असम में भाजपा ने घुसपैठ को बनाया हथियार, मदरसों के मुद्दे पर दुविधा में फंसी कांग्रेस

असम में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले ही घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। भाजपा नेता इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को नियमित स्कूल बनाने के मुद्दे पर कांग्रेस दुविधा में फंस गई है।

Published by Shreya Published: January 25, 2021 | 10:36 am
AMIT SHAH-RAHUL GANDHI

असम में भाजपा ने घुसपैठ को बनाया हथियार, मदरसों के मुद्दे पर दुविधा में फंसी कांग्रेस (फोटो- सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: असम में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने घुसपैठ के मुद्दे को बड़ा हथियार बना लिया है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन को घेरना शुरू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी रविवार को असम की रैलियों में घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस और एआईयूडीएफ के नेता बदरुद्दीन अजमल सत्ता में आने पर एक बार फिर असम का दरवाजा घुसपैठियों के लिए खोल देंगे। भाजपा ही राज्य को घुसपैठियों से मुक्ति दिला सकती है।

दूसरी ओर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को नियमित स्कूल बनाने के मुद्दे पर कांग्रेस दुविधा में फंस गई है। राज्य में कांग्रेस नेताओं का एक बड़ा खेमा ऐसे मुद्दों से दूरी बनाने पर जोर दे रहा है क्योंकि इससे भाजपा को ध्रुवीकरण में मदद मिल सकती है।

फिर गरमाने लगा घुसपैठ का मुद्दा

असम में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले ही घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। भाजपा नेता इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने में जुटे हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोकराझार और नलबाड़ी की रैलियों में घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाते हुए कांग्रेस को घेरा।

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उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ही असम में घुसपैठियों को रोक सकती है। उन्होंने कहा कि पांच साल के शासनकाल के दौरान भाजपा ने असम में काफी काम किए हैं और आप भाजपा को पांच साल और दीजिए। हम हिंसामुक्त, घुसपैठमुक्त और बाढ़मुक्त असम देने का वादा करते हैं।

AMIT SHAH
(फोटो- ट्विटर)

कांग्रेस और अजमल को शाह ने घेरा

शाह ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने विभिन्न उग्रवादी संगठनों के साथ तमाम समझौते किए, लेकिन अपने वादों को निभाते हुए में पूरी तरह विफल रही। कांग्रेस न तो हिंसा रोक सकी और न राज्य में शांति कायम कर चुकी।

कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल के गठबंधन पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि अगर यह जोड़ी सत्ता में आ गई तो वोट बैंक की खातिर कभी घुसपैठ को नहीं रोकेगी। उन्होंने कहा कि अगर ये लोग सत्ता में आए तो अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए घुसपैठियों का स्वागत करने में जुट जाएंगे। कांग्रेस के शासनकाल में असम में सिर्फ खून बहा है और कांग्रेस की गोलियों से दस हजार युवाओं को अपनी जान देनी पड़ी है।

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अजमल ने उठाया मस्जिदों का मुद्दा

दरअसल कांग्रेस के एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से गठबंधन करने के बाद राज्य में ध्रुवीकरण की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि अजमल ने ऐसे मुद्दे उठाने शुरू कर दिए हैं जो राज्य में ध्रुवीकरण का बड़ा कारण बन सकते हैं।

अभी चुनाव तारीखों का एलान नहीं हुआ है मगर अजमल ने मस्जिदों का मुद्दा उठाकर भाजपा को बड़ा मौका दे दिया है। अजमल का कहना है कि अगर भाजपा 2024 के आम चुनाव में जीतकर फिर सत्ता में आई तो वह देश में साढ़े तीन हजार मस्जिदों को ढहा देगी।

मुस्लिम वोट बैंक पर अजमल की नजर

उन्होंने कहा कि भाजपा ने इसके लिए देशभर में मस्जिदों को चिन्हित कर रखा है। अजमल ने कहा कि कुरान में तीन तलाक को मंजूरी मिली हुई है मगर नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

अगर भाजपा की सरकार असम की सत्ता में आई तो वह राज्य की महिलाओं को बुर्का नहीं पहनने देगी। इसके साथ ही मुस्लिमों पर दाढ़ी न बढ़ाने और पारंपरिक बड़ी टोपियां न पहनने का दबाव भी बनाया जाएगा।

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RAHUL GANDHI
(फोटो- सोशल मीडिया)

मदरसों के मुद्दे पर कांग्रेस फंसी

एआईयूडीएफ और वाम दलों से गठबंधन के बाद कांग्रेस के लिए साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय करना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को नियमित स्कूल में बदलने के मुद्दे पर कांग्रेस दुविधा में फंस गई है।

कांग्रेस की असम इकाई के नेताओं के एक बड़े समूह का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर जोर देने से चुनाव में भाजपा को ध्रुवीकरण करने का मौका मिलेगा। इससे कांग्रेस को सियासी तौर पर नुकसान हो सकता है।

इन दलों से कांग्रेस ने किया है गठजोड़

कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एआईयूडीएफ के अलावा माकपा, भाकपा, भाकपा (माले) तथा क्षेत्रीय पार्टी आंचलिक गण मोर्चा के साथ गठबंधन की घोषणा की है। अभी तक इस गठबंधन का साझा न्यूनतम कार्यक्रम नहीं बन सका है और कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की कोशिशें की जा रही हैं।

अंशुमान तिवारी

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