UN में पाक की हुई बेईज्जती, इस देश ने की बोलती बंद, भारत पर लगाया था ये आरोप

भारत को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान लगातार नई चालें चल रहा है। अब एक फिर पाकिस्तान की नापक चाल फेल हो गई है और उसे मुंह की खानी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की वर्चुअल बैठक हो रही थी।

नई दिल्ली: भारत को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान लगातार नई चालें चल रहा है। अब एक फिर पाकिस्तान की नापक चाल फेल हो गई है और उसे मुंह की खानी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की वर्चुअल बैठक हो रही थी। इसी दौरान पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत में इस्लामोफोबिया फैलाया जा रहा है।

पाकिस्तान के आरोपों का मालदीव ने तगड़ा जवाब दिया। मालदीव ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग हरकतें या बयानबाजी करते हैं, जिसे 130 करोड़ भारतीयों की राय नहीं माना जा सकता। मालदीव ने इसके साथ ही कहा कि इस्लामोफोबिया को लेकर ओआईसी को दक्षिण एशिया के किसी एक देश पर निशाना नहीं साधना चाहिए।

यह भी पढ़ें…अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बिडेन को मिली बढ़त, भड़के ट्रंप ने पोल को फर्जी बताया

गौरतलब है कि ओआईसी के राजदूतों की बैठक में दक्षिण एशिया में इस्लामोफोबिया बढ़ने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस दौरान पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने प्रस्ताव रखा कि भारत सक्रिय रूप से इस्लामोफोबिया के एजेंडा को बढ़ा रहा है।

यह भी पढ़ें…बदल गया बैंक खुलने का समय! ऐसे चेक करें अपनी ब्रांच की टाइमिंग

ओआईसी का बयान

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के मानवाधिकार आयोग ने भी भारत पर कोरोना वायरस को लेकर मुस्लिमों की छवि खराब कर इस्लामोफोबिया फैलाने का आरोप लगाया और इसकी आलोचना की थी। ओआईसी ने कहा कि भारत सरकार इस्लामोफोबिया की फैलाव को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा करे।

यह भी पढ़ें…इन ट्रेनों के नियमों में बड़ा बदलाव, यात्रा से पहले जान लें ये दिशा निर्देश

मालदीव ने कही ये बात

यूएन में मालदीव की स्थायी प्रतिनिधी थिलमीजा हुसैन ने कहा कि कुछ भटके हुए लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाई गई बातें भारत के 130 करोड़ जनता की राय नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। वहां कई धर्मों के लोगों के रहते हैं और 20 करोड़ मुस्लिम भी रहते हैं। ऐसे में इस्लामोफोबिया की बात बेकार है, क्योंकि, इसमें कोई तथ्य नहीं है।