महामारी से जंग में अपनी सुरक्षा अपने हाथ

लंबे लॉक डाउन के बाद अब बाजार आदि खुलने लगे हैं। लोगों का बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ है। लेकिन कोरोना के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना और खुलापन, ये बहुत बड़ी चुनौती है हम सबकी सुरक्षा के लिए।

Published by suman Published: May 22, 2020 | 11:20 pm

 संदीप पाल

लखनऊ लंबे लॉक डाउन के बाद अब बाजार आदि खुलने लगे हैं। लोगों का बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ है। लेकिन कोरोना के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना और खुलापन, ये बहुत बड़ी चुनौती है हम सबकी सुरक्षा के लिए। ऐसे में क्या सोचते हैं लोग और क्या है उनके मन में। ‘अपना भारत’ ने समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से उनके विचार जाने।

 

 

सरकार को जो करना था वो कर दिया

अभिषेक सिंह (व्यवसायी, बलरामपुर)

जीवन को पटरी पर लाने के लिये बाजारों का खोला जाना अति आवश्यक है। देश में कोरोड़ों लोगों का भविष्य उनके व्यापार एवं उनके द्वारा किये जाने वाले व्यक्तिगत परिश्रम पर निर्भर है।

रोजाना दो जून की रोजी-रोटी जुटाने वालों के लिये बाजारों का खुलाना किसी तोहफे से कम नहीं है। आखिकार सरकार कब तक इन बाजारों को बंद रखती। सरकार को जो करना था और जो लोगों को सिखाना था वह सिखा व समझा चुकी है। अब जनता की बारी है कि वह कैसे जिये। सरकार ने आपको जीने की राह दिखा दी है। अब आपकी मर्जी।

 

अपने हो गए पराये

अफजाल (प्रॉपर्टी डीलर, लखनऊ)

सबसे बड़ा मसला मजदूरों का है। जिनकी मेहनत से मुम्बई, दिल्ली जैसे महानगरों में तमाम बिल्डिंगे बनीं और सैकड़ों फैक्टरियां चल रही थीं। आज वह शहर उनके लिये पराये हो चले। चुनाव में अपने पैसे से अपने अपने राज्यों में पहुंच कर जिसने वोट देने का काम किया आज वह सड़कों पर भूखा और पैदल है। वह नेता जो अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिये इनके आगे हाथ जोड़ते थे। उन्होंने भी मुंह फेर लिया है। हमें जो कहानी दिखाई व सुनाई जा रही है वह हकीकत से कोसों दूर है।

 

अब जनता की बारी

कान्ता सिंह (पूर्व प्रधानाचार्या, लखनऊ)

सरकार द्वारा संस्थानों को सशर्त खोले जाने का हम स्वागत करते हैं और सरकार को भी धन्यवाद देते हैं कि उसने अपनी तरफ से लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाने की कोशिश की और उसमें उसे सफलता भी हासिल हुई। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। अब हमारी बारी है। सड़कों पर छाया सन्नाटा खत्म हुआ और बाजारों में भी रौनक की आहट मिलने लगी है। हम सभी को बहुत सावधान रहने की जरूरत है।

 

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खतरे में डालने वालों पर कार्रवाई हो

शिवम सिंह (छात्र, लखनऊ)

अब बाजार भी खुलने लगे हैं जो बहुत अच्छी बात है। लेकिन देश की जनता को खतरे में डालने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मामले के पीछे खास तबके के लोगों को दोषी ठहराया जाये तो यह गलत नहीं होगा। कुछ नसमझ लोगों ने केन्द्र व राज्य  सरकारों की मेहनत पर पानी फेर फेरने का काम किया है।  उनकी  इस कारगुजारी का खामियाजा देश में सभी समुदाय को भी भुगतना पड़ रहा है।   अब समय आ गया है कि देश की सरकार को कुछ ऐसे कड़े नियम बनाने चाहिए जिससे किसी भी वर्ग का व्यक्ति विकास में रोड़ा न बन सके।

प्रकृति और मनुष्यों को मिला ब्रेक

शिल्पा यादव (एनसीसी कैडेट)

