कोरोना से निपटने के लिए इन दो देशों ने बनाया ऐसा प्लान, हर तरफ हो रही चर्चा

भारत समेत पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। अब तक दुनिया में कोरोना वायरस के 427940 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। वहीं 19246 लोगों की मौत भी हो चुकी है।

Published by Aditya Mishra Published: March 27, 2020 | 6:37 pm
Modified: March 27, 2020 | 6:41 pm

नई दिल्ली: भारत समेत पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। अब तक दुनिया में कोरोना वायरस के 427940 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। वहीं 19246 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा मौतों के साथ इटली आगे है। इटली में कोरोना वायरस के कारण अब तक 6820 मौतें हो चुकी है।

बात करें अगर चीन की तो यहां के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने अब तक लगभग 200 देशों को अपनी जद में ले लिया है। दूसरी तरफ कोरोना संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने 22 मार्च से 21 दिन के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे कोरोना के खतरे से निपटने में में मदद मिलेगी? या फिर कोरोना पर जीत हासिल करने के लिए क्या हमें चीन के पड़ोसी देश वियतनाम और जापान से सीख लेने की जरूरत है?

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वियतनाम ने ऐसी दी कोरोना को मात

कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं और कम बजट के बाद भी वियतनाम ने कोरोना को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी और कामयाब भी हुआ। चीन से 10,000 किलोमीटर दूर यूरोप में जब तक कोरोना का काला साया गहराना शुरू हुआ तब तक वियतनाम ने इससे निपटने की तैयारी पूरी कर ली थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जर्मनी में कोरोना से 36,508 लोग संक्रमित हैं और 198 मौतें हो चुकी हैं। चीन से 1,000 किलोमीटर की सीमा साझा कर रहे वियतनाम में जनवरी में केवल 134 लोगों के संक्रमित होने का आंकड़ा था।

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वियतनाम ने कोरोना को हराने के लिए फालो किये रूल्स

-वायरस से संक्रमित सभी लोगों की निगरानी के लिए सख्त क्वारंटीन पॉलिसी बनाई गई।
-वियतनाम में महामारी के खतरे को भांपते हुए बहुत पहले अपनाई बचाव की रणनीति।
12 फरवरी को तीन हफ्तों के लिए 10,000 जनसंख्या वाले शहर किया क्वारंटीन।
10 संक्रमित मामलों के समय ही लिए सख्त फैसले।
संक्रमित लोगों के संपर्क में आए हर दुसरे, तीसरे और चौथे स्तर पर निगरानी।
विदेशों से आए संक्रमित लोगों को शुरू में ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन।
कई शहरों में सार्वजनिक निगरानी के लिए बड़ा सिस्टम तैयार किया।
हर गांव की गलियों में जासूसों की फौज लगा दी।
देश की जनता में युद्ध जैसे भाव पैदा किए।
मीडिया ने सूचनाएं देने के लिए कैंपेन की शुरुआत की।
देश की जनता ने सरकार के फैसलों का स्वागत किया।
आर्थिक तौर पर सरकार को जनता का साथ मिला।
सरकार ने 1.1 बिलियन डॉलर की राशि अर्थव्यवस्था में डाली।

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आखिर कोरोना को हराने के लिए जापान ने क्या कदम उठाए

जापान ने दुनिया से उलट उन क्षेत्रों की पहचान सबसे पहले की, जहां कोरोना से पीड़ित मरीज थे। जापान ने ऐसे मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को फौरन चिन्हित किया और केवल उन्हीं लोगों की टेस्टिंग की जिनमें वायरस के लक्षण दिख रहे थे।

22  मार्च तक जापान में 1000 लोग कोरोना से पीड़ित थे जिसमें से 50 लोगों की मौत भी हो चुकी है। फिर भी जापान ने काफी हद तक इस रोग के फैलने पर रोक लगाई है। चीन के बाद कोरोना जापान पहुंचा था लेकिन बाकी देशों की अपेक्षा में जापान ने इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया।

जापान ने जनवरी के दूसरे हफ्ते में ही ऑफिसों में सैनिटाइजर को अनिवार्य कर दिया था। लोगों ने भी फौरन मास्क का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। जनता ने भी सरकारी गाइडलाइन को फौरन अपनाना शुरू कर दिया था। इसका प्रभाव ये पड़ा कि कोरोना वहीं ठहर गया और ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में नहीं ले सका। जापान सरकार ने संक्रमण की चेन नहीं बनने दी।

संक्रमण कम फैलने का एक कारण ये भी है कि जापान में हाथ मिलाने और गले मिलने का कल्चर बहुत कम है। यहां दूर से ही अभिवादन किया जाता है। इसके अलावा साफ-सफाई के मामले में जापान पहले से ही दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा है।

जापान की मेडिकल कंडीशनिंग भी बहुत अच्छी है। यहां के कई हॉस्पिटल्स में 1 हजार से ज्यादा बेड की सुविधा है। हैरानी की बात ये है कि जब पूरी दुनिया में स्कूल बंद हैं, तब मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापान, स्कूलों को फिर से खोलने की तैयारी कर रहा है।

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