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देवाधिदेव शंकर के इस अपमान से लज्जित होकर गौरा देवी इस यज्ञ के दौरान सती हो गई थी और भगवान शंकर उनके पार्थिव शरीर को ही गोद में उठा कर तीनों लोकों का भ्रमण कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने भगवान शंकर का मां गौरी से ध्यान हटाने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से मां गौरी के पार्थिव शरीर के टुकड़े कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर की आय में इस समय तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। मंदिर की आय भक्तों के चढ़ावे से बढ़ रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर की आय करोड़ रुपए प्रतिमाह हो गई जिसने पिछले रिकाॅर्ड को तोड़ दिए हैं।

अक्सर लोग शादी को लेकर उलझन में रहते है कि शादी करें या ना करें। अगर करें भी तो कैसी शादी करें। ज्यादातर लोगों की चाहत लव मैरिज शादी की होती है। प्रेम एक खूबसूरत अनुभूति है। जब दो दिल एक होना चाहते हैं तो समाज बीच में आता है और अड़चने पैदा होने लगती है।

देवों के देव महादेव देवताओं में सबसे श्रेष्ठ हैं। जब भगवान शिव की पूजा की जाती है तो विधि-विधान का बहुत ख्याल रखना पड़ता है। समस्त जगत के प्राणी शिव की पूजा सावधानी के साथ करते हैं, लेकिन क्या अविवाहित लड़कियों को शिव की पूजा करनी चाहिए।

लाहौर: पाकिस्तान के सियालकोट में 1,000 साल पुराना हिंदू मंदिर बंटवारे के बाद पहली बार ‘पूजा के लिए खोला गया। स्थानीय लोगों की मांग के बाद इसे खोला गया है। इस मंदिर का नाम शवाला तेजा सिंह मंदिर है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों की देखरेख करने वाली इवेक्यू ट्रस्ट पॉपर्टी बोर्ड ने स्थानीय …

सावन शुरु हो चुका है और पूरा माहौल शिवमय है। हर तरफ बम भोल के नारे गुंजायमान है। लोग इस मास शिव की पूजा, व्रत  करते हैं मंदिर जाते है। जो लोग भगवान को मानते हैं उनमें विश्वास करते हैं, वे मंदिर जाने के महत्व को जानते हैं। कहते हैं कि मंदिर जाने से ना केवल नकारत्मक शक्तियां दूर रहती हैं बल्कि मन की शांति बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

लोगों का मानना है कि जो लोग सच्चे मन से पूजा अर्चना और जलाभिषेक करते हैं उनका हर मनोकामना पूर्ण होता है सावन के महीने में पूर्वांचल के लगभग सभी जिले के लोग यहां आकर जलाभिषेक करते हैं यहीं आकर राजा दशरथ खेलते थे शिकार पुराणो के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ यहां जल मार्ग से आकर शिकार करते थे।

यहां बनाया जाने वाला हर पकवान हिंदू धर्म पुस्तकों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ के लिए तैयार किया गया भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। भोग में किसी भी रूप में प्याज और लहसुन का भी प्रयोग नहीं किया जाता। भोग बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है।

जिन लोगों का विवाह नहीं हो रहा हो या विवाह में विलंब हो रहा हो, उनको अच्छे जीवनसाथी के लिए माता कात्यायनी के इस मंत्र का जप  करना चाहिए, जैसे द्वापर युग में श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोकुल की गोपियों ने इस मंत्र का जप किया था।

जयपुर: लकवे के बारे में कहा जाता है कि यह बीमारी बमुश्किल ठीक होती है। सालों तक लंबा इलाज करवाने के बाद भी ज्यादातर लोग इस बीमारी से छुटकारा नहीं पाते। राजस्थान के एक ऐसे मंदिर के बारे में कहा जाता है कि वहां जाने से लोगों का लकवा भी ठीक हो जाता है।यह मंदिर …