LockDown effect

कुछ चुनिंदा सेक्टर को छोड़ दें तो गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) और इंडस्ट्रीयल एरिया की फैक्ट्रियों जैसे तैसे चल रही हैं।

देश में पिछले दो महीने से लागू लॉकडाउन के चलते प्रकृति के कुछ नायाब नज़ारे सामने आ रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से एक ओर जहां पर्यावरण बिलकुल साफ हो गया।

सार्वधिक निर्यात उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से होता है, क्रिसमय 2020 के लिए ऑर्डर की सप्लाई अगस्त सितंबर तक की जानी है लेकिन यूरोप, अमेरिका, यूके समेत तमाम देशों से कोरोना की चपेट में आने से 15000 करोड़ रुपये का मिला ऑर्डर सप्लाई में लटक गया है।

लॉकडाउन के कारण देश और प्रदेश की जनता घरों में बैठी है जिनका खाली समय मोबाईल, टीवी से ही गुजर रहा है तो जाहिर सी बात है कि इंटरनेट का बहुत बड़े स्तर पर उपभोग हो रहा है।

लॉकडाउन के कारण गरीब भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। बिहार में लॉकडाउन के कारण 3 दिनों से अनाथ बहनें भूखी थीं, वहीँ औरतों ने कुत्ते के मुंह से रोटी छीन ली।

21 दिन के लॉकडाउन की वजह से कई लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया। सरकार लोगों की समस्याओ के समाधान में लगी हुई है लेकिन राशन की जरूरत एक राज्य में इस कदर लोगों पर हावी हो गयी कि नजारा बेहद उग्र देखने को मिला।

कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए यूपी व दिल्ली दोनों में लाॅकडाउन कर दिया गया। यह लॉकडाउन सुबह 6 बजे से शुरू हो गया है। इसकी जानकारी होने के बाद भी जारी गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।