CDS

भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर चल रही तनातनी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सीडीएस, आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयरफोर्स चीफ के साथ बैठक की है।

भारत में कोरोना संकट के बीच रक्षा विभाग भी अपने स्तर पर एक्टीव है। लॉकडाउन में दिन रात वायरस को खत्म करने और संक्रमितों को बचाने में जुटे कोरोना योद्धाओं को सेना शुक्रिया करने के लिए तीन मई विशेष गतिविधियां करेगी।

भारत सरकार ने पूरी तरह से लॉकडाउन किया है। इसके बावजूद देश में लगातार बढ़ती कोरोना वायरस के केस की संख्या चिंता बढ़ा रही है। इस बीच आज एक बार फिर स्वास्थ्य के मुद्दे पर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक होगी। इस बैठक की अगुवाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन करेंगे।

देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बनते ही कहा कि भविष्य में देश में थिएटर कमांड्स (Theater Commands) बनाए जाएंगे ताकि युद्ध के दौरान दुश्मन की हालत खस्ता करने के लिए रणनीति आसानी से बन सके।

जनरल बिपिन रावत को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद ग्रहण किये अभी एक ही दिन हुए हैं, लेकिन उनका नाम विवादों से जुड़ना शुरू हो गया है। दरअसल सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम से एक विवादित चिट्ठी वायरल हो रही है। इस चिट्ठी में उनके हस्ताक्षर हैं।

सीडीएस ‘फोर स्टार जनरल’ होंगे जिनका वेतन सर्विस चीफ (आर्मी चीफ, नेवी चीफ, एयरफोर्स चीफ) के बराबर होगा। पहले इसे पांच स्टार देने पर विचार हो रहा था। लेकिन फील्ड मार्शल को ही पांच स्टार मिलता है। ऐसा होने से सीडीएस का पद प्रिंसिपल सेक्रेटरी से भी ऊपर हो जाता। यानी सीडीएस वस्तुत: फील्ड मार्शल से नीचे का पद है।

जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे पहले सेना ने आज रक्षा मंत्रालय (साउथ ब्लॉक) में उनको गार्ड ऑफ आनर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) की नियुक्ति पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस ने सीडीएस के तौर पर जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति पर कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वैचारिक झुकाव की वजह से ही बिपिन रावत को सरकार ने सीडीएस नियुक्त किया है।

तीन साल के कार्यकाल के बाद जनरल बिपिन रावत आज सेना प्रमुख के पद से रिटायर हो गए हैं। बिपिन रावत ने आज अपने कार्यकाल के आखिरी दिन दिल्ली में वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

अभी थल सेना, नौ सेना और वायु सेना अपने अपने स्वतंत्र कमांड के अधीन काम करता है। हालांकि इनको एकीकृत किए जाने पर ज़ोर दिया जाता रहा लेकिन हर सेना अपनी योजना और अभ्यास के लिए अपने अपने मुख्यालयों के अधीन काम करती है।