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एक द्वीप बदल गया ज्वालामुखी में, अब विस्फोटों से बना नया टापू

जापान की राजधानी टोक्यो (Tokyo) से करीब 940 किलोमीटर दूर स्थित एक ज्वालामुखी रविवार यानी 28 जून को फट गया। यह ज्वालामुखी बीते कुछ हफ्तों से धीरे-धीरे सुलग रहा था, जिसके बाद ज्वालामुखी में रविवार को विस्फोट हुआ।

Shreya
Updated on: 29 Jun 2020 7:53 AM GMT
एक द्वीप बदल गया ज्वालामुखी में, अब विस्फोटों से बना नया टापू
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टोक्यो: जापान की राजधानी टोक्यो (Tokyo) से करीब 940 किलोमीटर दूर स्थित एक ज्वालामुखी रविवार यानी 28 जून को फट गया। यह ज्वालामुखी बीते कुछ हफ्तों से धीरे-धीरे सुलग रहा था, जिसके बाद ज्वालामुखी में रविवार को विस्फोट हुआ और इसमें से लाल गर्म लावा निकला और आसमान में करीब 12,467 फीट की ऊंचाई तक धुएं के काले मोटे बादल छा गए। ज्वालामुखी के उत्तर-पूर्व की तरफ लावा तेजी से बह रहा है। यह ज्वालामुखी पिछले 6-7 सालों में 11 गुना बढ़ गया है।

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25 जून को ज्वालामुखी में हुआ था बड़ा विस्फोट

इस ज्वालामुखी का नाम निशिनो-शीमा है। जापान मेट्रोलॉजिकल एजेंसी की सैटेलाइट तस्वीरों में टोक्यो (Tokyo) से करीब 940 किलोमीटर दूर स्थित इस ज्वालामुखी में बहुत ज्यादा गतिविधियों के संकेत देखने को मिले हैं। निशिनो-शीमा से काफी तेज लावा बह रहा है, इस बात की पुष्टि जापान के कोस्ट गार्ड ने भी की है। निशिनो-शीमा पिछले साल 6 दिसंबर 2019 से सक्रिय है। लेकिन इस साल 25 जून को इसमें एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद इसमें लगातार विस्फोट हो रहा है।

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एक हरा-भरा आईलैंड था निशिनो-शीमा

बता दें कि करीब 46 साल पहले यानी 1974 में निशिनो-शीमा एक छोटा सा हरा-भरा आईलैंड हुआ करता था। इसमें दस हजार सालों से कोई विस्फोट नहीं हुआ थ। तब यह द्वीप केवल एक ज्वालामुखी का ऊपरी हिस्सा हुआ करता था, जो समुद्र से बाहर दिखता था। निशिनो-शीमा समुद्र के अंदर 9800 फीट ऊंचा है। वहीं इसके आधार का व्यास करीब 30 किलोमीटर है।

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2013 के बाद से विस्फोट होना शुरू हुआ

उसके बाद साल 1974 से इस ज्वालामुखी में विस्फोट होना शुरू हुआ। लेकिन इसमें ज्यादा विस्फोट साल 2013 के बाद से होना शुरू हुआ। यह ज्वालामुखी पिछले 6-7 सालों में 11 गुना बढ़ गया है। अब इसका आकार करीब तीन वर्ग किलोमीटर में फैल गया है। निशिनो-शीमा ज्वालामुखी से बीते 6 से 7 सालों में इतना लावा बहा है कि यहां पर चारों ओर तीन वर्ग किलोमीटर का द्वीप बन गया है, जो लावा के ठंडे हुए पत्थरों से बना है। इसे निजिमा द्वीप या रोजारियो द्वीप भी कहा जात है। जो इस समय वैज्ञानिकों के अध्ययन का केंद्र बना हुआ है।

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इस बात को लेकर चिंता में आए भूविज्ञानी

ज्वालामुखी के लगातार बढ़ते आकार और विस्फोट से भूविज्ञानी बेहद चिंता में हैं। अब उनके मन में यह सवाल है कि जिस ज्वालामुखी में 10 हजार सालों से एक भी विस्फोट नहीं हुआ, उसमें बीते 6 सालों में इतनी सक्रियता कैसे आई?

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