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सीएजी विनोद राय और उनका गांव परसा

आजादी! गोरी हूकुमत से आजादी। इसी सड़क से पगडंडी नुमा एक सड़क और निकलती है जो बाराचवर होते हुए बलिया जिले के रसड़ा को जोड़ती है। इसी सड़क किनारे एक गांव है परसा।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 5 April 2020 12:01 PM GMT

सीएजी विनोद राय और उनका गांव परसा
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दुर्गेश पार्थसारथी

गाजीपुर: उत्‍तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की तहसील मुहम्‍मदाबाद से एक सड़क बलिया जिले को जाती है। यह सड़क दो जिलों को ही नहीं जोड़ती बल्कि-दो क्रांतिकारियों के गांवों को भी जोड़ती है। भले ही उनके जन्‍म और शहादत में समय का लंबा अंतराल है, लेकिनों दोनों का मकसद एक था। आजादी! गोरी हूकुमत से आजादी। इसी सड़क से पगडंडी नुमा एक सड़क और निकलती है जो बाराचवर होते हुए बलिया जिले के रसड़ा को जोड़ती है। इसी सड़क किनारे एक गांव है परसा।

परसा में अपना भारत/न्‍यूज ट्रैक की टीम

इसी पगडंडी नुमा सड़क से होते हुए अपना भारत/न्‍यूज ट्रैक की टीम परसा पहुंचती है। दिन के तीन बजे हैं। सांझ ढल रही है। दिनभर का थका सूरज धीरे-धीरे अस्‍ताचल की ओर बढ़ रहा है। टीम गांव की गलियों से होते हुए पहुंचती है भारत के 11 वें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के दरवाजे पर। घर के सामने एक मस्जिद और घर के बगल में एक शिवालय है। अंग्रेजों के जमाने की बनी बखरी (आज की कोठी) का गेट खटखटाते हैं। भीतर से दो लोग निकलते हैं। इनकी उम्र करीब 60-62 और 45-48 वर्ष के बीच होगी। ये दोनो विनोद राय के चचेरे भाई हैं।

दादा सूर्यनारायण राय ब्रिटिश सरकार में कोतवाल थे

बातचीत का सिलसिला शुरू होता है। बातों ही बातों में पता चलता है कि पूर्व सीएजी विनोद राय बहुत ही शर्मिले स्‍वभाव के व्‍यक्ति हैं। इनके दादा जी सूर्यनारायण राय ब्रिटिश सरकार में कोतवाल थे। जबकि इनके पिता भोलानाथ राय सेना में कर्नल थे और 1971 की जंग भी लड़े थे। अपने तीन भाइयों में विनोद मझले हैं। और ये 1972 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

जबकि, इनके बड़े भाई कमल नयन राय डीआरडीओ में चीफ इंजीनियर और छोटे भाई पुष्‍पेंद्र राय 1974 बैच के आईएएस अधिकारी और भारत पेट्रोलियम जीनेवा से सेवानिवृत हैं। जबकि इनके दो चचरे भाई (पारसनाथ राय और रजनीश राय) एक बिहार सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री तो दूसरे अीडीआरडीओ में सेवाएं दे रहे हैं।

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दस हजार की आबादी, सुविधा संपन्‍न गांव

करीब दस हजार की आबादी वाले इस गांव में सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। मुख्‍य रूप से कृषि आधारित इस गांव में अधिकांश लोग बीएसएफ, सीआरपीएफ और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि इसी गांव के पप्‍पू राय ब्रिगेडियर हैं। यदि सिविल सर्विसेज की बात करें तों गांव से पढ़े लिखे मोहन प्रकाश मधुकर आईएएस रिटायर्ड और अमरनाथ राय सिलॉग यूनिविर्सिटी में वाइसचांसलर हैं।

गलियां और सड़कें पक्‍की, सौ फीसद खुले में शौच से मुक्‍त

यही नहीं, विकास की बयार गांव में भी बही है। परसा गांव की हर गली, हर मोहल्‍ले की सड़कें पक्‍की हैं। गांव में बैंक, पोस्‍टऑफिस, अस्‍पताल और हाईस्‍कूल भी है। यहां तक कि यह गांव सौ फीसद खुले में शौचमुक्‍त गांव भी है।

आज भी याद है वह थप्‍पड़

इसी दरम्‍यान अपना भारत टीम की मुलाकात विनोद राय के बचपन के दोस्‍त और उनके बड़े भाई 88 वर्षीय राधाकृष्‍ण राय से होती है। राधाकृष्‍ण कहते हैं विनोद बहुद शर्मिला था। कर्नल साहब (विनोद के पिता जी) जब पास के ढोढ़ाडीह स्‍टेशन पर उतरते थे तो धोती कुर्ता पहन कर गांव आते थे। वे कहते हैं - हमें वह दिन आज भी याद आता है जब गांव के तालाब पर विनोद और उनके तीनों भाइयों का जनेऊ संस्‍कर हो रहा था। विनोद और उनके भाईयों ने मुंडन करवाने से मना कर दिया। इसपर कर्नल साहिब ने विनोद को एक चाटा रसीद किया। फिर डर के मारे तीनो चारो भाईयों ने मुंडन करवा लिया। आज भी विनोद जब गांव आता है तो उस बात को याद कर हम सभी हंसते हैं।

