यूपी में शुरू होगी कन्या सुमंगल योजना, विधानसभा में सीएम योगी ने किए ये बड़े ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार कन्याओं की सबलता के लिए अगस्त से कन्या सुमंगल योजना शुरू करने जा रही है। इसमें कन्या के पैदा होन से लेकर इंटर पास होने तक 15 हजार रूपए अलग-अलग चरणों में दिए जाएंगे।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार कन्याओं की सबलता के लिए अगस्त से कन्या सुमंगल योजना शुरू करने जा रही है। इसमें कन्या के पैदा होन से लेकर इंटर पास होने तक 15 हजार रूपए अलग-अलग चरणों में दिए जाएंगे। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि पर्यटन का बढ़ावा देने के लिए यूपी की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पर्यटन को विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने सभी सदस्य से कहा कि वह प्रस्ताव तैयार कर सरकार को उपलब्ध कराएं। सीएम ने कहा कि अगस्त 2020 तक पूर्वाचल एक्सप्रेस-वे को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

‘यूपी में दो साल में एक लाख 16 हजार करोड़ का हुआ निवेश’

मुख्यमंत्री विधानसभा में बुधवार को अनुपूरक बजट पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ने विकास की लाज को बचाया है। झूठे वायदों, नारों, प्रदर्शन, गठबंधन को नकाराते हुए जनता ने लोकलाज से लोकतंत्र को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दो साल में एक लाख 16 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। इसी 28 जुलाई को 65 हजार करोड की योजनाओं का शुभारंभ होगा। प्रदेश में अब तक 28 लाख लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 23 करोड़ जनता के साथ ही प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाने के लिए किसी भी तरह की धन की कमी आड़े नहीं आएगी। प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाने के लिए हमारी सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वह इसमें सहयोग करें जिससे देश में प्रदेश अपना वह स्थान प्राप्त कर सके जिसकी अपेक्षा देश उप्र से कर रहा है।

‘गोवंश की रक्षा के लिए ठोस प्रयास किए’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही गोवंश की रक्षा के लिए ठोस प्रयास किए हैं। राज्य में दिनों दिन कम होती डेयरी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए न सिर्फ काम शुरू हुआ है बल्कि अच्छे परिणाम नजर आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग के बढ़ावे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास की उम्मीद जागी है। पूर्व सरकारों की कार्यकाल की अपेक्षा हमारी सरकार में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है यह बात प्रदेश ही नहीं अप्रवासी भारतीयों ने भी महसूस की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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‘अपराधों में आई है कमी’

सीएम ने कहा कि प्रदेश के सात जिलों में जहां पुलिस लाइन नहीं थी वहां पुलिस लाइन निर्माण का काम शुरू करने की प्रक्रिया चालू है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चार जिलों में जहां महिला थाने नहीं थे वहां पर महिला थानों के निर्माण के लिए मंजूरी दे दी गई है। प्रदेश में अपराधों पर कमी आई है। लूट, हत्या, डकैती, बलात्कार, बलवा जैसी घटनाओं में कमी आई है। अन्य प्रकार के अपराधों में 30 से 35 प्रतिशत की कमी आई है। सीएम ने कहा कि पुलिस कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए 35 हजार से अधिक प्रमोशन किया है। इस प्रक्रिया को और गति देने के लिए एक आयोग का गठन किया है। प्रदेश के थानों में सीसीटीवी लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए अब तक एक अरब से अधिक मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है। इससे पहले प्रश्न काल के दौरान सरकार ने सदन में कहा कि वर्ष 2018 में तथा इस वर्ष 2019 में 5 अप्रैल 2019 तक नकली एवं अवैध शराब पकड़े जाने की कुल 40,458 घटनायें घटित हुई तथा इसमें संलिप्‍त 15,383 लोगों के विरूद्ध आबकारी अधिनियम एवं आई.पी.सी. की सुसंगत धाराओं के अन्‍तर्गत कार्यवाही की गयी।

