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कोरोना महामारी में अमेठी का किला बरकारार रखने और बचाने की जुगलबंदी

साल भर पहले बीजेपी ने बरसो की मुराद हासिल की है, अमेठी जीत कर। कांग्रेस अपना पुश्तैनी किला बचा नहीं पाई उसे इसका मलाल है। अब हर वो पैंतरा कांग्रेस खेल रही कि पुरानी स्थिति बहाल हो जाए।

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ShreyaBy Shreya

Published on 8 May 2020 9:12 AM GMT

कोरोना महामारी में अमेठी का किला बरकारार रखने और बचाने की जुगलबंदी
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रिपोर्टर- असगर नकवी

अमेठी: साल भर पहले बीजेपी ने बरसो की मुराद हासिल की है, अमेठी जीत कर। कांग्रेस अपना पुश्तैनी किला बचा नहीं पाई उसे इसका मलाल है। अब हर वो पैंतरा कांग्रेस खेल रही कि पुरानी स्थिति बहाल हो जाए। कोरोना महामारी में लागू हुआ लॉकडाउन बेहतर मौका है, जिसमें वो किसी न किसी तरीके से अपना अस्तित्व बनाने में जुटी है। लेकिन यहां की सांसद केंद्र में मंत्री, और केंद्र से लेकर राज्य तक उनकी सत्ता। नतीजा ये है कि प्रशासन भी सत्ता के आगे नतमस्तक है, ऐसे में सत्ता विरोधी दल हिल भर जाए तो प्रशासन उसके नाक में दम करने में कस नही छोड़ रहा।

लॉकडाउन- 3 के बाद जिले में लगातार मिले कोरोना के मामले

23 मार्च से शुरू हुए लाकडाउन में 4 मई तक अमेठी ग्रीन जोन रहा। यहां कोरोना का एक भी मरीज नहीं मिला था। तीसरे लाकडाउन की घोषणा होने के ठीक दो दिन बाद यहां कोरोना बम फूटा और एक के बाद एक तीन मरीज कोरोना के मिले। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जिले के 28 लोग अजमेर में फंसे थे और प्राइवेट बस से एक मई को जिले के इन्हौना बार्डर पर आए। जहां से इन्हें मुसाफिरखाना में बने क्वारनटाइन सेंटर में ले जाकर रखा गया। इनका सैंपल एसजीपीजीआई गया वहां से 5 मई को आई रिपोर्ट में एक महिला पाजिटिव पाई गई थी, इसे प्रशासन ने सुल्तानपुर के कुड़वार में बने आईसोलेशन सेंटर भेजा गया था। ठीक 48 घंटे बाद इनमे से दो अन्य की रिपोर्ट भी पाजिटिव आई और इन्हें भी सुल्तानपुर शिफ्ट करा दिया गया।

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जिले की सियासत में उफान

उधर पहला कोरोना पाजिटिव मरीज मिलते ही जिले की सियासत में उफान आ गया। बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर हुई, बीजेपी की ओर से पार्टी के लोकसभा संयोजक राजेश अग्रहरि ने बयान दिया कि अमेठी ग्रीन जोन था, इसका श्रेय शासन-प्रशासन और स्मृति ईरानी के कठोर परिश्रम को जाता है। 'ये बात कांग्रेस के दस जनपथ और वाड्रा परिवार को हज़म नहीं हुई। मेरी अंतर आत्मा की आवाज है वो ये कि ये षड्यंत्र है। राजस्थान जो कांग्रेस शासित प्रदेश है वहां से संक्रामित व्यक्ति को लाकर के अमेठी लोकसभा के मुसाफिरखाना में रखा गया। ये बड़ा पाप है इसको अमेठी की जनता कभी माफ नही करेगी।'

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राजस्थान से आ रही बस की कैसे हुई एंट्री?

इतना ही नहीं जिले के मुखिया ने भी शासन में रिपोर्ट भेजी थी उसमें जिक्र किया था कि एक मई को जिले के इन्हौना बार्डर पर तैनात मजिस्ट्रेट ने सूचना दी थी कि अजमेर राजस्थान से एक बस आई। रुकवा कर चेकिंग की गई तो पाया गया कि ड्राइवर-क्लीनर तथा 28 और लोगों समेत 30 व्यक्ति सवार थे। इसमे 11 महिलाएं शामिल थीं। इनके पास जनपद अजमेर राजस्थान के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्गत वाहन पास उसके साथ संलग्न 29 सूचना पाई गई। लेकिन जिक्र किया कि इनके आने की सूचना राज्य और जिला प्रशासन को नहीं थी। बड़ा सवाल ये है के आखिर फिर राजस्थान से आ रही ये बस उत्तर प्रदेश के बार्डर और जिले के बार्डर में इंट्री कैसे पा गई जबकि शासन-प्रशासन को इसकी सूचना नही थी? क्या ये कदम किसी साजिश के तहत उठाया गया?

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बीजेपी और कांग्रेस की जुगलबंदी

वही 7 मई को 'श्रमिक स्पेशल ट्रेन' अहमदाबाद से अमेठी पहुंची। इस पर सवार होकर आए 1212 यात्रियों में 283 यात्री अमेठी के। जिन्हें बीजेपी के लोकसभा संयोजक राजेश अग्रहरि द्वारा खाना और पानी मुहैया कराया गया। जबकि कांग्रेस की ओर से एमएलसी दीपक सिंह ने डीएम को पत्र लिखकर अमेठी में आए लोगों को टिकट का पैसा दिलाने का लिए ब्यौरा मांगा। कुछ ही घंटे बाद स्वयं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर अमेठी और रायबरेली में आए श्रमिकों को किराए की रकम मुहैया कराने के लिए नंबर जारी किया गया। इससे साफ है कि बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी जुगलबंदी में हैं। अब 2022 में तय होगा कि किसको कितना लाभ मिला।

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