बताता है कि चीनी अधिकारियों से कहा गया है कि जिन लोगों के रिश्तेदार गायब हैं उन लोगों के सवालों के जवाब में कहा जाए कि ये लोग अपने भले के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम चीन में कथित अल्पसंख्यक उइगर उग्रवादियों द्वारा एक रेलवे स्टेशन पर 31 लोगों की हत्या करने के बाद 2014 में अधिकारियों को दिये गए भाषण में शी ने ‘आतंकवाद, घुसपैठ और अलगाववाद’ के खिलाफ पूर्ण संघर्ष का आह्वान करते हुए ‘तानाशाही के अंगों’ का इस्तेमाल करने और ‘किभी भी तरह की दया नहीं’ दिखाने को कहा था।

‘हर किसी को पकड़िये जिन्हें पकड़ा जाना चाहिए’

भारत तो लंबे समय से तमाम आतंकवाद का दंश झेल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुसलमानों के साथ ऐसा सलूक नहीं किया। रिपोर्ट बताती है कि चीन के शिनजियांग प्रांत में नए पार्टी प्रमुख चेन कुआंगुओ की 2016 में नियुक्ति के बाद नजरबंदी शिविरों में तेजी से इजाफा हुआ था। एनवाईटी के मुताबिक चेन ने अपनी कार्रवाई को न्यायोचित ठहराने के लिए शी के भाषण की प्रतियां बांटीं और अधिकारियों से अनुरोध किया, ‘हर किसी को पकड़िये जिन्हें पकड़ा जाना चाहिए।’

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वास्तव में भारत में सहअस्तित्व के भाव से सभी धर्मों के लोग रह रहे हैं कुछ राष्ट्रविरोधी अलगाववादी नेता समाज को बांटने में लगे हैं। चाहे वह कश्मीर का मामला हो या फिर अयोध्या में राम जन्मभूमि का। इनकी कोशिश है कि मुद्दा जिन्दा रहना चाहिए ताकि इनकी राजनीति चमकती रहे।