बड़े भूकंप का खतरा: दिल्ली को जापान से लेना चाहिए ये सबक, तभी बच पाएंगे

Delhi-NCR में बीते 12 अप्रैल से 29 मई के बीच दस भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वहीं बीते पांच दिनों में दिल्ली- NCR में तीन भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए हैं।

Published by Shreya Published: June 4, 2020 | 7:02 pm
Modified: June 4, 2020 | 9:22 pm

नई दिल्ली: Delhi-NCR में बीते 12 अप्रैल से 29 मई के बीच दस भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वहीं बीते पांच दिनों में दिल्ली- NCR में तीन भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए हैं। वहीं तीन जून की देर शाम दिल्ली से सटे नोएडा में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.2 दर्ज की गई।

आने वाले दिनों में बड़े भूकंप का खतरा

जानकारों का कहना है कि दिल्ली में आने वाले दिनों में बड़े भूकंप आ सकते हैं। तो ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि दिल्ली भूकंप के लिए कितनी तैयार है? दिल्ली को भूकंप से पहले क्या करना और क्या सीखना जरूरी है?

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दिल्ली पर मंडरा रहा बड़े भूकंप का खतरा?

हालांकि भूंकप आने का समय नहीं बताया गया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूंकप को लेकर जगह, समय और तीव्रता की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। लेकिन NCR क्षेत्र में जमीन के भीतर लगातार भूकंप की हरकतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि दिल्ली में बड़े भूकंप की आशंका है।

दिल्ली में कैसा है भूकंप का खतरा?

जानकारों का कहना है कि रिक्टर स्केल पर पांच से कम मैग्नीट्यूड के भूकंप से अगर संरचनाएं बहुंत खराब ना हों तो कोई खास नुकसान नहीं करता है। वहीं दूसरी ओर दिल्ली को भारत के भूकंप के नक्शे में जोन चार में रखा गया है। जोन चार और पांच में नुकसान की बड़ी आशंका वाले स्थानों को रखा गया है।

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दिल्ली में भूकंप से नहीं हुआ कोई बड़ा नुकसान

दिल्ली ने अपने इतिहास में वैसे तो कई सारे भूंकप के झटकों को झेला है, लेकिन एक या दो को छोड़कर दिल्ली में भूंकप से कभी बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि दिल्ली को भूकंप से कोई बड़ा खतरा नहीं है।

भूकंपों की आशंका के दायरे में ये इलाके

दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों को खतरनाक भूकंपों की आशंका के दायरे में रखा गया है। लेकिन अगर हिमालयी क्षेत्रों में बड़े भूकंप भी आएं तो दिल्ली अपनी भौगोलिक सेटिंग के चलते बड़े नुकसान से बच सकता है।

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दिल्ली को किन सवालों का ढूंढ़ना होगा हल?

क्या दिल्ली बड़े भूकंप के लिए तैयार है।

क्या भूंकप को लेकर बड़ी आबादी जागरूक है।

क्या दिल्ली के पास किसी आपदा के समय में पर्याप्त डेटा, ट्रेंड फोर्स और साधन हैं।

क्या बड़े भूकंप के खतरे को समझकर उसका कोई हल निकाला गया है।

दिल्ली में एक बड़ी समस्या ये भी है कि यहां पर बिल्डिंग्स के निर्माण ठीक नहीं है। भारतीय स्टैंडर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, इमारतों के निर्माण में गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया गया है।

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जापान ने भूकंप के सबसे ज्यादा झटके झेले हैं। जापान के पास सुनामी संबंधी भूकंप जैसी आपदाओं का भी अनुभव है। इसलिए दिल्ली के साथ-साथ पूरी दुनिया को जापान से सिखने के लिए बहुत कुछ है।

जापान से ये सबब लेने की दिल्ली को जरूरत

– जापान में कंस्ट्रक्शन कोड का सख्ती से पालन किया जाता है। प्रोफेसर घोष के मुताबिक, जापान में संरचनाओं का निर्माण इस हिसाब से किया गया है कि वो सात से आठ मैग्नीट्यूड तक का भूकंप झेल सके। भारतीय मौसम विभाग का भी मानना है कि मौजूदा बिल्डिंग कोड को उन्हें तत्काल बदले जाने की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार का पोर्टल का भी यही मानना है कि बड़े भूकंप के समय निर्माण की संरचनाएं जोखिम में रहेंगी।

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सूचनाओं को लेकर बरते सतर्कता

– सूचनाओं को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। नेतृत्व को समय पर विश्वसनीय और ईमानदार सूचनाएं देश को देनी चाहिए। फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के भूकंप के समय जापान को आलोचना इसीलिए झेलनी पड़ी थी कि वह नागरिकों को जल्दी और सटीक सूचनाएं नागरिकों को नहीं दे सका।

सभी को मिलकर करना चाहिए आपदा का सामना

– सरकारी विभागों, निजी सेवाओं और नागरिकों को मिलकर आपदा का सामना करना चाहिए। जापान इसके लिए कई बाद उदाहरण साबित हो चुका है। भूकंप जैसी बड़ी आपदाओं के समय भी वहां लूट या हत्याओं जैसी स्थिति कभी नहीं आई।

– आपदा प्रबंधन सिस्टम को बेहतर करना ही चाहिए। जापान में दो लाख से अधिक लोगों की शिक्षित फोर्स आपदा प्रबंधन के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में तो इससे कहीं ज़्यादा बड़ी फोर्स होनी चाहिए।

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