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आत्म निर्भरता की मिसाल: पहले रिक्शा खींचा अब चला रहीं ई रिक्शा, कौन हैं पूनम ?

गोंडा के आटो स्टैंड अथवा चौराहों पर जाएंगे तो यहां आपको महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण देखने को मिलेगा। सलवार सूट पहने एक महिला अपने ई रिक्शा के बगल में खड़ी, यात्रियों का इंतजार करती दिख जाएंगी।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 7 March 2021 2:23 PM GMT

आत्म निर्भरता की मिसाल: पहले रिक्शा खींचा अब चला रहीं ई रिक्शा, कौन हैं पूनम ?
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रिक्शा चलाने को लेकर लोग मुझ पर हंसे, मज़ाक भी खूब उड़ाया, लेकिन वह पीछे नहीं हटीं। सभी ने उन्हें इस पेशे को छोड़ने और महिलाओं से जुड़े काम करने की सलाह दी।
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तेज प्रताप सिंह

गोंडा। आज हर क्षेत्र में महिलाएं अपना एक अलग स्थान बना रही हैं। यहां भी शहर के आटो स्टैंड अथवा चौराहों पर जाएंगे तो यहां आपको महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण देखने को मिलेगा। सलवार सूट पहने एक महिला अपने ई रिक्शा के बगल में खड़ी, यात्रियों का इंतजार करती दिख जाएंगी। नगर के पंत नगर क्षेत्र में आसरा कालोनी की रहने वाली जिले की इस पहली महिला ई-रिक्शा चालक का नाम पूनम वर्मा हैं।

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पूनम कहती हैं कि पहले मैं किसी की बेटी, बहन, पत्नी और मां के नाम से पहचानी जाती थी, लेकिन अब मुझे मेरे काम और मेरे नाम की पहचान मिल गयी है। जो उनके लिए बहुत खुशी की बात है। हालांकि पूनम वर्मा ने एक ऐसे पेशे को अपनी आजीविका का जरिया बनाया था जो गोंडा जैसे छोटे जिले में महिलाओं के लिए अनोखा समझा जाने वाला काम था।

पहले रिक्शा खींचा अब चला रहीं ई रिक्शा

कहते हैं समय कब रंक को राजा और राजा को रंक बना दे, कोई नहीं जानता। जिले की एक महिला पूनम वर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी अपने पति पर नाज करने वाली पिछड़ी जाति की यह महिला काफी दिनों तक रिक्शा चलाने के बाद अब खुद का ई रिक्शा चलाकर पांच बच्चों के साथ गुजर बसर कर रही है।

हताश और लाचार पूनम ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया। उन्होंने पांच साल पहले रिक्शा चलाने का फैसला किया था। अब वे ई रिक्शा चला रहीं हैं। पूनम की मेहनत व दर्द भरी जिंदगी नारी उत्थान के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है। पुरुष प्रधान समाज में नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनी पूनम अब आत्म निर्भरता की भी जीती जागती मिसाल बन गई हैं।

पति करता था दुर्व्यवहार

Poonam फोटो-सोशल मीडिया

जिले के तरबगंज तहसील क्षेत्र के गांव लिलोई कला निवासिनी पूनम वर्मा की शादी करीब 15 वर्ष पूर्व तरबगंज तहसील क्षेत्र के ही डिक्सिर गांव निवासी धर्मपाल के साथ हुई थी। शादी के बाद काफी दिनों तक पति के साथ रही और सुखमय जीवन बीत रहा था। तब पूनम को अपने कमाऊ पति पर गुमान था।

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समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और पति शराब पीने के आदी हो गए। वह हर रोज़ शराब पीकर पुष्पा को मारते-पीटते, गाली-गलौज करते थे। पूनम उम्मीद से रहती थी कि सब ठीक हो जाएगा, परंतु शादी के 10 साल बाद तक भी कुछ ठीक नहीं हो पाया।

परिवार की हालत इतनी खराब थी कि कई बार वह इससे हार मान कर आत्महत्या करने की सोच चुकी थीं। किन्तु फिर बच्चों का चेहरा सामने आ जाता और वह अपना निर्णय बदल देतीं। काफी प्रयास के बाद भी जब पति की आदत नहीं बदली तो शराबी पति की हरकतों से परेशान पूनम को अंततः अपने पति से किनारा करना ही पड़ा।

पति से अलग होते ही उसके सपने भी बिखर गए और जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गई। रिश्ता टूटने के बाद जब कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो पूनम अपने पांच बच्चों के साथ जनपद मुख्यालय आ गइ्रं और उपरहितन पुरवा में किराये के मकान में रहकर रिक्शा चलाकर अपने पांच बच्चों की परवरिश करने लगीं। तब पूनम को ट्रांसपोर्ट से रिक्शे पर लादकर दुकानों पर सामान की डिलीवरी करते देखा जाता था।

