ट्रंप का मुकाबला बाइडेन से होगा, सैंडर्स का उम्मीदवारी वापस लेने का एलान

अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इन दिनों भारी चुनौती का सामना कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगामी राष्ट्रपति चुनाव में जिस प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ेगा उसका नाम लगभग तय हो गया है।

वाशिंगटन: अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इन दिनों भारी चुनौती का सामना कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगामी राष्ट्रपति चुनाव में जिस प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ेगा उसका नाम लगभग तय हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार की रेस में आगे चल रहे बर्नी सैंडर्स ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। इसके बाद अब यह लगभग तय हो गया है कि ट्रंप को पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन से मुकाबला करना होगा।

समर्थकों के प्रति जताया आभार

सैंडर्स ने एक वीडियो संदेश जारी करके अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का एलान किया। इस वीडियो संदेश में सैंडर्स ने अपने उन समर्थकों के प्रति आभार जताया जिनके दम पर वे राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की रेस में सबसे आगे निकल गए थे। सैंडर्स के इस वीडियो संदेश के बाद अब यह तय हो गया है ट्रंप के मुकाबले बाइडेन ही चुनाव मैदान में होंगे।

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न्याय के लिए जारी रहेगा संघर्ष

सैंडर्स ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा करते हुए एक ट्वीट भी किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि आज मैं अपना कैंपेन खत्म कर रहा हूं। मेरा कैंपेन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सैंडर्स का कहना है कि मैंने हमेशा लोगों की आवाज उठाई है और आगे भी ऐसा करना जारी रखूंगा। उन्होंने कहा कि मैं जमीनी स्तर के एक बेहतरीन चुनावी कैंपेन में साथ देने के लिए हर किसी का आभार जताते हूं जिसका हमारे देश को बदलने की दिशा में बड़ा असर रहा है।

जुझारू नेता की रही है सैंडर्स की छवि

अमेरिकी राजनीति में बर्नी सैंडर्स की छवि एक संघर्षशील और जुझारू नेता की रही है। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि पिछले साल अक्टूबर में ही सैंडर्स को हार्टअटैक से जूझना पड़ा था। लेकिन इसके बाद भी वह चुनाव मैदान में कूद पड़े और अच्छा खासा समर्थन जुटाने में कामयाब रहे। वैसे अमेरिकी राजनीति के जानकारों का कहना है कि सैंडर्स को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं हासिल हो पाया। जानकारों का यह भी कहना है कि सैंडर्स को इस बात का भय था कि उनकी साम्यवादी सोच उन्हें मतदाताओं का समर्थन दिलाने में कामयाब हो पाएगी या नहीं।

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कश्मीर पर भारत विरोधी रुख

यदि भारत के नजरिये से देखा जाए तो सैंडर्स की राजनीति भारत को चोट पहुंचाने वाली ही रही है। वे कश्मीर को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं। कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद सितंबर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कश्मीर के हालात पर चिंता जताई थी। वे कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में रखे गए प्रस्ताव का समर्थन करने की वकालत भी कर रहे थे। उनका कहना था कि अमेरिकी सरकार को इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

कश्मीर में बंदिशों पर जताई थी आपत्ति

ह्यूस्टन में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने धारा 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर में लगाई गई बंदिशों पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि कश्मीर में इंटरनेट और फोन की सुविधा तत्काल बहाल की जानी चाहिए। भारत हमेशा यह कहता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और दूसरे देशों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए मगर सैंडर्स की सोच भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की ही थी।

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चुनाव पर है पूरी दुनिया की निगाह

अमेरिका में आगामी नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। अमेरिका को दुनिया का सबसे ताकतवर देश माना जाता है और इसलिए वहां होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाह होती है। सैंडर्स के चुनाव मैदान से हट जाने के बाद अब यह तय हो गया है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के सामने डेमोक्रेट्स की ओर से जो बाइडेन चुनाव मैदान में होंगे।

ट्रंप का भविष्य इस बात पर निर्भर

अमेरिका इन दिनों कोरोना वायरस की जबर्दस्त मार झेल रहा है। देश में इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या चार लाख से ऊपर पहुंच गई है जबकि यह किलर वायरस हजारों लोगों की जान ले चुका है। दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति इन दिनों महामारी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हालत यह हो गई है कि रोजाना 12 फ़ीसदी की दर से मरीजों की संख्या बढ़ रही है।अब देखने वाली बात यह होगी कि राष्ट्रपति ट्रंप इस महामारी से निपटने में कहां तक कामयाब हो पाते हैं। जानकारों का कहना है कि इस महामारी से जंग का नतीजा अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव को भी काफी हद तक प्रभावित करेगा।