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आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अवैध कच्‍ची शराब के निर्माण सहित अन्‍य समस्‍त प्रकार के आबकारी अपराधों को समाप्‍त करने के लिए आबकारी विभाग में जनपद स्‍तर पर अपराध निरोधक क्षेत्रों सहित मण्‍डल स्‍तर पर प्रवर्तन दल व एसएसएफ की इकाई स्‍थापित है, जिनमें तैनात आबकारी स्‍टाफ सहित पुलिस विभाग का स्‍टाफ निरन्‍तर आबकारी अपराधों का समूल नाश करने के लिए कार्यवाही कर रहा है। उक्‍त के अतिरिक्‍त आवश्‍यकता आकस्मिक रूप से भी विशेष प्रवर्तन अभियान आबकारी विभाग द्वारा चलाये जाते हैं। इन प्रवर्तन अभियानों को प्रभावी बनाये जाने के लिए आवश्‍यकता पुलिस तथा स्‍थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया जाता है।

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उक्‍त के अतिरिक्‍त मुख्‍यालय स्‍तर पर स्‍थापित ईआईबी के उप आबकारी आयुक्‍त, सहायक आबकारी आयुक्‍त एवं आबकारी निरीक्षक भी उच्‍च स्‍तर से प्राप्‍त निर्देशों पर छापे डालते हैं। अवैध शराब से होने वाली जनहानि एवं राजस्‍व की क्षति पर कड़ाई से नियंत्रण करने के लिए उप्र आबकारी अधिनियम 1910 (यथा संशोधित 2018) के दण्‍डक प्रावधानों को और कड़ा करते हुए जुर्माने की धनराशि में कई गुना वृद्धि की गयी है तथा अधिनियम में नई धारा 60 (क) जोड़ते हुए अवैध शराब के सेवन से मृत्‍यु की घटनाओं के लिए दोषी व्‍यक्तियों के लिए आजीवन कारावास, मृत्‍युदण्‍ड तक का प्राविधान ‍किया गया है।

सदन में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि 1 जनवरी, 2017 से 31 मार्च, 2019 के मध्‍य सीवर, सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान लगभग 25 सफाई कर्मचारियों की मृत्‍यु होने की सूचना प्राप्‍त हुई है। उक्‍त 25 सफाई कार्मिकों के आश्रितों में से 16 मृतक आश्रितों को 10-10 लाख रूपए की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। अन्‍य आश्रितों को सहायता राशि प्रदान किये जाने के संबंध में परीक्षण कराकर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।

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नगर विकास मंत्री ने कहा कि पर्यावरण विभाग द्वारा कुम्भ मेले के स्नान पर्व के दृष्टिगत कार्ययोजना के अनुसार निर्धारित तिथियों में कारखानों के उत्प्रवाह को गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में जाने से रोका गया था। नगरों से निकलने वाले दूषित उत्प्रवाह कोबायोरिमेडियेशन विधि तथा अन्य तकनीक से 15 जून, 2019 तक शोधित किया गया है। सरकार ने सदन में कहा कि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले नालों, प्रमुख प्रदूषणकारी उद्योगों, सीईटीपी एवं एसटीपी के अनुश्रवण का कार्य उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किया जाता है। दोषी उद्योंगो के विरूद्ध उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाती है।

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सरकार ने सदन में कहा कि सार्वजनिक स्‍थलों पर विभिन्‍न योजनाओं के अन्‍तर्गत रोपित किए जाने वाले पौधों को नष्‍ट होने से बचाने और पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के उद्देश्‍य से रोपित पौधों को एक निश्चित अवधि तक जीवित या सुरक्षित पालने वालों को आर्थिक प्रोत्‍साहन देने की सरकार की कोई योजना नहीं है किन्‍तु इन पौधों के रख रखाव व सुरक्षा के लिए बजट की उपलब्‍धता के अनुसार 3 से 7 वर्ष की अवधि तक अनुरक्षण कार्य किया जाता है। सड़कों के किनारे जरूरत पर हरे पेड़ों को काटने के स्‍थान पर स्‍थानान्‍तरित करने का कार्य वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अभाव में अभी प्रारम्भिक चरण में है जो वन निगम के माध्‍यम से संचालित है।