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भारत-पाकिस्‍तान सीमा पर हथियार की तरह काम करता है रेडियो

भारत के सूदूर क्षेत्रों में बैठकर या फिर खेत खलिहानों में काम करते समय किसान हों या मजूदर या फिर किसी और वर्ग के लोग। 'विविध भारती या फिर बीबीसी लंदन की हिंदी सेवा में आप का स्‍वागत है' जैसे कार्यक्रमों को कभी मिस नहीं करते थे।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 3 April 2020 9:25 AM GMT

भारत-पाकिस्‍तान सीमा पर हथियार की तरह काम करता है रेडियो
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दुर्गेश पार्थसारथी

अमृतसर: डीजिटल क्रांति के युग ने एक तरह से मनोरंजन के पुराने साधनों को लगभग समाप्‍त सा कर दिया है। इनमें ग्रामोफोन से लेकर टीवी और टेपरिकॉर्डर भी शामिल हैं। यही नहीं रेडियो भी इससे अछूता नहीं है। भारत के सूदूर क्षेत्रों में बैठकर या फिर खेत खलिहानों में काम करते समय किसान हों या मजूदर या फिर किसी और वर्ग के लोग। 'विविध भारती या फिर बीबीसी लंदन की हिंदी सेवा में आप का स्‍वागत है' जैसे कार्यक्रमों को कभी मिस नहीं करते थे। लेकिन आज मुफलिसी में जी रही रेडियो भारत-पाकिस्‍तान के बीच वाकयुद्ध में किसी हथियार से कम नहीं है।

लाहौर रेडियो के जरिए पाकिस्‍तान सरहदी क्षेत्रों में करता है दुष्‍प्रचार

पाकिस्‍तान से लगते पंजाब के सरहदी क्षेत्रों में लाहौर रेडियो भारत के खिलाफ दुष्‍प्रचार करने से बाज नहीं आता। कारण आजादी के बाद से इस क्षेत्र में रेडियो के ट्रांसमिटर नहीं हैं। इसका फायदा उठाते हुए पाकिस्‍तान के लाहौर रेडियो से होने वाला प्रसारण पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्‍का और फिरोजपुर तक के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुना जाता है। लाहौर रेडियो पर होने वाले पंजाबी भाषा के प्रसारणों से भारत के खिलाफ प्रोपगंडा फैलाया जाता है। क्‍योंकि दोनों देशों के सरहदी क्षेत्रों की भाषा पंजाबी होने के कारण पाकिस्‍तान लाभ उठाना चाहता है।

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रात में रेडियो पेशावर और इस्‍लामाबाद प्रसारण साफ सुनाई देता है

यही नहीं पंजाब के सरहदी इलाकों अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और फिरोजपुर में लाहौर से होने वाले रेडियो प्रसारण तो दिन में भी साफ सुना जाता है। लेकिन रात में लाहौर के अलावा पेशावर और इस्लामाबाद से प्रसारित होने वाली खबरों को भी साफ सुना जाता है। चूंकि पाकिस्तान हमेशा ही रेडियो के जरिए पंजाब और जम्मू कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ कुप्रचार करता रहता है।

पाकिस्‍तानी रेडियो को जवाब दे रहा है प्रसार भारती

पाकिस्तान द्वारा रेडियो के जरिए भारत के खिलाफ किए जा रहे दुष्‍प्रचार को रोकने के लिए प्रसार भारती ने अटारी बॉर्डर के पास अपना एफएम रेडियो शुरू किया है। इसका मुख्य मकसद पाक की भारत के खिलाफ प्रसारित खबरों की हकीकत से सरहद के पार तक के लोगों को रूबरू करवाना है। इसलिए इसको नाम दिया गया है 'देश पंजाब'। इसके साथ ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर और फाजिल्का में भी रेडियो स्टेशन स्थापित किए हैं।

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पाकिस्‍तान के लाहौर से मुल्‍तान तक जवाब दे रहा है भारतीय रेडियो

पाकिस्‍तानी रेडियो के दुष्‍प्रचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने अमृतसर जिले के अटारी बॉर्डर से 5 किमी पहले कस्‍बा घरिंडा में रेडियो का टावर लगा करके ट्रांसमीटर स्थापित किया गया है। करीब साढ़े चार करोड़ की लागत से स्‍थापित हुए ट्रांसमीटर से किया जाने वाला भारतीय प्रसारण पाकिस्तान के लाहौर, सियालकोट, मुलतान और गुजरांवाला के दूर-दराज के गांवों तक सुनाई दे रहा है। अब पाकिस्‍तान के लोग भी 'ये आकाश वाणी है' सुन रहे हैं।

103.6 नंबर चलता है सरहद पर लगा ट्रांसमीटर

भारत पाकिस्‍तान सीमा पर लगा देश का पहला रेडियो स्‍टेशन रेडियो तरंग 103.6 नंबर पर चलता है। भारतीय इतिहास में शायद यह पहला ट्रांसमीटर है जो किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा के सब से करीब है। यह प्रतिदिन सुबह 6 से रात 12 बजे तक चालू रहता है। इस स्टेशन के जरिए पंजाबी के साथ-साथ उर्दू में भी प्रसारण होता है। इसमें पाकिस्तान की तरफ से भारत विरोधी प्रोपगंडे का काउंटर किया जाता है। इसके साथ ही भारत सरकार की नई नीतियों, आविष्‍कारों और खेती किसानी के संबंध में भी जानकारी दी जाती है। यदि भारतीय क्षेत्र की बात करें तो इनको अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर, पठानकोट और जम्मू कश्मीर के कठुआ जिलों सुना जा सकता है।

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