नागरिकता बिल पर भड़के मुस्लिम देश, बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने रद्द किया भारत दौरा

नागरिकता संशोधन बिल 2019 बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। बिल पास होने के बाद तीनों देशों ने प्रतिक्रिया दी है। इसके साथ ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने अपनी भारत यात्रा को रद्द कर दिया है।

Published by dharmendrakumar Published: December 12, 2019 | 3:59 pm
Modified: December 13, 2019 | 4:26 pm

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन बिल 2019 बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। बिल पास होने के बाद तीनों देशों ने प्रतिक्रिया दी है। इसके साथ ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने अपनी भारत यात्रा को रद्द कर दिया है।

पाकिस्तान ने नागरिकता संशोधन बिल को पक्षपातपूर्ण करार दिया है। उसने विरोध जताते हुए कहा कि यह बिल दोनों देशों के बीच तमाम द्विपक्षीय समझौतों का पूरी तरह से उल्लंघन है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए भारत गलत मंशा से उसके आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहा है।

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तो वहीं अफगानिस्तान ने भी इस बिल पर आपत्ति जताई है। अफगानिस्तान के राजदूत ने कहा कि वह ऐसे देशों में शामिल नहीं है जहां पर सरकार अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करती हो। अफगानिस्तान के राजदूत ताहिर कादिरी ने कहा कि पिछले कुछ सालों से सरकार अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक सिख समुदाय के हमारे भाइयों और बहनों का पूरा सम्मान कर रही है।

ताहिर कादरी ने कहा कि हमारे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है और हमारी संसद में उनके लिए सीटें आरक्षित हैं और प्रेजेडेंशियल पैलेस में भी उनके प्रतिनिधि मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देशों के साथ अफगानिस्तान को नहीं रखा जा सकता है।

राजदूत ताहिर कादिरी ने कहा कि अल्पसंख्यकों की बात करें तो अफगानिस्तान चार दशकों से गृहयुद्ध से जूझता रहा है और आप समझ सकते हैं कि युद्ध में क्या होता है। अफगानिस्तान के सभी नागरिक युद्ध पीड़ित रहे हैं और इसमें उनकी धार्मिक पहचान की कोई भूमिका नहीं थी।

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उन्होंने बताया कि अफगान दूतावास ने हाल ही में भारत में रह रहे अफगान सिखों के लिए आईडी कार्ड जारी करना शुरू किया है। कादिरी ने कहा कि यह दिखाता है कि अफगान सरकार सिख समुदाय समेत सभी अल्पसंख्यकों का सम्मान करती है। हमारे यहां सभी ने मुश्किलें झेली हैं और सरकार बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी नागरिकों का सम्मान करने की कोशिश कर रही है।

lतो वहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मेमन ने अपनी भारत यात्रा को भी रद्द कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक नागरिकता संशोधन विधेयक के बाद के हालात को देखते हुए उन्होंने अपनी यात्रा रद की है। उनका 12-14 दिसंबर तक भारत आने का कार्यक्रम था।

इससे पहले एके अब्दुल मेमन ने नागरिकता बिल पर कहा कि इससे भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचेगा। मेमन ने कहा कि भारत ऐतिहासिक तौर पर एक सहिष्णु देश रहा है जिसने धर्मनिरपेक्षता में विश्वास जताया है, लेकिन अगर वे इस रास्ते से भटकते हैं तो उनकी ऐतिहासिक छवि कमजोर हो जाएगी।

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विदेश मंत्री ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के प्रताड़ित होने के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश जैसे कुछ ही देश हैं जहां सांप्रदायिक सौहार्दता कायम है। अगर अमित शाह कुछ महीने बांग्लादेश में गुजारें तो उन्हें हमारे देश की सांप्रदायिक एकता के बारे में पता चल जाएगा।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत के करीबी रिश्ते रहे हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का सुनहरा अध्याय भी करार दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक तौर पर बांग्लादेश यह उम्मीद करता है कि भारत ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उनके बीच तकरार आए।

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मोमेन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के आरोप को गलत ठहराते हुए कहा कि गृहमंत्री अमित शाह को जिसने भी जानकारी दी है, वह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अधिकतर महत्वपूर्ण फैसले अलग-अलग धर्मों के लोगों ने लिए हैं…हमने कभी किसी को उनके धर्म के आधार पर जज नहीं किया। मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश के हर क्षेत्र में सभी धर्म के अनुयायियों को समान अधिकार मिले हैं और उनके यहां सांप्रदायिक सौहार्द कायम है।