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छठ पूजा के दौरान बिहार के समस्तीपुर में रविवार सुबह भयानक हादसा हो गया। ये हादसा समस्तीपुर के हसनपुर में छठ पर्व के दौरान तालाब में मंदिर की दीवार गिरने से हुआ। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई।

बाबा से पहले ही देवी अन्नपूर्णा विराजमान थीं। साल 1775 में काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तब देवी अन्नपूर्णा का मंदिर था। मां की स्वर्णमयी प्रतिमा की प्राचीनता का उल्लेख भीष्म पुराण में भी है। यहां के पूजारी के अनुसार, 1601 में मंदिर के महंत केशवपुरी के समय में भी प्रतिमा का पूजन हो रहा था।

छठ पर्व को सबसे ज्‍यादा बिहार में मनाया जाता है। बिहार में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जो धार्मिक स्नान की वजह से ही प्रसिद्ध हैं।

धर्म और आस्था के नाम पर लोग लाखों खर्च कर देते है। ऐसे कुछ निकले ना निकले, लेकिन भगवान के नाम पर हजारों खर्च निकाल देते है। भगवान से जुड़ा कोई चमत्कार हो जाए तो लोगों की आस्था और भी जुड़ जाती है।

यूपी के बरेली जिले से नवरात्रि के पहले दिन एक ऐसी खबर आई है। जिसने नारी सशक्तिकरण और जातीय भेदभाव पर चलाए जा रहे तमाम जागरुकता कार्यक्रमों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए है।

देवाधिदेव शंकर के इस अपमान से लज्जित होकर गौरा देवी इस यज्ञ के दौरान सती हो गई थी और भगवान शंकर उनके पार्थिव शरीर को ही गोद में उठा कर तीनों लोकों का भ्रमण कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने भगवान शंकर का मां गौरी से ध्यान हटाने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से मां गौरी के पार्थिव शरीर के टुकड़े कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर की आय में इस समय तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। मंदिर की आय भक्तों के चढ़ावे से बढ़ रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर की आय करोड़ रुपए प्रतिमाह हो गई जिसने पिछले रिकाॅर्ड को तोड़ दिए हैं।

अक्सर लोग शादी को लेकर उलझन में रहते है कि शादी करें या ना करें। अगर करें भी तो कैसी शादी करें। ज्यादातर लोगों की चाहत लव मैरिज शादी की होती है। प्रेम एक खूबसूरत अनुभूति है। जब दो दिल एक होना चाहते हैं तो समाज बीच में आता है और अड़चने पैदा होने लगती है।

देवों के देव महादेव देवताओं में सबसे श्रेष्ठ हैं। जब भगवान शिव की पूजा की जाती है तो विधि-विधान का बहुत ख्याल रखना पड़ता है। समस्त जगत के प्राणी शिव की पूजा सावधानी के साथ करते हैं, लेकिन क्या अविवाहित लड़कियों को शिव की पूजा करनी चाहिए।

लाहौर: पाकिस्तान के सियालकोट में 1,000 साल पुराना हिंदू मंदिर बंटवारे के बाद पहली बार ‘पूजा के लिए खोला गया। स्थानीय लोगों की मांग के बाद इसे खोला गया है। इस मंदिर का नाम शवाला तेजा सिंह मंदिर है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों की देखरेख करने वाली इवेक्यू ट्रस्ट पॉपर्टी बोर्ड ने स्थानीय …