बाकी प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश काफी बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। यह लॉकडाउन सिर्फ मनुष्य प्रजाति को ही नहीं बल्कि हमारी धरती को भी एक अति आवश्यक ब्रेक देने का काम कर रहा है । फ़िलहाल हम सभी को एक अच्छे नागरिक होने का परिचय देना चाहिए – लॉकडॉउन का पालन करें, सावधानी बरतें, केयर वर्कर्स का दिल से सम्मान करें और इस समय का इस्तेमाल करें अपनी और अपने लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाएँ। भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ केयर सेक्टर में निवेश बढ़ाया जाए। पब्लिक हेल्थ केयर सिस्टम को और मजबूत करना और पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा इसी तरह कम रहे इस पर काम करने की ज़रुरत है।

 

सही लोगों को मिले मदद

मनोज रंजन दीक्षित (लखनऊ)

सरकार कोरोना संकटकाल में लोगों की मदद कर रही है, लेकिन क्या वो मदद जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रही है? ये कौन सुनिश्चित करेगा? मेरे संज्ञान में ऐसे परिवार हैं जिनको आधार कार्ड तक न बनवा सकने के कारण कोई मदद नहीं मिली है। इसके अलावा जितनी मदद सरकार कर रही है क्या उतने में लोग अपने घर का खर्च उठा लेंगे ये भी बड़ा सवाल है। कोरोनावायरस से यदि लड़ना चाहते हैं तो मुहल्ले गांव, पुलिस के देशभक्त लोगों की कमेटी बना कर उनके ऊपर कोरोनावायरस से सुरक्षा की जिम्मेदारी डालें। वरना तो सारे राजनीतिक दल और संस्थायें फोटो खिंचवा कर लोगों को मूर्ख बना ही रहे हैं

 

हम जरूर सफल होंगे

प्रेम शंकर त्रिपाठी (ज्योतिषाचार्य, लखनऊ)

हमारा आत्म विश्वास ही हमारी सफलता की कुंजी है। यह मंत्र की कोरोना महामारी पर हमारी जीत तय कर सकता है। यदि हम अपने आप पर संयम रखते हुये कोरोना को दूर रखने के सभी जरूरी उपायों को अपनाते हैं तो एक दिन निश्चय ही हम इसे हराने में सफल होंगे। कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में अन्य प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश काफी बेहतर स्थिति में है। जिस प्रकार से कोरोना के विरूद्ध हमसब एकजुट होकर लड़ रहे है ठीक इसी प्रकार अपनी मेहनत से प्रदेश को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत लगानी होगी।

 

कई सबक सिखाये महामारी ने

अखिलेश सिंह (व्यवसायी, वाराणसी)

कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने कई सबक सीखे हैं। देश के लोग स्वच्छता के मायने बहुत ही जल्द समझ गये जिसे समझाने के लिये केन्द्र सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिये थे। अब लॉकडाउन से थोड़ी राहत दी गई और जिंदगी समान्य होने की तरफ आगे बढ़ रही है। लोग नई उम्मीद के साथ अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। अब हम लोगों पर बड़ी जिम्मेदारी है कि संकट की घड़ी में सरकार का पूरा सहयोग करें क्योंकि संकट अभी टला नहीं है। सावधानी के साथ घरों से बाहर निकलें। हमें हाथ बढ़ाने के बजाय हाथ जोड़ने और सोशल डिस्टेसिंग की जरूरत है।

 

 

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बहुत बीमारियाँ झेलीं हैं,आगे भी झेलेंगे

अजय पाल (नौकरीपेशा, अमेठी)

कोरोना फोरोना कछु नहीं भैया। अईसा पहली बार थोड़िन है। बर्ड फ्लू, चिकन गुनिया, हैजा, कालरा, चेचक, स्वाइन फ्लू न जाने ऐसी कितनी अनगिनत बीमारियों का सामना कीहिन है और आगे भी कर रहे हैं। मनुष्य के जीवन में ऐसी तमाम बीमारी आती और जाती रहेंगी। इससे डरय के बजाई, धैर्य के साथ इ कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ई के लिये उठ खड़ई हो होने का समय है। हिम्मत है तब तो ठीक है। आपन सुरक्षा खुदही करेक पड़ी। कोरोना से मरने वालों की संख्या से बिल्कुल भी घबड़ाने की जरूरत नहीं है। इससे ज्यादा लोग तो एक सप्ताह में रोड एक्सिडेंट में मर जाया करते है। तब क्या हम घरों में बैठे रहे। सड़क पर नाही चलें। कहते है कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। यही बात कोरोना पर भी लागू होत है। जईसे अन्य तमाम बीमारियन में बचाव करते हैं। याहु में करऊ।

