किसानों को इस मामले में लगा बड़ा झटका, रद्द हो गई याचिकाएं

गौतम बुद्ध नगर में सीमेंट फैक्ट्री के लिए अधिग्रहित भूमि का अधिग्रहण के लिए किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से दर्जनों किसानों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल गौतम बुद्ध नगर में सीमेंट फैक्ट्री के लिए अधिग्रहित भूमि का अधिग्रहण के लिए किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है।

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रद्द हुईं याचिकाएं

कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और याचीगण ने कोर्ट आने में देरी की है। इसकी वजह से याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा- नियम है कि यदि अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी हो चुकी है और इसके विरुद्ध कोर्ट जाने में अनावश्यक विलंब किया जाता है तो हाईकोर्ट को अनुच्छेद 226 में दिए अधिकारों का प्रयोग सभी पहलुओं पर विचार करके ही करना चाहिए।

भूमि अधिग्रहण का मामला

गौतमबुद्ध नगर के दादरी तहसील के दो गांव भारतपुरा और धूम मानिकपुर की 94.3 एकड़ भूमि अधिग्रहण मामले पर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 18 जुलाई 2005 और 18 अगस्त 2005 को अधिसूचना जारी कर राज्य सरकार ने सुनियोजित औद्योगिक विकास के नाम पर जमीन का अधिग्रहण किया था। भूमि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम को दी जानी थी। मगर बाद में याचीगण को पता चला कि जमीन एक प्राइवेट सीमेंट कंपनी के लिए अधिग्रहित की गई थी। इस अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की खंडपीठ ने सुनवाई की।

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दरअसल याचिकाकर्ताओं ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी के से 850 रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड मुआवजा देने की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग पर कोई सुनवाई किए बिना भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने खतौनी में उनका नाम खारिज कर यूपीएसआईडीसी का नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। बता दें कि नामांतरण का आदेश जारी करने से पहले याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया।

वहीं कोर्ट में प्रदेश सरकार ने कार्रवाई को विधिपूर्ण बताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट आने में अनावश्यक विलंब किया है। उनके पास इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है इसलिए याचिका खारिज होने योग्य है। यह भी कहा गया कि जमीन का अधिग्रहण यूपीएसआईडीसी के माध्यम से किया गया है जो कि औद्योगिक विकास के लिए है।

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