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जानिए क्या होता है लॉकडाउन, क्वारनटीन और आइसोलेशन के बीच अंतर

लॉकडाउन के दौरान सभी लोग इस वक्त अपने घरों में रह रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोगों का कहना है कि वे क्वारनटीन में हैं या वे आइसोलेशन में हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, अगर आप बिल्कुल स्वस्थ हैं और घरों में रहकर आराम कर रहे हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि आप आइसोलेट हैं या क्वारनटीन हैं।

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ShreyaBy Shreya

Published on 6 April 2020 11:07 AM GMT

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जानिए क्या होता है लॉकडाउन, क्वारनटीन और आइसोलेशन के बीच अंतर
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लखनऊ: 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश को 21 दिनों तक लॉकडाउन रखने की घोषणा की थी। जबसे कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा है, तब से मीडिया में आपको हर रोज तीन शब्द आसोलेशन, क्वारनटीन और लॉकडाउन सुनने और पढ़ने को मिलते हैं। इन टर्म को लेकर लोग काफी कन्फ्यूज भी है।

क्या है लॉकडाउन, क्वारनटीन और आइसोलेशन में अंतर?

लॉकडाउन के दौरान सभी लोग इस वक्त अपने घरों में रह रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोगों का कहना है कि वे क्वारनटीन में हैं या वे आइसोलेशन में हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, अगर आप बिल्कुल स्वस्थ हैं और घरों में रहकर आराम कर रहे हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि आप आइसोलेट हैं या क्वारनटीन हैं। बल्कि आप इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। तो चलिए आज हम आपको तीनों के बीच में अंतर बताते हैं।

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क्या है लॉकडाउन का मतलब?

सबसे पहले हम आपको लॉकडाउन का मतबलब बताते हैं। लॉकडाउन एक ऐसी आपातकालीन (Emergency) व्यवस्था है, जो सरकार द्वारा लागू की जाती है। लॉकडाउन किसी आपदा या फिर महामारी के चलते लगाई जाती है। लॉकडाउन के दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। लोगों को सिर्फ जरुरी सामान जैसे दवा और खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए ही बाहर निकलने की इजाजत होती है। इस दौरान वे बैंक से पैसे निकालने भी जा सकते हैं।

कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है, ऐसे में जरूरी है कि आप लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें। ऐसा करने से आप सोशल डिस्टेंसिंग भी फॉलो कर रहे हैं और जैसा कि बताया गया है कि कोरोना का संक्रमण छींकने या खांसने के दौरान निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से फैलता है। तो घरों में रहकर आप किसी भी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आएंगे और कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे।

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ये होता है क्वारनटीन

अब क्वारनटीन क्या है इसका मतलब जानते हैं। क्वारंटीन एक ऐसी व्यवस्था है जो ऐसे लोगों पर लागू होती है जो संक्रमित व्यक्त‍ि के संपर्क में आए होते हैं। ऐसे लोग जो किसी ऐसे देश या क्षेत्र से आए हैं जहां पर कोरोना का संक्रमण फैला हुआ है तो ऐसे लोगों को एक जगह पर बिल्कुल अलग रखा जाता है। ताकि उन लोगों में वायरस के लक्षणों पर नजर रखी जा सके और 14 दिनों के क्वारनटीन पीरियड के दौरान अगर उसमें लक्षण दिखते हैं तो उकसा इलाज किया जा सके। ऐसा करके दूसरे लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता है।

मान लीजिए अगर किसी व्यक्ति के परिवार का एक सदस्य या फिर बिल्डिंग में एक व्यक्ति कोरोना से पॉजिटिव पाया जाता है तो उसके परिवार के सदस्यों को और बिल्डिंग के लोगों को क्वारनटीन में रखा जाता है। इस दौरान उन्हें घर से बाहर निकलने की परमिशन नहीं होती है। 14 दिनों के क्वारनटीन पीरियड में वो किसी से भी 6 फीट की दूरी से बात कर सकते हैं और उन्हें इस दौरान मास्क का भी इस्तेमाल करना होता है। क्वारनटीन के दौरान सभी का ब्लड टेस्ट भी किया जाता है।

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सेल्फ क्वारनटीन ऐसे समझें

वहीं अगर सेल्फ क्वारनटीन की बात की जाए तो अगर आप ऐसे इलाके में हैं जहां संक्रमण फैला है, या फिर आप ऐसी जगह से यात्रा करके आएं हों, जहां पर कोरोना का संक्रमण फैला हो तो आप खुद को 14 दिनों तक एकदम अलग रहकर ये देखें कि आपमें वायरस के कोई लक्षण तो नहीं दिख रहे। इस दौरान आप अपने घर में ही रहें। इसके अलावा किसी के भी संपर्क में न आएं, न हीं बाहर जाएं। आस-पास अगर लोग हों तो उनसे कम से कम 3 से 6 फ़ीट की दूरी बनाए रखें।

आइसोलेशन का क्या है मतलब?

आइसोलेशन कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए होता है। जो व्यक्ति कोरोना से पॉजिटिव पाया जाता है, उस मरीज को सबसे अलग आइसोलेशन में रखा जाता है। वह व्यक्ति दूसरे लोगों से दूरी बनाकर रहता है। बहुत जरूरी काम होने पर ही कोई उस कमरे में जाता है। उनसे केवल मेडिकल प्रोफेशनल व्यक्ति ही इलाज के लिए मिलते हैं।

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