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हैंस क्रिश्चियन ग्रैम की 166वीं जयंती आज, माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में किया था कमाल

हैंस ने माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में काफी काम किया। उनकी 85 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद ग्रैम स्टेनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसे आज भी बायोल़ॉजी के स्टूडेंट प्रयोगशाला में एक्सपेरिमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं।

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 13 Sep 2019 4:00 AM GMT

हैंस क्रिश्चियन ग्रैम की 166वीं जयंती आज, माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में किया था कमाल
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हैंस क्रिश्चियन ग्रैम
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नई दिल्ली : मशहूर माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैंस क्रिश्चियन ग्रैम की आज 166वीं जयंती है। ऐसे में आज गूगल ने डूडल के जरिये उनको श्रद्धांजलि अर्पित की है। हैंस क्रिश्चियन जोअशिम ग्रैम एक डेनिश जीवाणु वैज्ञानिक थे। माइक्रोबायोलॉजी के ग्राउंडब्रेकिंग खोज की तकनीक का श्रेय भी हैंस क्रिश्चियन ग्रैम को जाता है।

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1884 में हैंस ने बैक्टीरिया से जुड़े फैक्ट्स और तकनीक की खोज कर ली थी। हैंस ने माइक्रोस्कोप से बैक्टीरिया का पता लगाने वाली खास तकनीक की खोज कर ली थी। 13 सितंबर 1853 को कोपेनहेगन की राजधानी दानिश में जन्मे हैंस पहले तो महज एक लोकल सिविक हॉस्पिटल में जनरल फिजिशियन थे।

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उन्होंने यही से अपने करियर की शुरूआत की थी। नेमसेक स्टेनिंग तकनीक माइक्रोबायोलॉजी में हैंस ने सबसे बड़ी खोज की थी। अब इस तकनीक की मदद से स्टेन मैथड के जरिए बैक्टीरिया का पता लगाने की कोशिश की जाती है। एक पर्पल मोटी परत बैक्टीरिया के उपर होती है, जिसको ग्रैम पॉजीटिव कहा जाता है। वहीं, पतली परत वाले बैक्टीरिया को ग्रैम नेगेटिव कहा जाता है।

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हैंस ने माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में काफी काम किया। उनकी 85 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद ग्रैम स्टेनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसे आज भी बायोल़ॉजी के स्टूडेंट प्रयोगशाला में एक्सपेरिमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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