ई रिक्शा चलाकर भरती हैं पांच बच्चों का पेट

पूनम ने बताया कि पति के अत्यधिक शराब पीने और काम धंधा न करने से बच्चे भूखों मरने लगे। पति हमेशा शराब के नशे में बेहोश रहता बच्चे भूख से बिलबिलाते रहते थे। यह स्थिति हमारे सहनशक्ति से बाहर थी। फिर मैंने स्वयं मेहनत करने का फैसला किया। कोई रोजगार न मिलने के कारण पहले हम किराये का रिक्शा लेकर चलाने लगे।

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धीरे-धीरे कुछ पैसा बटोर कर स्वयं का पैर से चलने वाला एक रिक्शा खरीदा। करीब चार वर्षों तक सुबह से शाम तक रिक्शा चलाकर किसी तरह अपने बच्चों का पेट भरती थी। लेकिन कुछ समाजसेवियों की मदद से एक साल पहले उनके पास ई रिक्शा हो गया है तो अब कम मेहनत पड़ रही है। पूनम ने कहा कि अब तक मुझे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है।

बच्चों की शिक्षा पर दे रहीं ध्यान

पूनम के पांच बच्चों में दो बेटे व तीन बेटियां है। तमाम मुश्किलों से जूझने के बाद भी पूनम अपने बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे रही है। गरीबी के कारण बड़ी बेटी अंजू महज कक्षा आठ तक पढ़ पाई। जबकि प्रकाश, आकाश, संजू व बिट्टी मुख्यालय के ही प्राथमिक स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बदहाली के सवाल पर पूनम का पूरा परिवार भावुक हो जाता है।

Poonam फोटो-सोशल मीडिया

पूनम की बड़ी बेटी अंजू ने बताया कि यदि मां रिक्शा न चला रही होती तो अब तक भूख से हम लोगों की मौत हो जाती। मां सुबह से शाम तक कठिन मेहनत कर हम लोगों का पेट भरती है। पिता का साथ छोड़ने के बाद हम लोगों की स्थिति बहुत गम्भीर हो गई। जब मां को और कोई रास्ता न दिखा तो वह शहर आकर किराये के मकान में रहकर रिक्शा चलाकर हम लोगों का भरण पोषण करने लगीं।

समाजसेवियों ने दिलाया ई रिक्शा

पूनम कहती हैं कि रिक्शा चलाने को लेकर लोग मुझ पर हंसे, मज़ाक भी खूब उड़ाया, लेकिन वह पीछे नहीं हटीं। सभी ने उन्हें इस पेशे को छोड़ने और महिलाओं से जुड़े काम करने की सलाह दी। लेकिन रिक्शे के सहारे आजीविका चलाने के मेरे दृढ़ निश्चय ने मुझे डिगने नहीं दिया।

दो साल पहले ईदगाह रोड पटेल नगर में मोबाइल शाप चला रहे समाजसेवी आफताब तन्हा को जब पूनम की बेबसी का पता चला तो पूनम को रिक्शे से मुक्ति दिलाने के लिए एक ई रिक्शा दिलाने का अभियान छेड़ दिया। उनके परिचित रानी बाजार के महेश सोनी ने अपने पुराने ई रिक्शे को दे दिया। जिसकी बैट्री खराब थी।

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कई और लोगों ने सहयोग दिया और नई बैट्री लगवाकर पूनम को ई रिक्शा दे दिया। अब पूनम को रिक्शे में पैण्डल नहीं मारना पड़ता। अब उनके पास खुद का ई रिक्शा है और वह पूरे मनोयोग से आटो चलाकर अपने बच्चों का पेट पाल रही हैं। पूनम कहती हैं कि उन्हें यातायात, पुलिस विभाग के लोगों ने कभी परेशान नहीं किया।

पूनम बनी आत्मनिर्भर

इस काम में जरिए पुष्पा अपनी खुद की एक पहचान बनाने में सफल हुई। अब बैट्री चालित ई रिक्शा का हैंडल थामे पूनम आत्मविश्वास से कहती हैं कि इस बात का मुझे बिलकुल अफ़सोस नहीं है कि मैं पिछले आठ सालों से सिंगल मदर हूं। आज मैं इतनी सक्षम हूं कि अपने पांचों बच्चों की परवरिश खुद कर सकती हूं।

पूनम का कहना है कि उनकी पूरी दुनिया उनके यही पांच बच्चे हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं। वह कहती हैं कि ई रिक्शा अपना है इसलिए इसको चलाने में अधिक बचत होती है। ई-रिक्शा चलाकर पूनम हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। पूनम के पांच बच्चों में दो बेटे व दो बेटियां अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

घर के सारे फैसले खुद लेती हैं पूनम

पूनम की परिस्थितियां देखते हुए कुछ लोगों ने उन्हें पंत नगर क्षेत्र में सरकारी योजना के तहत बनी एक कालोनी में एक आवास दिला दिया। अब पूनम अपने बच्चों के साथ वहीं रहती हैं। पूनम चाहती हैं जो तकलीफ उन्हें उठानी पड़ी वह उनकी बेटी को न उठानी पड़े।

इसलिए पूनम कहती हैं कि बेटियों की शादी का फैसला मैं उसकी मर्जी से करूंगी। अब पूनम अपने घर के सारे फैसले खुद लेती हैं। पूनम को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या बात करते हैं।

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Desk Editor

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