गांव के दस बच्‍चों को स्‍कॉलरशिप देते हैं विनोद राय

गांव के हरवंश नारायण राय, शंभू गुप्‍ता, कमलेश चौरसिया और हवलदार अरुण राय कहते हैं कि विनोद राय इस गांव के सिरमौर हैं। उन्‍होंने गांव के लिए बहुत कुछ किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्‍होंने गाजीपुर और परसा को तो पहचान दिलाई ही है। साथ ही वह गावं के दस बच्‍चों को जो दसवी और 12वीं फर्स्‍टक्‍लास पास होते हैं तो उनके शिक्षा का पूरा खर्च वही उठाते हैं। इसके अलावा दस लड़कियों को भी स्‍कॉलरशिप देते हैं। शंभू गुप्‍ता कहते हैं कि विनोद राय इस गांव के युवाओं के रोल मॉडल हैं। गांव के युवा विनोद राय की तरह ही बनना चाहते है।

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वर्ष मे दो बार आते हैं गांव, करवाते हैं खेल मेले

गांव की बाजार में गोलगप्‍पे की दुकान लगाने वाले शंभू कहते हैं विनोद राय और उनके सभी भाई साल में दो बार गांव आते हैं। वे कहते हैं कि पटना और दिल्‍ली में रहने के बावजूद विनोद चाचा और उनके सभी भाई आज भी गांव से जुड़े हैं। जब भी वह गांव आते हैं तो सभी से घर-घर जा कर मिलते हैं। इसके अलावा दिसंबर में वह गांव में खेल मेला भी करवाते हैं। आज गांव में जो कुछ भी विकास दिख रहा है सब उन्‍हीं की देन है। वेशक यह काम ग्राम प्रधान के मार्फत हुआ है।

विनोद राय के बारे में जो आप नहीं जानते हैं

भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय के छोटे भाई रजनीश राय बताते हैं कि विनोद राय का जन्‍म 23 मई 1948 को हुआ था। इनकी और इनके भाइयों की उच्‍च शिक्षा दिल्‍ली के प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज से हुई थी। 1972 में वे केरल केडर के आईएएस अधिकारी थे। केरल के त्रिशुर जिले के 34 वें उपजिलाधिकारी से अपना करियर शुरू किया। फिर इसी जिले के कलेक्‍टर बने। उनके उत्‍कृष्‍ठ कार्यों की वजह से वहां के लोग उन्‍हें सत्‍तन अयप्‍पन कह कर बुलाने लगे थे।

इसलिए चर्चा में आए थे विनोद राय

तत्‍कालीन सीएजी विनोद राय 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला ब्लॉक आवंटन और राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में हुए घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने ये पद 7 जनवरी 2008 से 22 मई 2013 तक ग्रहण किया था। जिस वक्त उनको इस पद पर नियुक्त किया गया था उस समय देश में कांग्रेस की सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे। सीएजी विनोद राय द्वारा किए गए इन खुलासों से कांग्रेस सरकार हिल गई थी। और यही खुलासे केंद्र में भाजपा सरकार के गठन के लिए मजबूत आधारशिला का काम किया था।

मनमोहन सिंह ने पढ़ाया था अर्थशास्‍त्र

बहुत कम लोगों को पता होगा कि मनमोन सिंह सरकार में हुए चर्चित एक्‍सपेक्‍ट्रम घोटाले का पर्दाफाश करने वाले विनोद राय कभी पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के शिष्‍य हुआ करते थे। देश में हुए इतने बड़े घोटालों पर विनोद राय ने कहा था कि मनमोहन सिंह चाहते तो 2-जी घोटाले को रोक सकते थे। लेकिन, यही विनोद राय जब दिल्‍ली के प्रतिष्ठित हिंदू जब विनोद राय दिल्ली विश्‍वविद्यालय में एमए इकोनॉमिक्स से अपनी अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रहे थे, तो उन्हें मनमोहन सिंह अर्थशास्त्र पढ़ाया करते थे।

विनोद राय को मिले सम्मान

रजनीश राय बताते हैं कि फोर्ब्स पत्रिका द्वारा दुनिया भर से साल 2011 के चुने गए पर्सन ऑफ ईयर की सूची में एक नाम विनोद राय का भी था। CAG रहते हुए किए गए घोटालों के खुलासे के लिए उन्हें पर्सन ऑफ ईयर चुना गया था। वहीं भारत सरकार ने भी उनको उनके द्वारा किए कार्यों के लिए पुरस्‍कृत किया था। नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्ष2016 में इन्‍हें पद्म भूषण से सम्‍मानित किया था।

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कुछ किताबें जिन्‍हें विनोद राय ने लिखा

पूर्व डीजीपी बिहार सरकार से सेवानिवृत्‍त पारसनाथ राय कहते हैं विनोद ने देश में हुए घोटालों को लेकर एक किताब भी लिखी है। इस किताब के जरिए उन्होंने लोगों को बताया है कि किस तरह से नेताओं और मंत्रियों द्वारा घोटाले किए गए थे। इस पुस्‍तक का नाम 'नॉट जस्ट एन एकाउंटेंट: द डायरी ऑफ द नेशन्स कॉनसाइंस कीपर' है। इस किताब को उन्‍होंने वर्ष 2014 में लिखा था।

राजनीति से दूर है परिवार

विनोद राय और उनका परिवार राजनीति से कोसों दूर है। यहां तक कि गांव की सरपंची में भी कोई रुचि नहीं लेता। इनका परिवार मुख्‍य रूप में से खेती और नौकरी पर आश्रित है। ग्रामीणों के मुताबि‍क उनकी आंखों के तारे और उत्‍तर प्रदेश व गाजीपुर के गौरव हैं विनोद राय।

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