पाकिस्तान-चीन साथ हुए: भारत को लेकर की ये हरकत, सरकार हुई अलर्ट

इन दिनों भारत और चीनी सेनाओं के बीच सरहद पर लगातार तनातनी जारी है। इस बीच चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक और ऐसा काम किया है, जिससे भारत की परेशानी और बढ़ सकती है।

Published by Shreya Published: May 26, 2020 | 2:09 pm
Modified: May 26, 2020 | 2:25 pm

नई दिल्ली: इन दिनों भारत और चीनी सेनाओं के बीच सरहद पर लगातार तनातनी जारी है। दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। ऐसा माना जा रहा है कि लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। इस बीच चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक और ऐसा काम किया है, जिससे भारत की परेशानी और बढ़ सकती है।

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पाकिस्तान-चीन के बीच अरबों डॉलर का समझौता

दरअसल, पाकिस्तान ने चीन की सरकारी कंपनी के साथ अरबों डॉलर का समझौता किया है। इसी समझौते के तहत पाक अधिकृत कश्मीर यानि पीओके में दिआमेर-भाषा बांध का निर्माण किया जाएगा। चीनी कंपनी चाइना पावर ने इस बांध का निर्माण करने के लिए 2.75 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

चीनी कंपनी के पास हैं 70 फीसदी शेयर

चीनी सरकारी कंपनी के इस समझौते में 70 फीसदी शेयर हैं जबकि पाकिस्तान के फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गेनाइजेशन के पास 30 फीसदी शेयर हैं। इस बांध के बारे में कहा जा रहा है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा आरसीसी (टॉलेस्ट रोलर कॉम्पैक्ट) बांध है। ऐसा माना जा रहा है कि साल 2028 तक बांद का निर्माण हो जाएगा।

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गिलगित-बाल्टिस्तान में शुरू होगा परियोजना का काम

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत गिलगित-बाल्टिस्तान में इस परियोजना का काम शुरू किया जाएगा। बता दें कि भारत शुरू से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का विरोध करता आया है, क्योंकि यह आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) PoK से होकर गुजरेगा।

पाकिस्तान के कदम की भारत ने की निंदा

पाकिस्तान के इस कदम पर भारत ने कड़ी निंदा जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत पाकिस्तान द्वारा दिआमेर-भाषा बांध पर उठाए गए इस कदम की कड़ी निंदा करता है। पाकिस्तान के कब्जे में आने वाले भारतीय क्षेत्र में किसी भी परियोजना को लेकर हम पाकिस्तान और चीन के सामने लगातार अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं।

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इसे लेकर हमारा रूख हमेशा स्पष्ट रहा है। दूसरी तरफ बीजिंग की तरफ से भारत की चिंताओं को खारिज कर दिया गया। बीजिंग ने अपने फैसले का बचाव करते कहा कि कश्मीर को लेकर चीन का पक्ष स्पष्ट है। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों के विकास के लिए चीन और पाकिस्तान मिलकर आर्थिक सहयोग कर रहे हैं।

भारत करता आया है बीआरआई का विरोध

वॉशिंगटन में विल्सन सेंटर में एशिया कार्यक्रम के उप-निदेशक माइकल कुगैलमन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, भारत की ओर से हमेशा चीन की बेल्ट ऐंड रोड (बीआरआई) का विरोध किया जाता रहा है। लेकिन इसके चलते चीन और पाकिस्तान नहीं रुके और यहीं बात इस बांध पर भी लागू होती है।

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गिलगित-बाल्टिस्तान में कब्जा मजबूत करना चाहता है पाक

बता दें कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में अपना अवैध कब्जा मजबूत करने के उद्देश्य से वहां पर चुनाव आयोजित करने के लिए एक कार्यवाहक सरकार गठित करने की योजना बनाई है। वहीं इस पर भारत ने आपत्ति जताई थी। भारत का कहना था कि पाकिस्तान की किसी भी संस्था के पास अवैध रूप से कब्जा किए गए इलाके पर निर्णय करने का कोई अधिकार नहीं है।

पाकिस्तान में नहीं है लागत चुकाने की क्षमता

वहीं दिआमेर-भाषा बांध को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान में बांध की लागत चुकाने की क्षमता नहीं है। इस बारे में माइकल कुगैलमन कहते हैं कि इस्लामाबाद अब तक इस समस्या का हल भी नहीं ढूंढ पाया है कि वो इतनी बड़ी लागत कैसे अदा करेगा।

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