 

अपनी अक्ल लगाओ

मीनाक्षी श्रावणी (टीचर, लखनऊ)

मैं तो कहती हूँ कि अपनी अक्ल लगाओ, दूसरों के कहने में मत आओ। जीवन बहुमूल्य है और कोविड-19 के बारे में दी जा रही चेतावनी को नजर अंदाज न करें और नियमों का पालन करते हुये अपने और अपने परिजनों को सुरक्षित रखें। आपके परिवार की सुरक्षा आपका दायित्व है। दूसरों के कहने में आकर नियमों की अनदेखी न करें। यह आपके जीवन पर भारी पड़ सकती है। खतरा अभी टला नहीं है। आपकी जरा सी लापरवाही से आपका पूरा परिवार संकट पड़ सकता है।ए क अच्छे नागरिक का परिचय देते हुये कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सहयोग दें और देश कोविड-19 से मुक्त कराने में अपना सहयोग दें।

 

इम्यूनिटी ही बचाएगी

अरूप श्रीवास्तव (नौकरीपेशा, लखनऊ)

कोरोना के विरूद्ध जारी जंग में आपकी इम्युनिटी ही कोरोना को हराने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसे बढ़ाते रहें और अपनी इम्युनिटी को इस जंग में कमजोर कड़ी नहीं बनने दें। नियमित व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें साथ ही खुश रहें। सतर्कता के नियमों को अपने जीवन का हिस्सा बना लें। यह जंग अभी लम्बी है और हमें अपने आपको इसके लिए मानसिक रूप से मजबूत कर लेना चाहिए। लोगों द्वारा की जा रही गलतियों से भी हमें सबक लेते रहना होगा और साथ ही साथ लोगों को भी जागरूक करना होगा। जागरूक लोगों की चेन जितनी लम्बी होगी यह जंग हमारे लिए उतनी ही आसान होगी।

 

 

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हिम्मत से काम लें

विवेक बाजपेयी (व्यवसायी, बाराबंकी)

अगर आपमें हिम्मत है तो आप बड़े से बड़े काम बहुत ही आसानी से कर लेंगे। इतिहास में भी पढ़ने को मिलता है कि छोटी सेना भी बड़े से बड़े दुश्मन को परास्त कर देती है। यह सब सिर्फ होशियारी, हिम्मत और हौसले की बदौलत ही सम्भव होता है। कोरोना वायरस एक अदृश्य दुश्मन है। वह एक छोटे से यूरोपीय देश से वह हार गया। उस देश के लोगों ने अपने सेनापति की बात को मानते हुये उनका सहयोग किया और बुलन्द हौसले से कोरोना से मोर्चा लिया और उस पर जीत दर्ज की। हमें भी अपने सेनापति नरेन्द्र मोदी की अपील का सम्मान करते हुये कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में उनका सहयोग मजबूती के साथ देना चाहिए।

 

अच्छा हुआ बाजार खुल गए

अंशुमन मुखर्जी (ताइक्वांडो टीचर, लखनऊ)

लगभग दो माह के लॉकडाउन के बाद राजधानी में बाजारों का खुलना अच्छी बात है। घरों में रह कर जीवन यापन नहीं किया जा सकता है। जिनको सरकार के दान के 500 या 2000 रुपये मिले होंगे उनका भी इससे कुछ भला नहीं होने वाला है। आज गैस सेलेण्डर ही 500 रुपये में नहीं आता है। लोगों को काम और रोजगार की दरकार है। अब हमें कोरोना को अपने जीवन को हिस्सा बना कर इसका सामना करने को हमेशा तैयार रहना होगा। वैक्सीन आ जाने के बाद भी क्या गारन्टी है कि हम कोरोना की चपेट में नहीं आयेंगे। हमें अपनी हेल्थ के प्रति जागरूक रहना होगा तभी हम सुरक्षित रहेंगे।